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नरक चतुर्दशी के ही दिन हुआ था महावीर हनुमान का जन्म

 Written By: India TV Lifestyle Desk
 Published : Oct 30, 2015 08:24 pm IST,  Updated : Oct 31, 2015 07:40 am IST

नई दिल्ली: हनुमान जा को भगवान श्री राम का अभिन्न अंग माना जाता है। माना जाता है कि पवनपुत्र हनुमान का सिर्फ स्मरण मात्र से वह अपने भक्त को दर्शन दे देते है, लेकिन दर्शन

india TVइसके अलावा हनुमान जी का इस युग में होने का प्रमाण महाकवि तुलसी दास ने बताया था। इनके अनुसार हनुमान जी ने तुलसीदास जी से कहा था कि राम और लक्ष्मण चित्रकूट नियमित आते रहते हैं। मैं वृक्ष पर तोता बनकर बैठा रहूंगा जब राम और लक्ष्मण आएंगे मैं आपको संकेत दे दूंगा।

हनुमान जी की आज्ञा के अनुसार तुलसीदास जी चित्रकूट घाट पर बैठ गये और सभी आने जाने वालों को चंदन लगाने लगे। राम और लक्ष्मण जब आये तो हनुमान जी गाने लगे 'चित्रकूट के घाट पै, भई संतन के भीर। तुलसीदास चंदन घिसै, तिलक देत रघुबीर।।'

हनुमान के यह वचन सुनते ही तुलसीदास प्रभु राम और लक्ष्मण को निहारने लगे।' इस प्रकार तुलसीदा को राम जी के दर्शन हुए।

तुलसीदास की बढ़ती हुई कीर्ति से प्रभावित होकर अकबर ने एक बार तुलसीदास जी को अपने दरबार में बुलाया।

तुलसीदास जी को अकबर ने कोई चमत्कार दिखाने के लिए कहा, जिसे तुलसीदास जी ने अस्वीकार कर दिया। क्रोधित होकर अकबर ने तुलसीदास को जेल में डाल दिया। जेल में तुलसीदास जी ने हनुमान की आराधना शुरू कर दी। इतने में चमत्कार यह हुआ कि बंदरों ने अकबर के महल पर आक्रमण कर दिया। बंदरों के उत्पात से अकबर भयभीत हो गया। अकबर को समझ में आ गया कि तुलसीदास जी को जेल में डालने के कारण हनुमान जी नाराज हो गये हैं। बंदरों के उत्पात का कारण यही है। अकबर ने संत तुलसीदास जी से क्षमा मांगी और उन्हें जेल से मुक्त कर दिया।

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