Thursday, January 29, 2026
Advertisement
  1. Hindi News
  2. भारत
  3. राष्ट्रीय
  4. कौन हैं UGC के नए नियमों पर रोक लगाने वाले जज, जानिए CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची के बारे में

कौन हैं UGC के नए नियमों पर रोक लगाने वाले जज, जानिए CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची के बारे में

सुप्रीम कोर्ट के दो जज की बेंच ने यूजीसी के नए नियमों पर रोक लगा दी है। सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने कहा कि इन नियमों की भाषा स्पष्ट नहीं है।

Edited By: Shakti Singh
Published : Jan 29, 2026 04:34 pm IST, Updated : Jan 29, 2026 05:32 pm IST
joymalya Bagchi, Surya Kant- India TV Hindi
Image Source : PTI/SUPREME COURT OF INDIA सीजेआई सूर्यकांत (बाएं), जस्टिस जॉयमाल्या बागची

उच्च शैक्षणिक संस्थानों से जातिगत भेदभाव खत्म करने के लिए यूजीसी ने नए नियम ड्राफ्ट किए हैं। इनकी भाषा स्पष्ट नहीं होने के कारण जमकर विरोध हुआ और अब सुप्रीम कोर्ट ने इस नियमों पर स्टे लगा दिया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने कहा कि विनियम प्रथम दृष्टया अस्पष्ट प्रतीत होते हैं और इनका दुरुपयोग किए जाने की आशंका है। शीर्ष अदालत ने मौखिक रूप से टिप्पणी की कि अगर इस मामले में हस्तक्षेप नहीं किया गया तो इसका खतरनाक प्रभाव पड़ेगा और समाज में विभाजन पैदा होगा। आइए जानते हैं कि यूजीसी के नियमों पर रोक लगाने वाले दोनों न्यायाधीश कौन हैं।

कौन हैं न्यायमूर्ति सूर्यकांत?

भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को निरस्त करने, बिहार मतदाता सूची संशोधन, पेगासस स्पाइवेयर मामला, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और नागरिकता के अधिकार जैसे अहम फैसलों का हिस्सा रहे हैं। हरियाणा के हिसार जिले में मध्यमवर्गीय परिवार में जन्में न्यायमूर्ति सूर्यकांत एक छोटे शहर के वकील से देश के सर्वोच्च न्यायिक पद तक पहुंचे हैं। उन्होंने 24 नवंबर 2025 को भारत के मुख्य न्यायाधीश के पद की शपथ ली और नौ फरवरी 2027 को 65 वर्ष की उम्र होने पर यह पद छोड़ देंगे। न्यायपालिका के प्रमुख के रूप में अपनी शीर्ष दो प्राथमिकताओं को रेखांकित करते हुए, प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा था कि अदालतों में लंबित पांच करोड़ से अधिक मामलों से निपटना और विवाद समाधान के वैकल्पिक तरीके के रूप में मध्यस्थता को बढ़ावा देना उनके दो महत्वपूर्ण लक्ष्य होंगे।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत का करियर

पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में कई उल्लेखनीय फैसले देने वाले न्यायमूर्ति सूर्यकांत को पांच अक्टूबर, 2018 को हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया था। उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में उनका कार्यकाल अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को हटाने से जुड़े फैसले, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और नागरिकता के अधिकारों पर फैसले देने के लिए जाना जाता है। वह उस पीठ का भी हिस्सा थे जिसने औपनिवेशिक युग के राजद्रोह कानून को स्थगित रखा था, तथा निर्देश दिया था कि सरकार के समीक्षा करने तक इसके तहत कोई नयी प्राथमिकी दर्ज नहीं की जाएगी। 

SIR पर सुनाया अहम फैसला

न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने निर्वाचन आयोग से बिहार में मसौदा मतदाता सूची से बाहर रखे गए 65 लाख मतदाताओं का ब्योरा सार्वजनिक करने को भी कहा था। उन्होंने निर्वाचन आयोग को मतदाता सूची में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) करने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया था। जमीनी स्तर पर लोकतंत्र और लैंगिक न्याय पर जोर देने वाले एक आदेश में, उन्होंने एक ऐसी पीठ का नेतृत्व किया जिसने गैरकानूनी तरीके से पद से हटाई गई एक महिला सरपंच को बहाल किया और मामले में लैंगिक पूर्वाग्रह को उजागर किया। उन्हें यह निर्देश देने का श्रेय भी दिया जाता है कि सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन समेत बार एसोसिएशन में एक तिहाई सीट महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएं। 

चार धाम यात्रा पर भी अहम फैसला सुनाया

न्यायमूर्ति सूर्यकांत उस पीठ का हिस्सा थे, जिसने 2022 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पंजाब यात्रा के दौरान सुरक्षा चूक की जांच के लिए शीर्ष अदालत की पूर्व न्यायमूर्ति इंदु मल्होत्रा ​​की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय समिति नियुक्त की थी। उन्होंने रक्षा बलों के लिए ‘वन रैंक-वन पेंशन’ (ओआरओपी) योजना को भी बरकरार रखा था और इसे संवैधानिक रूप से वैध बताया तथा सशस्त्र बलों में स्थायी कमीशन में समानता का अनुरोध करने वाली महिला अधिकारियों की याचिकाओं पर सुनवाई जारी रखी। एक अन्य उल्लेखनीय मामले में उन्होंने उत्तराखंड में चार धाम परियोजना को बरकरार रखा और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए इसके रणनीतिक महत्व पर जोर दिया। 

