Seva Teerth Inauguration: PM मोदी ने नई दिल्ली में आज (शुक्रवार को) सेवा तीर्थ का उद्घाटन किया। इस मौके पर प्रधानमंत्री ने कहा कि आज हम सभी एक नए इतिहास को बनते देख रहे हैं। 13 फरवरी का यह दिन, भारत की विकास यात्रा में एक नए आरंभ का साक्षी बन रहा है। शास्त्रों में विजया एकादशी का बहुत महत्व रहा है। इस दिन जिस संकल्प के साथ आगे बढ़ते हैं, उसमें विजय मिलती है। आज हम सभी विकसित भारत का संकल्प लेकर सेवा तीर्थ में, कर्तव्य भवन में प्रवेश कर रहे हैं। अपने लक्ष्य में विजयी होने का दैवीय आशीर्वाद हमारे साथ है।
साउथ ब्लॉक और नॉर्थ ब्लॉक जैसी इमारतें, जो ब्रिटिश सोच की हुकूमत को लागू करने के लिए बनी थीं, वहीं आज सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन जैसे परिसर भारत की जनता की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए बने हैं। यहां से जो फैसले होंगे, वे किसी महाराजा की सोच को नहीं, बल्कि 140 करोड़ देशवासियों की अपेक्षाओं को आगे बढ़ाने का आधार बनेंगे। इसी अमृत भावना के साथ आज मैं ये सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन भारत की जनता को समर्पित कर रहा हूं।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सेवा तीर्थ नए आरंभ का साक्षी बन रहा है। सेवा तीर्थ जनता की अपेक्षाओं को आगे बढ़ाने का आधार होगा। जहां से देश चलता है वह जगह प्रेरणदायी होनी चाहिए। पुरानी इमारतें जर्जर हो रही थीं। वहां जगह की भी कमी थी। नॉर्थ-साउथ ब्लॉक की इमारतें देश के इतिहास का हिस्सा हैं। इसीलिए उसे म्यूजियम बनाने का फैसला किया गया है। कर्तव्य भवन के निर्माण के कर्मचारियों का समय बचेगा। इसके निर्माण में कम खर्च होगा।
PM मोदी ने कहा कि इस समय 21वीं सदी का पहला क्वार्टर पूरा हो चुका है। यह जरूरी है कि विकसित भारत की कल्पना केवल नीतियों और योजनाओं में ही नहीं, बल्कि हमारे कार्यस्थलों और इमारतों में भी दिखाई दे। जहां से देश का संचालन होता है, वह जगह प्रभावी भी होनी चाहिए और प्रेरणादायी भी होनी चाहिए। नॉर्थ-साउथ ब्लॉक को इस प्रकार से ऊंचा बनाया गया था कि उसकी बराबरी कोई ना कर सके, लेकिन संयोग से सेवा तीर्थ जमीन से जुड़ा हुआ है। वह किसी पहाड़ी पर नहीं बनाया गया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, 'साउथ ब्लॉक और नॉर्थ ब्लॉक जैसे पुराने भवनों में जगह की कमी थी, सुविधाओं की भी अपनी सीमाएं थीं। करीब 100 साल पुरानी ये इमारतें भीतर से जर्जर होती जा रही थीं। इसके अलावा भी अनेक चुनौतियां थीं। मैं समझता हूं कि इन चुनौतियों के बारे में बताया जाना जरूरी है। जैसे, आजादी के इतने सालों बाद भी दिल्ली सरकार के तमाम मंत्रालय दिल्ली के 50 से भी ज्यादा स्थानों से चल रहे हैं।'
उन्होंने आगे कहा कि हर साल इन स्थानों के किराए में डेढ़ हजार करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च हो रहे हैं। हर रोज 8–10 हजार कर्मचारियों को एक इमारत से दूसरी इमारत में जाने का लॉजिस्टिक खर्च अलग होता था। अब सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवनों के निर्माण से ये खर्च कम होगा, समय बचेगा और प्रोडक्टिविटी बढ़ेगी। विकसित भारत की यात्रा में यह बहुत जरूरी है कि भारत गुलामी की मानसिकता से मुक्त होकर आगे बढ़े। दुर्भाग्य है कि आजादी के बाद भी हमारे यहां गुलामी के प्रतीकों को ढोया जाता रहा।
PM मोदी ने कहा, 'हमने गुलामी की मानसिकता को बदलने का अभियान शुरू किया। हमने वीरों के नाम पर नेशनल वॉर मेमोरियल बनाया। हमने पुलिस की वीरता को सम्मान देने के लिए पुलिस स्मारक बनाया। रेसकोर्स का नाम बदलकर लोक कल्याण मार्ग रखा गया। यह केवल नाम बदलने का निर्णय नहीं था, यह सत्ता के मिजाज को सेवा की भावना में बदलने का पवित्र प्रयास था।'
उन्होंने आगे कहा कि हमारे इन फैसलों के पीछे एक गहरी भावना है, एक विजन है, जो हमारे वर्तमान, हमारे अतीत और हमारे भविष्य को भारत के गौरव से जोड़ता है। जिस जगह को पहले राजपथ के नाम से जाना जाता था, वहां न पर्याप्त सुविधाएं थीं और न ही आम नागरिकों के लिए समुचित व्यवस्था। हमने उसे कर्तव्य पथ के रूप में विकसित किया और आज वह स्थान परिवारों, बच्चों और देशभर से आने वाले नागरिकों के लिए जीवंत स्थल बन चुका है।
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