आज का युवा चाहता है चौड़ी छाती, 8 पैक एब्स और ऐसी बॉडी जिसे देखकर दुनिया कहे WOW! लेकिन सवाल ये है क्या ये हैवी एक्सरसाइज ही सफलता का रास्ता है या कहीं ये जल्दबाजी शरीर पर भारी तो नहीं पड़ रही? आज 20 से 30 साल के यंगस्टर्स क्विक गेन की रेस में हैं। बिना ट्रेनर, बिना सही फॉर्म, सीधे हैवी वेट, ऊपर से सप्लीमेंट्स, प्रोटीन शेक और कुछ लोग तो स्टेरॉयड इंजेक्शन तक लेते हैं। इससे मसल्स तो दिखने लगती हैं लेकिन अंदर क्या हो रहा है, कोई नहीं देखता। गलत फॉर्म से घुटनों का कार्टिलेज घिसता है। लिगामेंट फट सकते हैं, कंधे में लैब्रल टियर, कमर में स्लिप डिस्क, कलाई में स्ट्रेन, ये अब आम हो चुका है। और यही चोट अगर बार-बार हो तो ऑस्टियोआर्थराइटिस, क्रॉनिक पेन और यहां तक कि हार्ट पर भी दबाव पड़ सकता है। 'हैवी एक्सरसाइज' से हार्ट के चैंबर में फाइब्रोसिस और रिद्म गड़बड़ाने का खतरा बढ़ जाता है।
याद रखिए मसल्स की ताकत तभी काम आएगी, जब जोड़ और स्पाइन सुरक्षित रहेंगे। वार्म-अप के बिना एक्सरसाइज मतलब चोट को सीधे न्योता देना है। शरीर को तराशना है तो पहले उसे समझना होगा। योग सिखाता है 'संयम, संतुलन और सुरक्षा'। भारी वजन से तुरंत बॉडी बन तो सकती है, लेकिन गलत तरीके से किया गया व्यायाम नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए बॉडी बनाइए, मगर अपनी सलाहियत के हिसाब से। साथ में वार्म-अप, सही फॉर्म और रेस्ट भी बेहद जरूरी है। लेकिन अगर योग को अपनाते हैं तो इसमें चोट की गुंजाइश तो कम है ही, मजबूत और लंबी उम्र वाला शरीर भी मिलता है। स्वामी रामदेव से जानते हैं हेल्दी वजन कैसे रखें?
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