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भारत में भी मिलेगी पैटरनिटी लीव? सुप्रीम कोर्ट ने कहा-'पिता की भूमिका को न करें नजरअंदाज'

 Published : Mar 18, 2026 03:55 pm IST,  Updated : Mar 18, 2026 04:13 pm IST

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है कि बच्चे के विकास में पिता की भूमिका भी अहम होती है। पिता की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार से कहा कि वह पैटरनिटी लीव सुनिश्चित करे।

Supreme Court- India TV Hindi
सुप्रीम कोर्ट Image Source : PTI

नई दिल्ली: देश की शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार से कहा है कि वह पैटरनिटी लीव यानी पितृत्व अवकाश को सामाजिक सुरक्षा लाभ के तौर पर मान्यता देने के लिए कानून पर विचार करे। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बच्चे की परवरिश कोई एकल जिम्मेदारी नहीं है और भले ही बच्चे के विकास में मां की भूमिका महत्वपूर्ण होती है, लेकिन पिता की भूमिका को नजरअंदाज करना अन्यायपूर्ण होगा। 

सुप्रीम कोर्ट की ये टिप्पणियां उस समय आईं जब उसने बच्चे को गोद लेने संबंधी मामले में ऐसे प्रावधान को निरस्त कर दिया, जिसके तहत तीन महीने से कम उम्र के बच्चे को कानूनी रूप से गोद लेने पर ही संबंधित महिला को मैटरनिटी लीव (मातृत्व अवकाश) मिलता था। इस प्रावधान को खारिज करते हुए अदालत ने कहा कि गोद लेने वाली मां को 12 सप्ताह का मातृत्व अवकाश मिलना चाहिए, भले ही बच्चे की उम्र कुछ भी क्यों न हो।

परिवार तथा कार्यस्थल में लैंगिक समानता को बढ़ावा 

जस्टिस जे बी पारदीवाला और आर महादेवन की बेंच ने इस बार पर भी ज़ोर दिया कि पैटरनिटी लीव का प्रावधान लैंगिक भूमिकाओं को तोड़ने में मदद करता है, पिताओं को बच्चे की देखभाल में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रोत्साहित करता है, परवरिश की संतुलित समझ को बढ़ावा देता है और परिवार तथा कार्यस्थल में लैंगिक समानता को बढ़ावा देता है। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि किसी बच्चे के भावनात्मक, शारीरिक और मानसिक विकास में मां की भूमिका निस्संदेह महत्वपूर्ण है, लेकिन पिता की समान रूप से महत्वपूर्ण भूमिका की अनदेखी करना अधूरा और अन्यायपूर्ण होगा। 

बच्चे की परवरिश साझा जिम्मेदारी 

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि परवरिश केवल माता या पिता द्वारा निभाई जाने वाली अकेली जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह एक साझा जिम्मेदारी है, जिसमें हर माता-पिता बच्चे के समग्र विकास में योगदान देता है। इसने कहा कि समाज अक्सर मां की भूमिका को बच्चे के जीवन में सबसे आवश्यक और अपरिवर्तनीय मानता है, जबकि पिता भले ही शुरुआती समय में मौजूद रहे, उनकी भूमिका उतनी अंतरंग या अनिवार्य नहीं मानी जाती। सुप्रीम कोर्ट ने यह कहा कि पिता की भूमिका भी महत्वपूर्ण है, और इसे नजरअंदाज करना सही नहीं है।

पैटरनिटी लीव को सामाजिक सुरक्षा लाभ के रूप में मान्यता मिले

शीर्ष अदालत की बेंच ने कहा, ''पैटरनिटी लीव (पितृत्व अवकाश) की आवश्यकता पर उपरोक्त चर्चा के संदर्भ में, हम केंद्र सरकार से अनुरोध करते हैं कि वह पैटरनिटी लीव  (पितृत्व अवकाश) को एक सामाजिक सुरक्षा लाभ के रूप में मान्यता देने का प्रावधान लाए।'' बेंच ने कहा, ''हम यह जोर देते हैं कि ऐसे अवकाश की अवधि इस तरह निर्धारित की जानी चाहिए कि यह माता-पिता और बच्चे दोनों की आवश्यकताओं के अनुकूल हो।''

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