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गुजरात चुनाव: BJP की लिस्ट में पाटीदारों की 'लॉटरी', क्या जाति समीकरण से मिलेगी जीत?

भाजपा की ये लिस्ट बताती है कि गुजरात चुनाव विकास के एजेंडे से डीरेल होकर जातीय सियासत में सिमट गया है। हालांकि पार्टी का कहना है कि पाटीदारों को टिकट देना कोई नई बात नहीं है। जातीय समीकरण के साथ ही भाजपा ने पहली लिस्ट में कांग्रेस से बगावत कर आए विधा

Written by: India TV News Desk
Published : Nov 18, 2017 09:09 am IST, Updated : Nov 18, 2017 09:09 am IST
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नई दिल्ली: उम्मीदवारों की पहली लिस्ट के साथ गुजरात विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा ने बिगुल फूंक दिया है लेकिन पहली लिस्ट में जिन 70 उम्मीदवारों के नाम का ऐलान किया है उसमें जातीगत समीकरण का खास ख्याल रखा गया है। पहली लिस्ट में भाजपा ने 17 टिकट पटेल समुदाय को, 8 टिकट ठाकोर, 5 टिकट कोली समाज और 6 टिकट क्षत्रिय समाज के उम्मीदवारों को दिए हैं।

भाजपा की ये लिस्ट बताती है कि गुजरात चुनाव विकास के एजेंडे से डीरेल होकर जातीय सियासत में सिमट गया है। हालांकि पार्टी का कहना है कि पाटीदारों को टिकट देना कोई नई बात नहीं है। जातीय समीकरण के साथ ही भाजपा ने पहली लिस्ट में कांग्रेस से बगावत कर आए विधायकों का भी ख्याल रखा है। 11 में से पांच विधायकों को टिकट मिला है। दो विधायकों को टिकट नहीं मिला जबकि चार को अगली लिस्ट का इंतजार है।

अपने मौजूदा विधायकों को टिकट देने में भाजपा इस बार दिलदार है। टिकट कटने के डर से जिन विधायकों की सांसें अटकी थी लिस्ट आने के बाद उन्हें मुस्कुराने का मौका मिल गया। पचास सीटिंग विधायकों में से 49 को टिकट मिला है। हां वडवाण से वर्षा दोशी का पत्ता जरूर कट गया। भाजपा की पहली लिस्ट में 45 उम्मीदवार पहले चरण के हैं जबकि 25 उम्मीदवार दूसरे चरण के हैं। इनमें सीएम विजय रूपाणी राजकोट पश्चिम से, डिप्टी सीएम नितिन पटेल मेहसाणा से और गुजरात भाजपा अध्यक्ष जीतूभाई वाघानी भावनगर पश्चिम से चुनाव लड़ेंगे।

इनके अलावा रूपाणी कैबिनेट के करीब-करीब सभी मंत्रियों को टिकट मिला है। हालांकि नरेंद्र मोदी के समय में हुए पिछले दो चुनावों में नए चेहरों को मौका दिया गया था। 2007 में 47 मौजूदा विधायकों के टिकट कटे थे जबकि 2012 में 30 विधायकों के टिकट कटे थे। टिकट काटने के बाद दोनों चुनावों में भाजपा की सीटों की संख्या बढ़ी थी लेकिन पहली लिस्ट में ये बात नहीं दिखी।

भाजपा की पहली लिस्ट आने के बाद भी अभी असली खेल बाकी है क्योंकि पार्टी ने अपने अहम पत्ते नहीं खोलें हैं। पाटीदार इलाकों में वेट एंड वॉच की नीति अपनाई है। नाम फाइनल हैं लेकिन चर्चा है कि कांग्रेस की लिस्ट का इंतजार है।

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