हरिद्वार के हर की पैड़ी पर गैर-हिन्दुओं के प्रवेश पर पाबंदी लगाने की मांग अब जोर पकड़ रही है। शुक्रवार को हरिद्वार में हिन्दु मुस्लिम विवाद की आहट सुनाई दी। गंगा सभा की तरफ से हरिद्वार में गंगा के घाटों पर जगह-जगह बोर्ड लगा दिए गए, जिनमें लिखा है कि हर की पैड़ी पर गैर हिन्दुओं का प्रवेश वर्जित है। हालांकि, इसमें किसी संस्था का नाम नहीं लिखा है। बोर्ड में नीचे लिखा गया है कि आज्ञा से म्युनिसपल एक्ट हरिद्वार।
हरिद्वार में भी होने वाला है कुंभ मेला
असल में गंगा सभा ने पिछले हफ्ते ही ये कहा था कि हरिद्वार हिन्दुओं के लिए पवित्र स्थान है। लाखों हिन्दू रोज हर की पैड़ी पर गंगास्नान और पूजा अर्चना के लिए आते हैं। अब हरिद्वार में कुंभ भी होने वाला है। इसलिए हर की पैड़ी पर दूसरे धर्मों के लोगों को आने की इजाजत नहीं होनी चाहिए।
जगह-जगह लगाए गए बोर्ड
इसके बाद आज इस तरह के बोर्ड जगह-जगह लगा दिए गए, लेकिन जब प्रशासन से इसके बारे में पूछा गया तो गढ़वाल मंडल के कमिश्नर ने कहा कि उन्हें इस तरह के बोर्ड लगाए जाने की जानकारी नहीं हैं लेकिन अभी तक प्रशासन ने इस तरह का कोई फैसला नहीं लिया है।
गंगा सभा से जुड़े लोग भी एक्टिव
अभी इस मुद्दे पर प्रशासन ने कोई फैसला नहीं किया है, लेकिन गंगा सभा से जुड़े लोग एक्टिव हो गए हैं। हर की पैड़ी पर आने वालों लोगों के आधार कार्ड चेक कर रहे हैं। तीर्थ पुरोहितों का कहना है कि जब अंग्रेजों ने हर की पैड़ी पर गैर हिन्दुओं के प्रवेश को गलत माना था, तो हमारी सरकार को ये मांग मानने में क्या दिक्कत है। सरकार को अंग्रेजों के जमाने में बने नियम का पालन करवाना चाहिए।
सीएम धामी ने भी इशारों-इशारों में किया समर्थन
मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने भी इशारों-इशारों में गंगा सभा की इस मांग का समर्थन किया। धामी ने कहा कि हरिद्वार देवभूमि का प्रवेश द्वार है। मां गंगा की पवित्र भूमि है। इसलिए इसकी पवित्रता की रक्षा होनी ही चाहिए।
सपा के नेताओं ने किया विरोध
लेकिन समाजवादी पार्टी के नेताओं ने इसका विरोध किया है। एसटी हसन ने कहा कि इस देश में हर नागरिक को बराबरी का हक हासिल है। धर्म के आधार पर किसी को कहीं आने जाने से नहीं रोका जा सकता है। ये संविधान के खिलाफ है, इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
धीरेंद्र शास्त्री का भी बयान आया सामने
इस मुद्दे पर बागेश्वर धाम वाले आचार्य धीरेन्द्र शास्त्री का भी बयान सामने आया है। आचार्य धीरेन्द्र शास्त्री ने कहा कि वैसे तो उन्हें किसी के कहीं आने जाने पर ऐतराज नहीं है, लेकिन जिन लोगों को हिंदुत्व से परहेज है, जो गंगा को मां नहीं मानते, उन्हें हर की पैड़ी आने की जरूरत क्या है।
अंग्रेजों के जमाने में भी गैर हिंदुओं का प्रवेश वर्जित था
तीर्थ पुरोहित कह रहे हैं कि अंग्रेजों के जमाने में हर की पैड़ी पर गैर हिंदुओं का प्रवेश वर्जित था। अंग्रेज तो डिवाइड एंड रूल में भी यकीन करते थे। उनके बनाए नियम कायदे अब लागू करने से क्या फायदा, ये ठीक है कि उत्तराखंड में फर्जी बाबाओं की बाढ़ आई हुई है। साधु के वेश में हर दिन ढोंगी बाबा पकड़े जा रहे हैं। ये श्रद्धालुओं को ठगते हैं, उनके आस्था के साथ खेलते हैं।
धार्मिक स्थलों पर बनाई जाती है रील्स
कुछ लोग धार्मिक स्थलों पर रील्स बनाते हैं। आस्था का मजाक उड़ाते हैं। ऐसे लोगों को रोकना जरूरी है, सभी धार्मिक स्थलों की पवित्रता की रक्षा होनी चाहिए, लेकिन उसका तरीका ये नहीं हो सकता कि आप गैर हिंदुओं की प्रंवेश बंद कर दें पाबंदियां लगाएं। धर्म की शुचिता बनाए रखने के और भी रास्ते हो सकते हैं, जिनमें कहीं किसी से टकराव ना हो।