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राहुल गांधी का मोदी सरकार से सवाल-चीन के साथ बातचीत में पूर्व की यथास्थिति की बहाली पर जोर क्यों नहीं दिया गया?

 Edited By: IndiaTV Hindi Desk
 Published : Jul 07, 2020 12:57 pm IST,  Updated : Jul 07, 2020 12:57 pm IST

कांग्रेस पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर चीन के पीछे हटने और चीनी पक्ष से राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल से बातचीत को लेकर कुछ सवाल उठाए हैं।

Why has Status Quo Ante not been insisted on with China, asks Rahul Gandhi- India TV Hindi
Why has Status Quo Ante not been insisted on with China, asks Rahul Gandhi Image Source : PTI

नयी दिल्ली: कांग्रेस पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर चीन के पीछे हटने और चीनी पक्ष से राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल से बातचीत को लेकर कुछ सवाल उठाए हैं। मंगलवार को उन्होंने एक ट्वीट करते हुए चीनी भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि सरकार की तरफ से पूर्व की यथास्थिति बहाल करने पर जोर क्यों नहीं दिया गया और सरकारी बयान में गलवान घाटी पर भारत की संप्रभुता का उल्लेख क्यों नहीं है?

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उन्होंने भारतीय विदेश मंत्रालय और चीनी विदेश मंत्रालय के बयानों को शेयर करते हुए ट्वीट किया, ‘‘राष्ट्रीय हित सर्वोपरि होता है। भारत सरकार का कर्तव्य है कि वह इसकी रक्षा करे।’’ कांग्रेस नेता ने सवाल किया, ‘‘पूर्व की यथास्थिति बहाल करने पर जोर क्यों नहीं दिया गया? हमारे क्षेत्र में 20 निहत्थे जवानों की हत्या को चीन को सही ठहराने क्यों दिया गया? गलवान घाटी पर हमारी भूभागीय संप्रभुता का उल्लेख क्यों नहीं किया गया?’’

गौरतलब है कि तनाव कम होने के पहले संकेत के रूप में चीनी सेना ने सोमवार को पूर्वी लद्दाख में कुछ इलाकों से अपनी सीमित वापसी शुरू कर दी। इससे एक दिन पहले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल और चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने टेलीफोन पर बात की जिसमें वे एलएसी से सैनिकों के तेजी से पीछे हटने की प्रक्रिया को पूरा करने पर सहमत हुए।

विदेश मंत्रालय ने सोमवार को कहा कि डोवाल और वांग के बीच रविवार को हुई वार्ता में इस बात पर सहमति बनी कि सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति एवं स्थिरता की पूर्ण बहाली के लिए जल्द से जल्द सैनिकों का पूरी तरह पीछे हटना आवश्यक है तथा दोनों पक्षों को मतभेदों को विवाद में तब्दील नहीं होने देना चाहिए। डोवाल और वांग दोनों देशों के बीच सीमा वार्ता से संबंधित विशेष प्रतिनिधि हैं।

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