महाराष्ट्र सरकार के मंत्री नितेश राणे ने हाल ही में बयान दिया है कि आगामी नासिक के कुंभ में किसी भी मुस्लिम समुदाय को दुकान न दी जाए। इस पर बोलते हुए महाराष्ट्र अल्पसंख्यक विभाग के अध्यक्ष प्यार खान ने कहा है कि "मुसलमानों का क्या बहिष्कार करेंगे, पिछले 70 सालों में मुसलमानों का इतना बहिष्कार हो गया है कि जो सुनार था, वह पंचर बनाने की दुकान पर आ गया। इससे ज्यादा बहिष्कार किया होगा। नितेश राणे एक संवैधानिक पद पर हैं, इस प्रकार की भाषा का प्रयोग उनको शोभा नहीं देता। जो बड़े सनातनी लोग इस देश के आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत हुए, नितिन गडकरी हुए ,देवेंद्र फडणवीस हुए क्या इनके मुख से कभी सुना है? यह देश को जोड़ने का काम करते हैं, तोड़ने का काम नहीं करते।
एक दूसरे के बिना गुजारा नहीं होगा- प्यारे खान
प्यारे खान ने आगे कहा- "कोई भी सनातनी व्यक्ति जो होगा कभी भी इन शब्दों का प्रयोग नहीं करेगा। इस भारत में लोग इस तरीके से जुड़े हैं कि एक दूसरे के बिना गुजारा नहीं होगा। उनका बहिष्कार करना है तो उनके पान के ठेले का, पंचर की दुकान का, चाय की टपरी का बहिष्कार करो। क्यों 14 परसेंट के चक्कर में 86% लोगों को बिजी रख रहे हो, ये बिल्कुल नहीं होना चाहिए।"
वंदे मातरम के विरोध पर क्या बोले प्यारे खान?
महाराष्ट्र में कुछ मुस्लिम नेताओं द्वारा वंदे मातरम गायन का विरोध करने पर महाराष्ट्र अल्पसंख्यक विभाग के अध्यक्ष प्यारे खान ने नाराजगी जताई है। प्यारे खान ने कहा है कि "कुछ राजनीतिक लोग हैं, उनको राजनीतिक फायदा चाहिए इसलिए इस प्रकार का वक्तव्य दे रहे हैं। मुसलमानों में ऐसा कुछ नहीं है। इसका इतिहास उठाकर देखें तो पिछले 25 सालों में कई उर्दू स्कूलों में वंदे मातरम पढाया जा रहा है। कभी किसी ने इसका विरोध नहीं किया। इस्लाम का भी जो कांसेप्ट है, जिस देश में रहना उस देश से मोहब्बत करना, उससे नफरत करना नहीं है। धरती मां एक ऐसी मां है, जिसने अपने आंचल में सभी को समा के रखा है। इसमें हिंदू भी हैं, मुस्लिम भी हैं, सिख भी, इसाई भी हैं, पारसी भी हैं, सब हैं। उस मां की तारीफ करना कोई गुनाह नहीं है।"
मुसलमानों का इस्तेमाल करते आये हैं लोग- प्यारे खान
महाराष्ट्र अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष प्यारे खान ने आगे कहा कि "जो लोग विरोध कर रहे हो, वो मुसलमान को बहका कर, भड़का कर, अपना राजनीतिक फायदा ले सकते हैं। अब तक यही होता आया है मुसलमान के साथ। हर कोई अपने-अपने तरीके से मुसलमानों का इस्तेमाल करते आये हैं और इस्तेमाल कर रहे हैं। जो सजदा होता है वह खुदा के सामने होता है, लेकिन किसी को हमको गलत बोलने का अधिकार नहीं है। सजदा भी जमीन पर होता है, यह धरती पर ही हो रहा है। धरती पर मस्जिद बनती है, इंसान उस समय किससे जुड़ता है यह मुख्य है।"
वंदे मातरम गीत आज का लिखा हुआ नहीं- प्यार खान
प्यार खान ने वंदे मातरम गायन का विरोध के संबंध में कहा कि "इसका विरोध इसलिए हो रहा है क्योंकि सबको पता है कि केंद्र एवं राज्य में किसकी सरकार है। यदि यह सरकार दूसरे लोगों की होती तो विरोध नहीं हुआ रहता। वंदे मातरम गीत आज का लिखा हुआ नहीं है। कई सालों का है। लोग कब कौन सी चीज का राजनीतिक फायदा ले. इसे वो अच्छी तरीके से जानते हैं।"
देश संविधान से चलता है- प्यारे खान
मुस्लिम नेताओं के घर के सामने वंदे मातरम गायन पर पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए महाराष्ट्र अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष प्यारे खान ने कहा कि "यह देश संविधान से चलता है और इस देश का कानून जो होगा हम सबको मानना है। इस्लाम का भी कांसेप्ट है, जिस देश में रहते हैं उसका कानून मानना है।यह कुरान शरीफ में कहा गया है, कुरान शरीफ के आयत उठा कर देख लो तो उसमें मिलेंगे। प्यारे खान ने आगे कहा कि जो मॉडर्न स्कूल एवं मदरसे है वहां वंदे मातरम का गायन होता है, वहां पर कोई विरोध नहीं करता। पॉलिटिकल बातें करने के लिए, पॉलिटिकल करियर बड़ा करने के लिए लोग इस तरीके की बातें करते आ रहे हैं।
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