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'मालदा कांड सोची-समझी साजिश थी', बंगाल सरकार को SC ने लगाई फटकार, 10 प्वाइंट्स में जानें क्या कहा

 Reported By: Atul Bhatia, Edited By: Kajal Kumari
 Published : Apr 02, 2026 01:41 pm IST,  Updated : Apr 02, 2026 01:41 pm IST

मालदा में न्यायिक अधिकारियों के नौ घंटे के घेरेबंदी को लेकर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को कड़ी फटकार लगाई। 10 प्वाइंट्स में जानें सुप्रीम कोर्ट ने क्या क्या कहा?

मालदा में हुई घटना पर सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी- India TV Hindi
मालदा में हुई घटना पर सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी Image Source : FILE PHOTO

सुप्रीम कोर्ट ने मालदा में न्यायिक अधिकारियों के नौ घंटे के घेरेबंदी को लेकर पश्चिम बंगाल सरकार पर कड़ी फटकार लगाई और इसे चुनावी प्रक्रिया को बाधित करने और अधिकारियों का मनोबल गिराने का "पूर्व नियोजित, सुनियोजित और प्रेरित" प्रयास बताया। मतदाताओं के नाम हटाए जाने के विरोध में प्रदर्शनकारियों द्वारा मतदान सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में लगे तीन महिला अधिकारियों सहित सात न्यायिक अधिकारियों को ब्लॉक विकास अधिकारी के कार्यालय में बंधक बना लिया गया। कोर्ट ने उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय सशस्त्र बलों की तैनाती का भी आदेश दिया है।

जानें कोर्ट ने क्या टिप्पणी की

  1.  न्यायालय ने अपने आदेश में कहा, यह घटना न केवल न्यायिक अधिकारियों को डराने-धमकाने का एक घिनौना प्रयास है, बल्कि यह न्यायालय के अधिकार को भी चुनौती देती है।

     

  2. कोर्ट ने कहा, यह कोई सामान्य घटना नहीं थी, बल्कि न्यायिक अधिकारियों का मनोबल गिराने और लंबित मामलों में आपत्तियों के निपटारे की चल रही प्रक्रिया को रोकने के लिए सोची-समझी और प्रेरित चाल प्रतीत होती है।
     
  3. ​यह पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा कर्तव्य की अवहेलना को दर्शाता है, और उसके अधिकारियों को यह स्पष्ट करना होगा कि सूचना दिए जाने के बावजूद वे न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षित निकासी सुनिश्चित करने में क्यों विफल रहे।
     
  4. मुख्य न्यायाधीश ने आगे कहा, रात 11 बजे तक आपका कलेक्टर वहां नहीं था। मुझे रात में बहुत कठोर मौखिक आदेश जारी करने पड़े।
     
  5. हम किसी को भी कानून अपने हाथ में लेकर गंभीर कर्तव्य निभा रहे न्यायिक अधिकारियों में मनोवैज्ञानिक भय पैदा करने की अनुमति नहीं देंगे। इसके साथ ही पीठ ने चेतावनी देते हुए कहा कि ऐसे कृत्य आपराधिक अवमानना ​​के दायरे में आ सकते हैं। इसने राज्य प्रशासन की आपराधिक विफलता की भी आलोचना की।
     
  6. कोर्ट ने कहा, दुर्भाग्य से आपके राज्य में हर कोई राजनीतिक भाषा बोलता है और यह सबसे अधिक ध्रुवीकृत राज्य है। आप हमें अवलोकन करने के लिए मजबूर कर रहे हैं।
     
  7. मुख्य न्यायाधीश ने पश्चिम बंगाल के एडवोकेट जनरल से कहा, क्या आपको लगता है कि हमें पता नहीं है कि उपद्रवी कौन हैं? मैं रात 2 बजे तक सब कुछ निगरानी कर रहा था। बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण घटना है।
     
  8. सभी नेताओं को एकजुट होकर इसकी निंदा करनी चाहिए। हम यहां अधिकारियों की रक्षा के लिए मौजूद हैं। उनके आदेश हमारे न्यायालय के आदेश माने जाएंगे।
     
  9. कोर्ट ने कहा, इसका उद्देश्य जजों  को डराना,आपत्ति-सुनवाई प्रक्रिया को बाधित करना और अदालत के अधिकार को चुनौती देना है  और ये घटना अदालत की आपराधिक अवमानना के दायरे में आती है।
     
  10. सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक अधिकारियों के लिए केंद्रीय बलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आदेश दिया, कोर्ट ने बंगाल  के शीर्ष अफसरों को कारण बताओ नोटिस जारी किया और कहा कि इस घटना की जांच CBI या NIA से करवाई जाए, प्रारंभिक जांच रिपोर्ट अदालत को सौंपी जाए।
     
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