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'कभी भी छिड़ सकता है विश्व युद्ध... मानवता की रक्षा करना अब कठिन', जानिए क्यों नितिन गडकरी को सता रही ये चिंता?

 Published : Jul 06, 2025 05:14 pm IST,  Updated : Jul 06, 2025 05:15 pm IST

विश्वभर में युद्ध जैसे हालातों पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने चिंता जाहिर की है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इजरायल और ईरान के साथ-साथ रूस और यूक्रेन में युद्ध के बीच दुनिया भर में संघर्ष का माहौल है।

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी- India TV Hindi
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी Image Source : X/NITIN_GADKARI

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने रविवार को रूस-यूक्रेन और इजरायल-ईरान युद्धों का हवाला देते हुए कहा कि महाशक्तियों की तानाशाही और निरंकुशता के कारण समन्वय, आपसी सद्भाव और प्रेम खत्म हो रहा है। दुनियाभर में संघर्ष का माहौल है। भारत को दुनिया को सत्य, अहिंसा और शांति का संदेश देने वाली बुद्ध की भूमि बताते हुए गडकरी ने अंतरराष्ट्रीय घटनाओं की समीक्षा और विचार-विमर्श के बाद भविष्य की नीति निर्धारित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। 

मानवता की रक्षा करना कठिन

नागपुर में ‘बियॉन्ड बॉर्डर्स’ पुस्तक के विमोचन के अवसर पर केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि ये संघर्ष ऐसी स्थिति पैदा कर रहे हैं। जहां विश्व युद्ध ‘कभी भी’ छिड़ सकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि युद्ध से संबंधित तकनीकी प्रगति भी मानवता की रक्षा करना कठिन बना रही है। 

दुनिया भर में संघर्ष का माहौल

गडकरी ने कहा, ‘इजरायल और ईरान के साथ-साथ रूस और यूक्रेन में युद्ध के बीच दुनिया भर में संघर्ष का माहौल है। स्थिति ऐसी है कि इन दो युद्धों की पृष्ठभूमि में कभी भी विश्व युद्ध होने की आशंका है।’ केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उन्नत तकनीक के कारण युद्ध के आयाम बदल गए हैं, मिसाइलों और ड्रोन का उपयोग बढ़ रहा है, जिससे टैंक और अन्य प्रकार के विमानों की प्रासंगिकता कम हो रही है। 

नागरिक बस्तियों पर दागी जा रहीं मिसाइलें

उन्होंने कहा, ‘इन सबके बीच मानवता की रक्षा करना मुश्किल हो गया है। अक्सर नागरिक बस्तियों पर मिसाइलें दागी जाती हैं। इससे गंभीर समस्या पैदा हो गई है। इन सभी मुद्दों पर वैश्विक स्तर पर चर्चा करने की जरूरत है।’ गडकरी ने कहा, ‘ऐसा कहना सही नहीं होगा, लेकिन (असल में) यह सब धीरे-धीरे विनाश की ओर ले जा रहा है। महाशक्तियों की तानाशाही और निरंकुशता समन्वय, सद्भाव और प्रेम को खत्म कर रही है।’ (भाषा के इनपुट के साथ)

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