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रोहित आर्य के आतंक को करीब से देखने वाली महिला ने बताई 30 अक्टूबर की पूरी कहानी, स्टूडियो से मिली चौंकाने वाली चीजें

 Reported By: Saket Rai,  Dinesh Mourya,  Sachin Chaudhary Edited By: Mangal Yadav
 Published : Oct 31, 2025 02:46 pm IST,  Updated : Oct 31, 2025 03:21 pm IST

बच्चों को बंधक बनाने वाले रोहित आर्य को लेकर कई नई जानकारी सामने आई है। रोहित आर्य ने सभी खिड़कियों और दरवाजों पर सेंसर लगाए थे। मौके से एयर गन, पेट्रोल, ज्वलनशील रबर सॉल्यूशन और लाइटर बरामद किए गए हैं।

इसी स्टूडियो में बच्चों को बनाया गया था बंधक- India TV Hindi
इसी स्टूडियो में बच्चों को बनाया गया था बंधक Image Source : PTI

मुंबईः मुंबई के पवई में बच्चों को बंधक बनाकर रखे गए स्टूडियो से पुलिस को कई आपत्तिजक वस्तुएं मिली हैं। मौके से एयर गन, पेट्रोल, ज्वलनशील रबर सॉल्यूशन और लाइटर बरामद किए गए हैं। इस मामले में पवई पुलिस ने मृत आरोपी रोहित आर्या के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 109(1), 140 और 287 के तहत मामला दर्ज किया है। घटना की आगे की जांच अब क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई है, जबकि बरामद सामान को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है।

रोहित आर्य ने सभी खिड़कियों और दरवाजों पर सेंसर लगाए थे

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, बच्चों को बंधक बनाकर रखने वाले रोहित आर्य ने सभी खिड़कियों और दरवाजों पर सेंसर लगाए थे। पुलिस कहीं से अंदर घुसने की कोशिश न कर सके। इसलिए उसने हर दिशा में मोशन डिटेक्टर सेंसर इंस्टॉल किए थे। आर्य ने सीसीटीवी कैमरों के सभी एंगल एक ही दिशा में मोड़ दिए थे ताकि कैमरों से किसी को वास्तविक स्थिति का पता न चल सके। जब पुलिस बाथरूम के रास्ते से अंदर दाखिल हुई और मुठभेड़ में रोहित को गोली लगी। तब पुलिस को ये सेंसर दिखे और उन्होंने फौरन उसे निष्क्रिय कर दिया।

चश्मदीद महिला ने बताई रोहित के आतंक की पूरी कहानी

वहीं, मुंबई के पवई के आरए स्टूडियो में 17 बच्चों को बंधक बनाने वाले रोहित आर्य के टेरर को करीब से देखने वाली बुजुर्ग महिला ने 30 अक्टूबर की पूरी कहानी बताई है। किडनैपिंग कांड में बुरी तरह जख्मी हुई 75 साल की बुजुर्ग महिला मंगल पाटणकर ने 30 अक्टूबर को दोपहर डेढ बजे से लेकर शाम 5 बजे तक घटित हर घटना के पल-पल की बात बताई। 

सिर्फ मराठी जानने और समझने वाली मंगल पाटणकर ने बताया कि उस समय सब नॉर्मल लग रहा था, जब रोहित आर्य और एक काले से दिखने वाले व्यक्ति ने हमें कहा कि अंदर के कमरे में सब बच्चों को ले जाओ। वो करीब डेढ़ बजे का समय था। लंच का टाइम था लेकिन रोहित ने हर दिन की तरह गुरुवार को किसी को लंच के लिए बाहर जाने नहीं दिया। मेरी बेटी वंदना जाधव और पोती निराली जाधव को मैंने कॉल किया। वो रोहित के साथ जो काले रंग का व्यक्ति था। उसने मुझे डांट लगाई। उसने कहा कि किसी से बात मत करो। रोहित के साथ इस किडनैपिंग घटना में उसका महत्वपूर्ण किरदार था। 

बच्चों के परिजनों से पैसे ऐंठना चाहता था रोहित

बाद में मैंने स्टूडियो का पर्दा उठाकर देखा तो बाहर पेरेंट्स परेशान दिखे। रोते बिलखते दिखे। मैंने फिर मोबाइल से कॉल लगाया और कहा कि आपके परिवार के लोग अंदर ठीक हैं। परेशान मत हो। रोहित के साथ स्टूडियो में एक देशमुख नाम का भी व्यक्ति था। शायद वो डायरेक्टर था, जो इस घटना के एक दिन पहले यानी 29 अक्टूबर को मुम्बई से पुणे चला गया था। शायद उसे पता था कि यहां क्या साजिश रची जा रही है। उसे भी पुलिस को पकड़ना चाहिए। 

रोहित ने हमें मारा नहीं, न ही चिल्लाया। वो बार बार ये कह रहा था कि उसके पास पैसे नहीं हैं। वो हर बच्चे से एक करोड़ लेगा। उसने अलग-अलग जिलों से ऐसे बच्चे ही स्कूलों से चुने थे। जो अमीर थे। उसने बच्चों के पेरेंट्स से फीस भी नहीं ली थी। उसे पहले से पता था। शायद कि अगर किडनैपिंग कांड हुआ तो उसे होस्टेज बनाने के बड़े पैसे मिल सकते हैं। जब पुलिस आई तो मैं सब बच्चों को लेकर बाहर की तरफ भागी। मैंने देखा पुलिस ने रोहित के पैर की तरफ गोली मारी और वो नीचे गिर गया। बाद में शायद सीने पर भी गोली मारी होगी। जब एक एक बच्चों को बाहर निकालने जा रही थी। तभी दरवाजा मुझ पर गिरा और मेरे सिर और कंधे से खून निकलने लगा। मैं मूर्छित सी हो गई। मुझे कॉन्टेबल सावंत ने वैन में डाला और अस्पताल ले आया।

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