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होर्मुज संकट से भारत की अर्थव्यवस्था पर मंडरा रहा बड़ा खतरा, क्या फिर से मंहगाई तोड़ देगी आम आदमी की कमर?

 Written By: Shivendra Singh
 Published : Apr 26, 2026 02:12 pm IST,  Updated : Apr 26, 2026 02:12 pm IST

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में रुकावटों ने भारत की अर्थव्यवस्था के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी हैं, जिसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ सकता है।

होर्मुज में तनाव, भारत...- India TV Hindi
होर्मुज में तनाव, भारत में असर! Image Source : ANI

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में आई रुकावटों ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को चिंता में डाल दिया है। भारत जैसे देश, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर हैं, इस संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं। कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी हैं, जिसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ने की आशंका है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात जल्द नहीं सुधरे, तो महंगाई एक बार फिर तेजी से बढ़ सकती है और रुपये पर भी दबाव बना रह सकता है। यह स्थिति न सिर्फ आम आदमी के खर्च को बढ़ाएगी, बल्कि देश की आर्थिक स्थिरता के लिए भी चुनौती बन सकती है।

क्यों अहम है होर्मुज स्ट्रेट?

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है। वैश्विक तेल सप्लाई का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। मौजूदा तनाव के कारण यहां से आपूर्ति बाधित हो रही है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में उछाल आया है। आपको बता दें कि भारत अपनी जरूरत का करीब 85% कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में तेल महंगा होने का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने से ट्रांसपोर्ट महंगा होता है, जिससे खाने-पीने की चीजों से लेकर रोजमर्रा की वस्तुओं के दाम बढ़ जाते हैं।

रुपये पर बढ़ता दबाव

तेल की बढ़ती कीमतों के कारण भारत का आयात बिल बढ़ता है, जिससे रुपये पर दबाव आता है। हाल के दिनों में रुपया कमजोर हुआ है और डॉलर के मुकाबले गिरावट देखने को मिली है। इससे विदेशी निवेश पर भी असर पड़ सकता है। वहीं, ऊंची तेल कीमतें महंगाई को बढ़ावा देती हैं। ऐसे में भारतीय रिजर्व बैंक के लिए ब्याज दरों में कटौती करना मुश्किल हो सकता है। इससे लोन महंगे बने रहेंगे और आम लोगों की ईएमआई का बोझ कम नहीं होगा।

RBI की तैयारी और कदम

बाजार में अस्थिरता को देखते हुए RBI स्थिति पर नजर बनाए हुए है। केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट को स्थिर रखते हुए जरूरत पड़ने पर हस्तक्षेप करने के संकेत दिए हैं। साथ ही, बाजार में लिक्विडिटी बनाए रखने के लिए भी कदम उठाए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर होर्मुज में संकट बना रहता है, तो कच्चे तेल की कीमतें 100 से 110 डॉलर प्रति बैरल के बीच रह सकती हैं। इससे महंगाई 4% से ऊपर जा सकती है और चालू खाता घाटा भी बढ़ सकता है।

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