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'जहां से देश चले वह जगह प्रेरणादायी होनी चाहिए', सेवा तीर्थ से पहले संबोधन में बोले PM मोदी

 Edited By: Vinay Trivedi
 Published : Feb 13, 2026 06:22 pm IST,  Updated : Feb 13, 2026 06:56 pm IST

PM Modi Seva Teerth Speech: सेवा तीर्थ के उद्घाटन के मौके पर PM मोदी ने कहा कि देश का संचालन ऐसी जगह से होना चाहिए जो प्रेरणादायी हो। नॉर्थ-साउथ ब्लॉक की इमारतें ब्रिटिश साम्राज्य की सोच को लागू करने के लिए बनाई गई थीं।

PM मोदी ने सेवा तीर्थ और...- India TV Hindi
PM मोदी ने सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन 1-2 का उद्घाटन किया। Image Source : NARENDRA MODI/YOUTUBE

Seva Teerth Inauguration: PM मोदी ने नई दिल्ली में आज (शुक्रवार को) सेवा तीर्थ का उद्घाटन किया। इस मौके पर प्रधानमंत्री ने कहा कि आज हम सभी एक नए इतिहास को बनते देख रहे हैं। 13 फरवरी का यह दिन, भारत की विकास यात्रा में एक नए आरंभ का साक्षी बन रहा है। शास्त्रों में विजया एकादशी का बहुत महत्व रहा है। इस दिन जिस संकल्प के साथ आगे बढ़ते हैं, उसमें विजय मिलती है। आज हम सभी विकसित भारत का संकल्प लेकर सेवा तीर्थ में, कर्तव्य भवन में प्रवेश कर रहे हैं। अपने लक्ष्य में विजयी होने का दैवीय आशीर्वाद हमारे साथ है।

ब्रिटिश सोच लागू करने के लिए बनीं साउथ ब्लॉक की इमारतें

साउथ ब्लॉक और नॉर्थ ब्लॉक जैसी इमारतें, जो ब्रिटिश सोच की हुकूमत को लागू करने के लिए बनी थीं, वहीं आज सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन जैसे परिसर भारत की जनता की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए बने हैं। यहां से जो फैसले होंगे, वे किसी महाराजा की सोच को नहीं, बल्कि 140 करोड़ देशवासियों की अपेक्षाओं को आगे बढ़ाने का आधार बनेंगे। इसी अमृत भावना के साथ आज मैं ये सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन भारत की जनता को समर्पित कर रहा हूं।

नए आरंभ का साक्षी बन रहा सेवा तीर्थ

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सेवा तीर्थ नए आरंभ का साक्षी बन रहा है। सेवा तीर्थ जनता की अपेक्षाओं को आगे बढ़ाने का आधार होगा। जहां से देश चलता है वह जगह प्रेरणदायी होनी चाहिए। पुरानी इमारतें जर्जर हो रही थीं। वहां जगह की भी कमी थी। नॉर्थ-साउथ ब्लॉक की इमारतें देश के इतिहास का हिस्सा हैं। इसीलिए उसे म्यूजियम बनाने का फैसला किया गया है। कर्तव्य भवन के निर्माण के कर्मचारियों का समय बचेगा। इसके निर्माण में कम खर्च होगा।

प्रेरणादायी जगह से चलना चाहिए देश

PM मोदी ने कहा कि इस समय 21वीं सदी का पहला क्वार्टर पूरा हो चुका है। यह जरूरी है कि विकसित भारत की कल्पना केवल नीतियों और योजनाओं में ही नहीं, बल्कि हमारे कार्यस्थलों और इमारतों में भी दिखाई दे। जहां से देश का संचालन होता है, वह जगह प्रभावी भी होनी चाहिए और प्रेरणादायी भी होनी चाहिए। नॉर्थ-साउथ ब्लॉक को इस प्रकार से ऊंचा बनाया गया था कि उसकी बराबरी कोई ना कर सके, लेकिन संयोग से सेवा तीर्थ जमीन से जुड़ा हुआ है। वह किसी पहाड़ी पर नहीं बनाया गया है।

पुराने भवनों में जगह की कमी थी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, 'साउथ ब्लॉक और नॉर्थ ब्लॉक जैसे पुराने भवनों में जगह की कमी थी, सुविधाओं की भी अपनी सीमाएं थीं। करीब 100 साल पुरानी ये इमारतें भीतर से जर्जर होती जा रही थीं। इसके अलावा भी अनेक चुनौतियां थीं। मैं समझता हूं कि इन चुनौतियों के बारे में बताया जाना जरूरी है। जैसे, आजादी के इतने सालों बाद भी दिल्ली सरकार के तमाम मंत्रालय दिल्ली के 50 से भी ज्यादा स्थानों से चल रहे हैं।'

किराए में खर्च हो जाते थे 1500 से ज्यादा रुपये

उन्होंने आगे कहा कि हर साल इन स्थानों के किराए में डेढ़ हजार करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च हो रहे हैं। हर रोज 8–10 हजार कर्मचारियों को एक इमारत से दूसरी इमारत में जाने का लॉजिस्टिक खर्च अलग होता था। अब सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवनों के निर्माण से ये खर्च कम होगा, समय बचेगा और प्रोडक्टिविटी बढ़ेगी। विकसित भारत की यात्रा में यह बहुत जरूरी है कि भारत गुलामी की मानसिकता से मुक्त होकर आगे बढ़े। दुर्भाग्य है कि आजादी के बाद भी हमारे यहां गुलामी के प्रतीकों को ढोया जाता रहा।

नाम बदलना सत्ता का मिजाज बदलने से है जुड़ा

PM मोदी ने कहा, 'हमने गुलामी की मानसिकता को बदलने का अभियान शुरू किया। हमने वीरों के नाम पर नेशनल वॉर मेमोरियल बनाया। हमने पुलिस की वीरता को सम्मान देने के लिए पुलिस स्मारक बनाया। रेसकोर्स का नाम बदलकर लोक कल्याण मार्ग रखा गया। यह केवल नाम बदलने का निर्णय नहीं था, यह सत्ता के मिजाज को सेवा की भावना में बदलने का पवित्र प्रयास था।'

कर्तव्य पथ नागरिकों के लिए जीवंत स्थल बना

उन्होंने आगे कहा कि हमारे इन फैसलों के पीछे एक गहरी भावना है, एक विजन है, जो हमारे वर्तमान, हमारे अतीत और हमारे भविष्य को भारत के गौरव से जोड़ता है। जिस जगह को पहले राजपथ के नाम से जाना जाता था, वहां न पर्याप्त सुविधाएं थीं और न ही आम नागरिकों के लिए समुचित व्यवस्था। हमने उसे कर्तव्य पथ के रूप में विकसित किया और आज वह स्थान परिवारों, बच्चों और देशभर से आने वाले नागरिकों के लिए जीवंत स्थल बन चुका है। 

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