बीजिंग: ईस्ट तुर्किस्तान नेशनल मूवमेंट (ETNM) ने हाल ही में 'ईस्ट तुर्किस्तान नेशनल आर्मी मेमोरियल डे' की 81वीं वर्षगांठ धूमधाम से मनाई। इस मौके पर संगठन ने एक बार फिर चीन से आजादी की मांग करते हुए क्षेत्र की स्वशासन की ऐतिहासिक कोशिशों और राष्ट्रीय पहचान की रक्षा के लिए किए गए संघर्ष को याद किया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी एक विस्तृत पोस्ट में संगठन ने बताया कि ईस्ट तुर्किस्तान नेशनल आर्मी की स्थापना वर्ष 1945 में ईस्ट तुर्किस्तान रिपब्लिक द्वारा की गई थी। इस सेना का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय संप्रभुता की रक्षा करना और स्वतंत्रता को बनाए रखना था।
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'चीन ने हमारे इलाके पर कब्जा कर लिया'
संगठन के मुताबिक, 22 दिसंबर 1949 को चीन ने ईस्ट तुर्किस्तान रिपब्लिक को खत्म कर दिया, नेशनल आर्मी को भंग कर दिया और इसके बाद क्षेत्र पर 'औपनिवेशिक कब्जा' शुरू हो गया। ETNM का आरोप है कि राष्ट्रीय सेना के बिखरने के बाद स्थानीय लोग असुरक्षित हो गए और चीन ने क्षेत्र में नरसंहार तथा दमनकारी नीतियां अपनाईं। अपने बयान में ईस्ट तुर्किस्तान नेशनल मूवमेंट ने कहा, 'हम अपने पूर्वजों, शहीदों और ईस्ट तुर्किस्तान नेशनल आर्मी में सेवा देने वाले सभी सैनिकों को सम्मान देते हैं। हम चीन के कब्जे, दमन और नरसंहार को समाप्त कर ईस्ट तुर्किस्तान को आजाद कराने का संकल्प दोहराते हैं।'
आखिर क्या है ईस्ट तुर्किस्तान नेशनल मूवमेंट?
बता दें कि ईस्ट तुर्किस्तान नेशनल मूवमेंट उइगर और तुर्की के अन्य समुदायों के उन राजनीतिक और सामाजिक आंदोलनों का प्रतिनिधित्व करता है, जो चीन के शिनजियांग क्षेत्र में या तो पूरी स्वतंत्रता या फिर अधिक स्वायत्तता की मांग करते हैं। शिनजियांग एक बड़ा और महत्वपूर्ण इलाका है, जहां उइगर मुस्लिम समुदाय और अन्य तुर्किक जातीय समूह बड़ी संख्या में रहते हैं। इन समुदायों का कहना है कि उनकी भाषा, संस्कृति और पहचान को सुरक्षित रखने के लिए उन्हें ज्यादा अधिकार मिलने चाहिए। इसी वजह से समय-समय पर वहां आजादी की मांग जोरदार तरीके से उठती रही है।
ETNM के आरोपों को खारिज करता रहा है चीन
चीन इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करता है। बीजिंग का आधिकारिक रुख है कि शिनजियांग चीन का अभिन्न अंग है और वहां लागू की गई नीतियां चरमपंथी तत्वों से निपटने तथा क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के लिए हैं। चीन ने क्षेत्र में मानवाधिकार उल्लंघनों के सभी दावों को आधारहीन बताया है। शिनजियांग लंबे समय से विवादों का केंद्र रहा है। उइगर और अन्य तुर्किक समूहों का आरोप है कि चीन वहां सांस्कृतिक दमन, धार्मिक पाबंदियों और मानवाधिकारों का हनन कर रहा है। वहीं, चीन इसे आंतरिक सुरक्षा और विकास से जुड़ा मुद्दा मानता है।