श्रीनगरः जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने विधानसभा में स्पष्ट किया कि किश्तवाड़ में ज़कात और दान के नियमन से संबंधित हालिया आदेश धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं है। सदन की कार्यवाही के दौरान विधायक निज़ामुद्दीन भट ने इस मुद्दे को उठाया। एक अन्य सदस्य अहमद मीर ने भी इस विषय का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि सरकार धार्मिक मामलों में दखल दे रही है।
मुख्यमंत्री ने विधायकों के सवाल का जवाब देते हुए कहा कि पवित्र रमज़ान महीने से पहले सभी उपायुक्तों को निर्देश दिए गए थे कि वे स्थानीय हितधारकों के साथ समन्वय कर आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करें। किश्तवाड़ में हुई एक बैठक के दौरान मुस्लिम समुदाय के कई धार्मिक नेताओं ने उपायुक्त के समक्ष गंभीर चिंता व्यक्त की।
सीएम अब्दुल्ला ने कही ये बात
उन्होंने बताया कि रमज़ान के दौरान कुछ लोग फर्जी एनजीओ बनाकर ज़कात और चंदा एकत्र करते हैं, लेकिन इन पैसों के उपयोग में पारदर्शिता नहीं होती। कुछ मामलों में मरीजों के नाम पर धन एकत्र किया जाता है, बिना इस बात की पुष्टि किए कि ऐसे मरीज वास्तव में मौजूद हैं या नहीं। इससे वास्तविक और ईमानदार संस्थाओं को नुकसान होता है।
धार्मिक नेताओं के आग्रह पर डीसी ने जारी किया आदेश
मुख्यमंत्री ने कहा कि धार्मिक नेताओं के आग्रह पर ही उपायुक्त ने यह आदेश जारी किया, ताकि प्रक्रिया को विनियमित किया जा सके और दुरुपयोग रोका जा सके। उन्होंने यह भी बताया कि इस आदेश का किश्तवाड़ की जामिया मस्जिद के इमाम और अन्य सम्मानित धार्मिक नेताओं ने स्वागत किया है। मुख्यमंत्री ने सदस्यों से अपील की कि हर प्रशासनिक निर्णय को राजनीतिक नजरिए से न देखा जाए और न ही हर मुद्दे का राजनीतिकरण किया जाए। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है।
सीएम ने कहा कि मामले की जांच के बाद, मुझे पता चला कि किश्तवाड़ DC ने यह ऑर्डर अचानक पास नहीं किया, बल्कि मुस्लिम समुदाय के नेताओं से बातचीत के बाद पास किया, जिन्होंने उनसे रमज़ान के दौरान नकली NGO को खुलने और पैसे लेने से रोकने के लिए सही ऑर्डर पास करने को कहा था। इस ऑर्डर का किश्तवाड़ की जामा मस्जिद के इमाम, दूसरे मुस्लिम मौलवियों और धार्मिक नेताओं ने स्वागत किया है। हमें हर मुद्दे पर राजनीति नहीं करनी चाहिए।
रिपोर्ट- राही कपूर