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तिहाड़ जेल में सांसद इंजीनियर राशिद से मारपीट, कहासुनी के बाद किन्नर कैदियों ने किया हमला

 Reported By: Atul Bhatia,  Kumar Sonu Edited By: Vineet Kumar Singh
 Published : Sep 06, 2025 02:45 pm IST,  Updated : Sep 06, 2025 02:45 pm IST

तिहाड़ जेल में सांसद इंजीनियर राशिद पर ट्रांसजेंडर कैदियों ने हमला किया, जिसमें उन्हें मामूली चोटें आईं। विवाद की वजह आपसी कहासुनी बताई गई है। राशिद की पार्टी ने हमले को साजिश बताया है। संसद में भाग लेने के लिए उन्हें पैरोल मिली है, लेकिन सुरक्षा खर्च खुद उठाना पड़ रहा है।

Engineer Rashid Tihar Jail, attack on MP in Tihar- India TV Hindi
तिहाड़ जेल में बंद सांसद इंजीनियर राशिद। Image Source : PTI

नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर के बारामूला से लोकसभा सांसद इंजीनियर राशिद पर दिल्ली की तिहाड़ जेल में ट्रांसजेंडर कैदियों ने हमला कर दिया। सूत्रों के मुताबिक, यह घटना करीब एक हफ्ते पहले हुई, जब राशिद और ट्रांसजेंडर कैदियों के बीच कहासुनी हो गई थी। जेल नंबर 3 में बंद राशिद को इस हमले में मामूली चोटें आई हैं। जेल सूत्रों ने इसे सुनियोजित साजिश बताने वाली खबरों को खारिज किया है और इसे महज कहासुनी के बाद हुई एक मामूली झड़प बताया।

क्या था विवाद की वजह?

सूत्रों के मुताबिक, राशिद और ट्रांसजेंडर कैदियों के बीच पहले से तनाव चल रहा था। आरोप है कि तिहाड़ जेल प्रशासन ट्रांसजेंडर कैदियों का इस्तेमाल कश्मीरी कैदियों, खासकर राशिद और अन्य को परेशान करने के लिए करता है। राशिद की पार्टी, अवामी इत्तिहाद पार्टी (AIP) ने इस हमले को साजिश करार दिया है। पार्टी ने मांग की है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच की जाए, ताकि सच्चाई सामने आए।

कौन है इंजीनियर राशिद?

इंजीनियर राशिद को 2019 में जम्मू-कश्मीर में कथित आतंकवादी फंडिंग मामले में गिरफ्तार किया गया था। उन पर आपराधिक साजिश, राजद्रोह और आतंकवाद से जुड़े आरोप हैं, जिनके तहत उन पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत मामला दर्ज है। इसके बावजूद, राशिद ने 2024 के लोकसभा चुनाव में नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता और जम्मू-कश्मीर के मौजूदा मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को हराकर बारामूला सीट से जीत हासिल की। राशिद ने तिहाड़ जेल में कश्मीरी कैदियों के साथ होने वाले कथित भेदभाव और अपमान की घटनाओं को भी उजागर किया है।

हाई कोर्ट में चल रही है सुनवाई

राशिद को संसद सत्र में हिस्सा लेने के लिए कस्टडी पैरोल दी गई है, लेकिन इसके लिए उन्हें अपनी यात्रा और सुरक्षा खर्च खुद उठाने पड़ रहे हैं। जेल प्रशासन ने राशिद से करीब 4 लाख रुपये जमा करने को कहा है। राशिद ने इस शर्त को बदलने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट में अर्जी दी है। उनका कहना है कि इतना खर्च उठाना उनके लिए मुश्किल है और यह उनकी संवैधानिक जिम्मेदारियों को निभाने में बाधा डाल रहा है।

कोर्ट में अब तक क्या-क्या हुआ?

दिल्ली हाई कोर्ट के जज विवेक चौधरी और अनूप जयराम भंभानी की बेंच ने राशिद की अर्जी पर सुनवाई की। राशिद के वकील ने तर्क दिया कि संसद में हिस्सा लेना उनका सार्वजनिक कर्तव्य है, न कि कोई एहसान। उन्होंने कहा कि जेल नियमों में पैरोल के दौरान सुरक्षा कर्मियों के वेतन का खर्च कैदी से वसूलने का कोई प्रावधान नहीं है। वहीं, दिल्ली सरकार और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की ओर से दलील दी गई कि राशिद को तिहाड़ से संसद ले जाने के लिए 15 दिल्ली सशस्त्र पुलिस कर्मियों की जरूरत पड़ती है, जिसके कारण रोजाना का खर्च काफी ज्यादा है।

अगली सुनवाई का इंतजार

कोर्ट ने सरकार से पूछा कि इस खर्च का हिसाब कैसे लगाया गया और क्या यह नियमों के मुताबिक है। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि कस्टडी पैरोल और अंतरिम जमानत में फर्क है, और आम तौर पर पैरोल का खर्च लाभ लेने वाले को ही देना पड़ता है। दिल्ली हाईकोर्ट ने राशिद की अर्जी पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। कोर्ट ने राशिद के वकील को सलाह दी कि वे इस शर्त को बदलने की अर्जी उस बेंच के सामने दोबारा रखें, जिसने मार्च में मूल आदेश पारित किया था। कोर्ट ने कहा कि संसद में हिस्सा लेने का हक और उससे जुड़े खर्चों के सवाल को संसदीय नियमों और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के आधार पर देखा जाएगा। अब इस मामले में अगली सुनवाई का इंतजार है।

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