1. Hindi News
  2. पैसा
  3. बिज़नेस
  4. दिवाली से पहले किसानों को मिला तोहफा, Iffco ने एनपी खाद की कीमत प्रति बोरी 50 रुपये घटाई

दिवाली से पहले किसानों को मिला तोहफा, Iffco ने एनपी खाद की कीमत प्रति बोरी 50 रुपये घटाई

 Edited By: India TV Paisa Desk
 Published : Nov 11, 2020 12:30 pm IST,  Updated : Nov 11, 2020 12:30 pm IST

इफको ने कहा कि किसानों के लिए जहां भी संभव हो, कीमतों को कम किया जाएगा।

एक किसान  अपने खेतों में उर्वरक का छिड़काव करते हुए। - India TV Hindi
एक किसान  अपने खेतों में उर्वरक का छिड़काव करते हुए। (च‍ि‍त्र प्रतीकात्‍मक) Image Source : FILE PHOTO

नई दिल्‍ली। सहकारी उर्वरक कंपनी इफको ने बुधवार को एनपी खाद की अधिकतम खुदरा कीमत में 50 रुपये प्रति बोरी की कमी कर इसे 925 रुपये कर दिया। कीमतों में कटौती तत्काल प्रभाव से लागू है। इफको ने एक बयान में कहा कि एनपी उर्वरक की कीमतों में कमी कृषि लागत को कम करने तथा 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करने की प्रधानमंत्री की योजना के अनुरूप है।

एनपी उर्वरक में नाइट्रोजन और सुपरफॉस्फोट होते हैं। इफको ने कहा कि किसानों के लिए जहां भी संभव हो, कीमतों को कम किया जाएगा। इफको के प्रबंध निदेशक और सीईओ यूएस अवस्थी ने ट्वीट कर कहा कि हम पूरे भारत में सभी स्टॉक के लिए एनपी 20: 20: 20: 0: 13 उर्वरक की कीमत तत्काल प्रभाव से 50 रुपये प्रति बोरी घटाने की घोषणा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसानों की मदद करने के लिए सल्फर पर प्रति टन 1,000 रुपये की कटौती की गई है। इफको ने कुछ महीने पहले एनपीके और डीएपी उर्वरकों की कीमतों में भी कटौती की थी।

देश में 10,000 नए एफपीओ बनाने की प्रक्रिया तेज गति से चल रही

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण, ग्रामीण विकास, पंचायत राज तथा खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने मंगलवार को कहा कि देश में 10,000 नए कृषक उत्पादक संगठन (एफपीओ) बनाने की प्रक्रिया तेज हो गई है और 35 राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों ने राज्य स्तरीय समन्वय समिति बना ली है। केंद्रीय कृषि मंत्रालय से मिली जानकारी के अनुसार, अब तक 411 उत्पाद क्लस्टरों का प्रमाणन प्रदान किया गया है। साथ ही, 400 जिलों में निगरानी एवं समन्वय समितियों (डीएमसी) का भी गठन हो गया है।

प्रत्येक ब्‍लॉक में कम से कम एक एफपीओ बनाया जाएगा और किसानों के लिए सुविधाएं जुटाने को लेकर पूरी स्कीम पर करीब 6,800 करोड़ रुपये खर्च होंगे। उन्होंने कहा कि देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए अनेक कदमों के तहत कृषि क्षेत्र को भी आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है और 10,000 नए एफपीओ बनाने की योजना इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

देश में इस समय विभिन्न राज्यों में अलग-अलग स्कीमों के तहत बने 6,455 एफपीओ हैं। केंद्र सरकार द्वारा घोषित 10,000 नए एफपीओ बनाने की योजना में स्माल फार्मर्स एग्रीबिजनेस कंर्सोटियम (एसएफएसी), राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड), राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) के अलावा भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी संघ विपणन संघ (नेफेड), वाटरशेड डेवलपमेंट विभाग (डब्ल्यूडीडी)-कर्नाटक, एसएफएसी-हरियाणा, एसएफएसी-तमिलनाडु, नार्थ-ईस्टर्न रीजनल एग्रीकल्चरल मार्केटिंग कापोर्रेशन (एनईआरएएमसी), नेशनल रूरल लाइवलीहुड मिशन (एनआरएलएम), इंटीग्रेटेड न्यूट्रिएन्ट मैनेजमेट (आईएनएम) डिवीजन व तिलहन डिवीजन को कार्यान्वयन एजेंसियों के रूप में मंजूरी दी गई है। इनके द्वारा नियुक्त 'क्लस्टर आधारित व्यावसायिक संगठनों (सीबीबीओ)' के विशेषज्ञ एफपीओ को विकसित करेंगे।

वर्ष 2020-21 के दौरान एजेंसियों को 2,200 एफपीओ के गठन का लक्ष्य दिया गया है और एजेंसियों ने क्लस्टरों की पहचान भी कर ली है। वर्ष 2020-21 के लिए एजेंसियों ने एफपीओ के गठन के लिए अब तक 1,581 ब्लॉक चिन्हित कर लिए हैं। एसएफएसी ने 28 राज्य/संघ राज्य क्षेत्र के 238 जिलों में 450 क्लस्टरों को चिन्हित किया है, जिनमें 84 आकांक्षी जिलों में एवं 9 ट्राइबल जिलों में है।

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। Business से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें पैसा