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अभिषेक बनर्जी समेत कई TMC नेताओं ने ओम बिरला से की मुलाकात, बागी सांसदों के मर्जर को बताया असंवैधानिक

 Reported By: Devendra Parashar,  Vijai Laxmi Edited By: Amar Deep
 Published : Jun 19, 2026 06:39 pm IST,  Updated : Jun 19, 2026 07:00 pm IST

अभिषेक बनर्जी सहित टीएमसी के कई बड़े नेताओं ने शुक्रवार को लोकसभा स्पीकर से मुलाकात की। उन्होंने टीएमसी के बागी सांसदों के दूसरी पार्टी में मर्जर को असंवैधानिक करार दिया। इसके साथ ही उन्होंने स्पीकर से न्याय की मांग की है।

टीएमसी नेताओं ने ओम बिरला से की मुलाकात।- India TV Hindi
टीएमसी नेताओं ने ओम बिरला से की मुलाकात। Image Source : REPORTER INPUT

नई दिल्ली: टीएमसी के नेताओं ने आज लोकसभा स्पीकर ओम बिडला से मुलाकात की। इस दौरान अभिषेक बनर्जी के साथ कल्याण बनर्जी, डेरेक ओब्रायन, महुआ मोइत्रा और सौगत राय भी मौजूद रहे। मुलाकात के दौरान अभिषेक बनर्जी ने टीएमसी के बागी सांसदों के मर्जर को असंवैधानिक बताया। उन्होंने स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात के दौरान अपनी पार्टी के 20 बागी सांसदों के खिलाफ अयोग्यता की मांग करते हुए 20 याचिकाएं सौंपीं।अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से कहा कि सांसद अपने आप किसी दूसरी पार्टी में विलय नहीं कर सकते, इसकी वजह से उन्हें अयोग्य करार दिया जाना जाहिए। उन्होंने कहा कि बागी सांसदों को अयोग्य करार देने के लिए दायर याचिकाओं पर कहा, 'हमें उम्मीद है कि लोकसभा अध्यक्ष हमें न्याय प्रदान करेंगे।'

'बागी सांसदों को अयोग्य घोषित किया जाना चाहिए'

स्पीकर से मुलाकात के बाद अभिषेक बनर्जी ने कहा कि जिन बागी सांसदों ने कम जानी-मानी 'नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया' (NCPI) में शामिल होने का दावा किया है, उन्हें पार्टी छोड़ने के आधार पर सदन की सदस्यता से अयोग्य घोषित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, "20 लोगों ने स्पीकर से मुलाकात की और दावा किया कि उन्हें एक अलग पार्टी माना जाना चाहिए। बाद में, हमें पता चला कि उन सांसदों ने एक दूसरी पार्टी, NCPI में शामिल होने का दावा किया है; इस पार्टी का नाम किसी ने नहीं सुना है। यहां तक ​​कि उन्होंने खुद भी इस पार्टी का नाम नहीं सुना था।"

बागी सांसदों के खिलाफ सौंपी गई 20 याचिकाएं

अभिषेक बनर्जी ने कहा कि संविधान की 10वीं अनुसूची में स्पष्ट है कि यदि कोई सदस्य स्वेच्छा से किसी पार्टी की सदस्यता छोड़ता है, तो वह सांसद के तौर पर अयोग्य हो जाता है।इसलिए अगर वे किसी चुनाव चिह्न पर चुने गए हैं और दो साल बाद दावा कर रहे हैं कि वे एक नई पार्टी में शामिल हो रहे हैं, तो उनकी सदस्यता खत्म हो जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि दो-तिहाई सदस्यों के किसी दूसरी पार्टी में विलय का नियम पूरी पार्टी पर लागू होता है, न कि केवल विधायी पार्टी पर। उन्होंने कहा, "इसी आधार पर, TMC के लोकसभा नेता के तौर पर मैंने उन सांसदों के खिलाफ अयोग्यता की 20 अलग-अलग याचिकाएं सौंपी हैं।"

टीएमसी नेताओं की स्पीकर से मुलाकात

बता दें कि लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने TMC के लोकसभा नेता अभिषेक बनर्जी को इस मुद्दे पर अपना पक्ष रखने के लिए आमंत्रित किया। यह आमंत्रण 20 बागी तृणमूल कांग्रेस सांसदों की उस मांग पर निर्णय लेने से पहले दिया गया, जिसमें उन्होंने NCPI के साथ विलय के बाद खुद को एक अलग समूह के रूप में मान्यता देने की मांग की थी। बनर्जी ने पिछले सप्ताह स्पीकर को पत्र लिखकर आग्रह किया था कि 'ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' का अलग गुट होने का दावा करने वाले किसी भी समूह को कोई मान्यता, दर्जा या सुविधा न दी जाए। उन्होंने तर्क दिया कि संविधान और दलबदल विरोधी कानून किसी मौजूदा राजनीतिक दल के भीतर एक अलग समूह बनाने की अनुमति नहीं देते हैं।

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