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परिसीमन के मुद्दे पर PM मोदी का बड़ा बयान, कहा- 'किसी भी राज्य के साथ भेदभाव नहीं होगा, मैं गारंटी देता हूं'

 Published : Apr 16, 2026 04:31 pm IST,  Updated : Apr 16, 2026 04:41 pm IST

परिसीमन के मुद्दे पर पीएम मोदी ने लोकसभा में बड़ बयान दिया है। पीएम मोदी ने कहा कि परिसीमन में किसी भी राज्य के साथ भेदभाव नहीं होगा। राज्यों के अनुपात में कोई बदलाव नहीं होगा। किसी भी राज्य के साथ भेदभाव या अन्याय नहीं होगा।

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लोकसभा में पीएम मोदी का संबोधन। Image Source : X (@PMMODI)

केंद्र सरकार ने गुरुवार को लोकसभा में 3 अहम बिल पेश किया है। इनमें पहला बिल महिला आरक्षण से जुड़ा संशोधन विधेयक 2026, दूसरा बिल परिसीमन विधेयक, 2026 और तीसरा केंद्र शासित प्रदेश संशोधन विधेयक, 2026 है। परिसीमन के बिल को लेकर विपक्षी दलों ने हंगामा खड़ा कर दिया है। विपक्षी दलों ने इस बिल का विरोध करने का फैसला किया है। विपक्ष ने कहा है कि ये बिल चुनावी फायदे के लिए गलत तरीके से लाया जा रहा है। इस हंगामे के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा को संबोधित किया। उन्होंने महिला आरक्षण बिल के साथ ही परिसीमन विधेयक को लेकर भी बात की। पीएम मोदी ने साफ तौर पर कहा कि परिसीमन में किसी भी राज्य के साथ भेदभाव नहीं होगा।

मैं गारंटी देता हूं- PM मोदी

पीएम मोदी ने कहा- "मैं आज बड़ी जिम्मेदारी के साथ इस सदन से कहना चाहता हूं कि चाहे दक्षिण हो, उत्तर हो, पूरब हो, पश्चिम हो, छोटे राज्य हों या बड़े राज्य हो। ये निर्णय प्रक्रिया किसी के साथ भी भेदभाव या अन्याय नहीं करेगी। भूतकाल में जो सरकार रही, जिनके काल में जो परिसीमन हुआ, उस अनुपात में भी कोई बदलाव नहीं होगा, और वृद्धि भी उसी अनुपात में होगी। अगर गारंटी चाहिए तो मैं गारंटी देता हूं, वादा चाहिए तो वादा देता हूं। क्योंकि अगर नीयत साफ है, तो शब्दों का खेल करने की जरूरत नहीं है।"

परिसीमन के बारे नें जानिए

सरकार लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए एक अहम कदम है। इसके तहत सांसदों की संख्या बढ़ाने और परिसीमन से जुड़े प्रावधानों वाला विधेयक संसद में पेश किया जाएगा। संविधान संशोधन के बाद लोकसभा सदस्यों की संख्या मौजूदा 543 से बढ़ाकर 850 की जाएगी। इसमें 815 सीटें राज्यों के लिए, 35 सीटें केंद्र शासित प्रदेशों के लिए होंगी। इसके लिए संविधान के अनुच्छेद 81 में संशोधन का प्रस्ताव रखा गया है। बिल में साफ किया गया है कि जनसंख्या का मतलब उसी जनगणना से होगा जिसके आंकड़े आधिकारिक रूप से प्रकाशित हो चुके हों। फिलहाल 2011 की जनगणना के आंकड़े ही उपलब्ध हैं और उन्हीं के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्निर्धारण किया जाएगा।

कब होगी बिल पर वोटिंग?

जानकारी के मुताबिक, लोकसभा में तीनों बिल पर चर्चा के लिए 18 घंटे का समय तय किया गया है। 17 अप्रैल को लोकसभा में चर्चा के बाद तीनों बिलों पर वोटिंग होगी। वहीं, राज्यसभा में तीनों बिल 18 अप्रैल को पेश किए जाएंगे। यहां चर्चा के लिए 10 घंटे का समय तय किया गया है। 18 अप्रैल को ही राज्यसभा में चर्चा के बाद बिल पर वोटिंग कराई जाएगी।

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