समय रैना को लगाई थी फटकार

न्यायमूर्ति सूर्यकांत की पीठ ने पॉडकास्टर रणवीर इलाहाबादिया को उनकी "अपमानजनक" टिप्पणियों के लिए चेतावनी देते हुए यह भी कहा कि ‘‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सामाजिक मानदंडों का उल्लंघन करने का लाइसेंस नहीं हैं।’’ न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ के मेजबान समय रैना समेत कई स्टैंड-अप कॉमेडियन को उनके शो में दिव्यांगजनों का उपहास करने के लिए फटकार लगाई और केंद्र को ऑनलाइन सामग्री को विनियमित करने के लिए दिशानिर्देश लाने का निर्देश दिया। यह कहते हुए कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता निरपेक्ष नहीं है, प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कर्नल सोफिया कुरैशी पर निशाना साधने वाले मध्य प्रदेश के मंत्री विजय शाह की टिप्पणी के लिए उन्हें फटकार लगाई। कुरैशी ने 'ऑपरेशन सिंदूर' पर मीडिया ब्रीफिंग के बाद देश भर में प्रसिद्धि हासिल की थी। पीठ ने कहा कि एक मंत्री द्वारा बोला गया प्रत्येक शब्द जिम्मेदारी की भावना के साथ होना चाहिए। 

पेगासस मामले पर बनाई थी समिति

न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने लगातार इस बात पर जोर दिया कि भ्रष्टाचार शासन और जनता के विश्वास को कमजोर करता है। उन्होंने 2023 के फैसले में इसे एक ‘गंभीर सामाजिक खतरा’ करार दिया और सीबीआई को ‘बैंक और डेवलपर्स के बीच साठगांठ का खुलासा करने वाले 28 मामलों की जांच करने का आदेश दिया। इस धोखाधड़ी से घर खरीदारों को नुकसान हुआ। उन्होंने आबकारी नीति मामले में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को जमानत देने वाली पीठ का भी नेतृत्व किया और कहा कि एजेंसी को ‘‘पिंजरे में बंद तोता’’ होने की धारणा को दूर करने के लिए काम करना चाहिए। उच्चतम न्यायालय में पदोन्नत होने के बाद से वह 300 से अधिक पीठों का हिस्सा रहे हैं। न्यायमूर्ति सूर्यकांत उन सात न्यायाधीशों की पीठ में भी थे, जिसने 1967 के एएमयू के फैसले को खारिज कर दिया था, जिससे उसके अल्पसंख्यक दर्जे पर पुनर्विचार का रास्ता खुल गया था। वह उस पीठ का भी हिस्सा थे जिसने कथित तौर पर कुछ लोगों की निगरानी के लिए इजराइली जासूसी सॉफ्टवेयर पेगासस के उपयोग की जांच के लिए साइबर विशेषज्ञों की एक समिति गठित की थी।

न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची का करियर

न्यायाधीश जॉयमाल्या बागची ने मार्च 2025 को उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में शपथ ली थी। शीर्ष अदालत में उनका कार्यकाल छह वर्ष से अधिक का होगा और इस दौरान वह प्रधान न्यायाधीश के रूप में भी कार्यभार संभालेंगे। न्यायमूर्ति बागची न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन के 25 मई 2031 को रिटायर होने पर दो अक्टूबर 2031 को रिटायर होने तक भारत के प्रधान न्यायाधीश का पद संभालेंगे। न्यायमूर्ति बागची की जन्मतिथि तीन अक्टूबर 1966 है। केंद्र सरकार ने उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति के लिए न्यायमूर्ति बागची के नाम को 10 मार्च को मंजूरी दी थी। 

छह मार्च को उनके नाम की सिफारिश हुई थी

तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश खन्ना की अगुवाई वाले पांच सदस्यीय कॉलेजियम ने छह मार्च को उनके नाम की सिफारिश की थी। इस कॉलेजियम में न्यायमूर्ति बी आर गवई, न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति अभय एस ओका और न्यायमूर्ति विक्रम नाथ भी शामिल थे। कॉलेजियम ने कहा था कि 18 जुलाई 2013 को न्यायमूर्ति अल्तमस कबीर के सेवानिवृत्त होने के बाद से कलकत्ता उच्च न्यायालय का कोई भी न्यायाधीश भारत का प्रधान न्यायाधीश नहीं बना है। 

2011 में कलकत्ता न्यायालय का हिस्सा बने

न्यायमूर्ति बागची को 27 जून 2011 को कलकत्ता उच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त किया गया था। उन्हें चार जनवरी 2021 को आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय में स्थानांतरित किया गया था। न्यायमूर्ति बागची को आठ नवंबर 2021 को कलकत्ता उच्च न्यायालय वापस भेज दिया गया और तब से वह वहीं कार्यरत थे। उन्होंने उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में 13 वर्षों से अधिक समय तक कार्य किया है।

यह भी पढ़ें-

UGC के नए नियम पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक, जानिए सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय ने क्या-क्या कहा

UGC रेगुलेशन पर सुप्रीम कोर्ट की रोक को लेकर किस नेता ने दिया कैसा रिएक्शन, जानें

 

 

Latest India News

Google पर इंडिया टीवी को अपना पसंदीदा न्यूज सोर्स बनाने के लिए यहां
क्लिक करें

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। National से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें भारत

Advertisement
Advertisement
Advertisement