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भारत के कार बाजार में मारुति सुजुकी की पकड़ ढीली, 13 साल के निचले स्तर पर पहुंचा मार्केट शेयर

 Written By: Shivendra Singh
 Published : Apr 16, 2026 03:20 pm IST,  Updated : Apr 16, 2026 03:20 pm IST

भारत के कार बाजार में लंबे समय तक राज करने वाली Maruti Suzuki अब दबाव में नजर आ रही है। FY26 में कंपनी का मार्केट शेयर घटकर 39.26% पर आ गया है, जो पिछले 13 साल का सबसे निचला स्तर है। बढ़ती प्रतिस्पर्धा और ग्राहकों की बदलती पसंद इसकी बड़ी वजह मानी जा रही है।

Maruti Suzuki का मार्केट शेयर 13...- India TV Hindi
Maruti Suzuki का मार्केट शेयर 13 साल में सबसे नीचे Image Source : CANVA

भारत के कार बाजार में लंबे समय तक राज करने वाली मारुति सुजुकी अब दबाव में नजर आ रही है। FY26 में कंपनी का मार्केट शेयर गिरकर 39.26% पर आ गया है, जो पिछले 13 सालों में सबसे निचला स्तर है। कभी देश के कार बाजार में करीब आधी हिस्सेदारी रखने वाली यह कंपनी अब लगातार तीसरे साल गिरावट झेल रही है।

ऑटो इंडस्ट्री के आंकड़ों के मुताबिक, FY20 के बाद से कंपनी करीब 12 प्रतिशत मार्केट शेयर खो चुकी है। यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कार बाजार बन चुका है और कॉम्पिटिशन पहले से कहीं ज्यादा तेज हो गई है।

SUV की बढ़ती डिमांड बना बड़ा कारण

मार्केट में SUV गाड़ियों की मांग तेजी से बढ़ी है, लेकिन यहीं पर मारुति सुजुकी पीछे रह गई। आज कुल पैसेंजर व्हीकल मार्केट में SUV का हिस्सा करीब 67% तक पहुंच चुका है, जबकि इस सेगमेंट में मारुति की हिस्सेदारी 25% से भी कम है। हालांकि कंपनी ने जिम्नी और ग्रैंड विटारा जैसे मॉडल लॉन्च किए, लेकिन यह प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले उतना असर नहीं दिखा पाए।

छोटे कार सेगमेंट पर ज्यादा निर्भरता

मारुति अभी भी वैगन आर, स्विफ्ट और बलेनो जैसी छोटी कारों पर ज्यादा निर्भर है। इस सेगमेंट में कंपनी की हिस्सेदारी करीब 67% है, लेकिन FY26 में इस सेगमेंट की ग्रोथ 2% से भी कम रही, जबकि SUV सेगमेंट 11% की रफ्तार से बढ़ा।

टाटा और महिंद्रा ने बढ़ाई टेंशन

मार्केट में प्रतिस्पर्धियों ने तेजी से अपनी पकड़ मजबूत की है। महिंद्रा ने SUV की मदद से अपना मार्केट शेयर बढ़ाकर 14.21% कर लिया है। टाटा मोटर्स भी 13% हिस्सेदारी के साथ करीब पहुंच गई है। महिंद्रा थार, महिंद्रा स्कॉर्पियो, टाटा नेक्सन और टाटा पंच जैसे मॉडल ग्राहकों के बीच काफी लोकप्रिय हो रहे हैं।

ब्रांड इमेज और टेक्नोलॉजी की चुनौती

विशेषज्ञों का मानना है कि मारुति की सबसे बड़ी चुनौती उसकी प्रीमियम ब्रांड इमेज है। कंपनी के पास डीजल पोर्टफोलियो नहीं है, जबकि बाजार में अभी भी करीब 20% हिस्सेदारी डीजल वाहनों की है। इसके अलावा, टोयोटा के साथ पार्टनरशिप भी पूरी तरह फायदेमंद साबित नहीं हुई। कई बार टोयोटा के री-बैज्ड मॉडल मारुति के मॉडल से ज्यादा बिक रहे हैं, जिससे कंपनी की प्रीमियम छवि कमजोर पड़ रही है। मारुति सुजुकी ने FY31 तक फिर से 50% मार्केट शेयर हासिल करने का टागरेट रखा है। लेकिन मौजूदा ट्रेंड को देखते हुए यह लक्ष्य आसान नहीं लगता।

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