बीजिंग: कजाकिस्तान की एक अदालत ने चीन के शिनजियांग क्षेत्र में उइगरों और अन्य मुस्लिम समुदायों पर हो रहे कथित अत्याचारों के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले 19 कार्यकर्ताओं को दोषी ठहराया है। मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, यह अब तक का सबसे बड़ा मामला है जिसमें कजाकिस्तान सरकार ने चीन की आलोचना करने वालों पर इतनी कड़ी कार्रवाई की है। ये सभी कार्यकर्ता कजाकिस्तान के नागरिक हैं। इन्होंने पिछले साल नवंबर में चीन की सीमा के पास विरोध प्रदर्शन किया था। प्रदर्शन के दौरान उन्होंने चीन के झंडे और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की तस्वीरें जलाकर शिनजियांग में हिरासत में लिए गए एक कजाख नागरिक की रिहाई की मांग की थी।
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11 कार्यकर्ताओं को 5-5 साल जेल की सजा
अदालत ने 11 कार्यकर्ताओं को 'सामाजिक वैमनस्य भड़काने' के आरोप में 5-5 साल की जेल की सजा सुनाई है, जबकि बाकी 8 लोगों की आवाजाही पर पाबंदियां लगा दी गई हैं। कार्यकर्ताओं के वकील शिनक्वाट बैजहान ने इन सजाओं की पुष्टि की, जिसकी खबर स्थानीय मीडिया में भी आई है। मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच के चीन मामलों के विशेषज्ञ यालकुन उलुयोल ने कहा, 'यह अभूतपूर्व है। इससे साफ संकेत मिलता है कि कजाकिस्तान सरकार बीजिंग के साथ अच्छे संबंध बनाए रखने के लिए अपने नागरिकों की आजादी की कुर्बानी देने को तैयार है।'
उइगरों पर जमकर अत्याचार करता है चीन
चीन ने 2017 से शिनजियांग क्षेत्र में सख्त कार्रवाई शुरू की थी, जिसके तहत उइगर, कजाख और अन्य मुस्लिम समुदायों के 10 लाख से ज्यादा लोगों को जेलों और कैंपों में रखा गया। हालांकि कई लोगों को बाद में रिहा कर दिया गया, लेकिन अब भी वहां धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों पर कड़ी पाबंदियां हैं। शिनजियांग का मुद्दा कजाकिस्तान में हमेशा संवेदनशील रहा है। करीब 2 करोड़ आबादी वाले इस देश की अर्थव्यवस्था चीन के साथ व्यापार पर काफी हद तक निर्भर है। बताया गया है कि कजाकिस्तान सरकार ने यह कार्रवाई अल्माटी स्थित चीनी वाणिज्य दूतावास से मिले एक कूटनीतिक नोट के बाद शुरू की।
चीन के दबाव में लिया गया ये एक्शन
चीनी दूतावास के नोट में प्रदर्शन को चीन की राष्ट्रीय गरिमा और कम्युनिस्ट पार्टी का अपमान बताया गया था। इन प्रदर्शनकारियों का संबंध ‘अताजुर्ट’ नामक संगठन से था, जो चीन में रह रहे कजाख मूल के लोगों के अधिकारों के लिए काम करता है। शिनजियांग में करीब 10 लाख कजाख रहते हैं, जिनमें से हजारों को हिरासत में लिया गया और कई आज भी प्रतिबंधों का सामना कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के फैसले से साफ है कि कजाकिस्तान अब चीन के और करीब आ रहा है और बीजिंग की नीतियों के खिलाफ आवाज उठाने वालों के लिए सहनशीलता कम हो रही है।