मुंबई: शिवसेना के 60वें स्थापना दिवस के अवसर पर महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे ने मुंबई के NESCO Center में आयोजित भव्य कार्यक्रम में अपनी पार्टी की ताकत का प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने महायुति सरकार की एकजुटता, स्थानीय निकाय चुनावों, लाड़ली बहन योजना और विपक्ष, खासकर उद्धव ठाकरे गुट पर जमकर हमला बोला। बता दें कि शिवसेना के 60वें स्थापना दिवस के मौके पर पार्टी के दोनों गुटों ने अलग-अलग रैलियां कीं।
'महायुति में कोई मतभेद नहीं'
उपमुख्यमंत्री शिंदे ने कहा कि महायुति गठबंधन पूरी तरह मजबूत है और आगे भी मजबूत रहेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग उनके और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के बीच मतभेद पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा,
'कुछ लोग चोरी-छिपे जाकर देवेंद्र जी के कान भरने का काम करते हैं, लेकिन वे खुद हमें सारी बातें बता देते हैं। कुछ लोग इधर की बातें उधर और उधर की बातें इधर पहुंचाने की कोशिश करते हैं, लेकिन हमें सब जानकारी मिल जाती है।'
शिंदे ने स्पष्ट किया कि उनका कोई छिपा हुआ एजेंडा नहीं है। उनका एकमात्र उद्देश्य महाराष्ट्र का विकास और राज्य में बदलाव लाना है।
'लाड़ली बहन योजना बंद नहीं होगी'
शिंदे ने कार्यक्रम में साफ कहा कि महाराष्ट्र सरकार की लाड़ली बहन योजना जारी रहेगी और इसे बंद नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार जनता के हितों के लिए काम कर रही है और जनकल्याणकारी योजनाओं को आगे भी जारी रखा जाएगा। वहीं, निकाय चुनावों पर बोलते हुए शिंदे ने कहा,
'राज्य में 17 स्थानीय निकायों में से 11 जगहों पर चुनाव हो रहे हैं, जबकि 6 स्थानों पर उनकी पार्टी पहले ही निर्विरोध निर्वाचित हो चुकी है। बाकी 11 निकायों में भी शिवसेना और महायुति गठबंधन जीत हासिल करेगा।'
उद्धव ठाकरे पर किया तीखा हमला
शिंदे ने शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे पर निशाना साधते हुए कहा कि वे लगातार लोगों से कहते हैं कि जिसे जाना है, वह चला जाए। उन्होंने कहा कि ऐसे में स्वाभाविक है कि लोग उन्हें छोड़कर जाएंगे। उन्होंने कहा, 'जब आप बार-बार 'जाओ-जाओ' कहते हैं, तो लोग आपके साथ क्यों रहेंगे? उन्हें आत्मचिंतन करने की जरूरत है।' शिंदे ने फिल्म 'शोले' के अभिनेता असरानी के मशहूर संवाद 'बाकी मेरे पीछे आओ' का जिक्र करते हुए कहा कि आज उनके साथ केवल कुछ सलाहकार और चाटुकार ही बचे हैं।
'अहंकार किसी का नहीं टिकता'
अपने भाषण में शिंदे ने एक शेर भी पढ़ा, 'तुम्हारे पांव के नीचे कोई जमीन नहीं, कमाल ये है कि फिर भी तुम्हें यकीन नहीं।' उन्होंने कहा कि समय के साथ फैसले बदलने पड़ते हैं, लेकिन कुछ लोगों का अहंकार इतना बढ़ गया है कि उन्हें सिर्फ 'मैं' ही दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि अहंकार के कारण रावण की लंका भी जलकर राख हो गई थी।
'ऑपरेशन के लिए शेर का दिल चाहिए'
विपक्ष की ओर से किए जा रहे राजनीतिक 'ऑपरेशन' के दावों पर प्रतिक्रिया देते हुए शिंदे ने कहा कि उनके यहां सांसद श्रीकांत शिंदे डॉक्टर हैं, लेकिन वे स्वयं डॉक्टर नहीं होने के बावजूद राजनीतिक ऑपरेशन करना जानते हैं। उन्होंने कहा,
'ऑपरेशन करने के लिए शेर का दिल चाहिए, भेड़िये का नहीं। बाघ की खाल पहन लेने से कोई भेड़िया बाघ नहीं बन जाता।'
4 साल पुरानी चुनौती का भी किया जिक्र
शिंदे ने कहा कि चार साल पहले उन्हें मुंबई आने से रोकने और धमकाने की कोशिश की गई थी। उन्होंने याद दिलाया कि उस समय कहा गया था कि मुंबई आकर दिखाओ, वापस नहीं जा पाओगे। उन्होंने कहा,
'मैं मुंबई आया, हेलिकॉप्टर छोड़कर सड़क मार्ग से यात्रा की और वरली तक पहुंचा। लेकिन जो लोग धमकी दे रहे थे, वे घर बैठकर सब कुछ ऑनलाइन देख रहे थे।'
'शिवसैनिक लोकतांत्रिक तरीके से जवाब देंगे'
शिंदे ने कहा कि अब कुछ लोग उनकी पार्टी को तोड़ने की बात कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कोई शिवसैनिकों को कमजोर करने की कोशिश करेगा तो शिवसैनिक उसका लोकतांत्रिक तरीके से जवाब देंगे। उन्होंने कहा,
'शिवसेना बैठकर राजनीति करने वाली पार्टी नहीं है। सेना का सेनापति मैदान में उतरकर लड़ाई लड़ता है और वे स्वयं भी हमेशा कार्यकर्ताओं के साथ खड़े रहते हैं।'
विपक्ष की चुनावी हार का किया जिक्र
अपने संबोधन के अंत में शिंदे ने कहा कि विधानसभा चुनाव सहित कई चुनावों में विपक्ष को हार का सामना करना पड़ा है। उन्होंने दावा किया कि मुंबई महानगरपालिका पर भी विपक्ष की पकड़ कमजोर हो चुकी है और जनता ने उनके प्रयासों को स्वीकार नहीं किया। शिवसेना के स्थापना दिवस कार्यक्रम के जरिए शिंदे ने एक बार फिर यह संदेश देने की कोशिश की कि महायुति सरकार एकजुट है, उनकी पार्टी संगठनात्मक रूप से मजबूत है और आगामी स्थानीय निकाय चुनावों में गठबंधन बेहतर प्रदर्शन करेगा।
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