दिल्ली के लोगों को जल्द ही ट्रैफिक जाम की समस्या से राहत मिलने की उम्मीद है। राजधानी की सबसे व्यस्त और अहम सड़क महात्मा गांधी रिंग रोड को अब एलिवेटेड रिंग रोड कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जाएगा। दिल्ली सरकार ने इस बड़े प्रोजेक्ट को हरी झंडी दे दी है। इसके लिए AECOM India Pvt Ltd नाम की कंपनी को चुना गया है, जो इस योजना पर शुरुआती जांच करेगी यानी यह देखेगी कि प्रोजेक्ट कैसे और कहां बनाया जा सकता है, ट्रैफिक पर इसका क्या असर होगा और आगे काम शुरू करने के लिए पूरी रिपोर्ट (DPR) तैयार करेगी।
यह प्रोजेक्ट लगभग 80 किलोमीटर लंबा होगा और इसे छह चरणों में विकसित किया जाएगा। इसमें आजादपुर फ्लाईओवर से हनुमान मंदिर (आईएसबीटी), हनुमान मंदिर से डीएनडी फ्लाईओवर, डीएनडी से मोतीबाग मेट्रो स्टेशन और मोतीबाग से राजौरी गार्डन तक कई अहम हिस्से शामिल हैं। हर चरण को तय समयसीमा के भीतर पूरा करने के लिए चार-चार महीने के चक्र में काम होगा।
लोक निर्माण मंत्री परवेश वर्मा का बयान
दिल्ली के लोक निर्माण मंत्री परवेश वर्मा ने कहा कि महात्मा गांधी रिंग रोड सिर्फ एक सड़क नहीं, बल्कि दिल्ली की रीढ़ है। इसे हम सुरक्षित, तेज और आधुनिक बनाना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि यह प्रोजेक्ट न सिर्फ ट्रैफिक को सुगम बनाएगा बल्कि प्रदूषण और ईंधन की खपत को भी घटाएगा। नया रिंग रोड कॉरिडोर मेट्रो और बस नेटवर्क से जुड़ा होगा ताकि सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा मिले। इसमें अंडरपास, ग्रेड सेपरेटर, साइकिल ट्रैक और पैदल यात्रियों के लिए अलग जोन भी शामिल किए जाएंगे। परियोजना में ग्रीन कंस्ट्रक्शन मटीरियल और रीयल-टाइम ट्रैफिक सिमुलेशन सिस्टम का भी इस्तेमाल होगा।
AECOM की रिपोर्ट
AECOM की रिपोर्ट के अनुसार, प्रोजेक्ट के शुरुआती 6 हफ्तों में सर्वे और टोपोग्राफिकल मैपिंग होगी, अगले चरणों में भूमि अधिग्रहण, पर्यावरणीय प्रभाव आकलन और डिजाइन मॉडलिंग का काम किया जाएगा। अंतिम चरण में डीपीआर को लागत और कार्यान्वयन रणनीति के साथ प्रस्तुत किया जाएगा। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर सही योजना के साथ इसे अमल में लाया गया तो यह दिल्ली का ट्रैफिक सिस्टम पूरी तरह बदल सकता है। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि निर्माण के दौरान भीड़भाड़ और अव्यवस्था से बचने के लिए मजबूत ट्रैफिक मैनेजमेंट प्लान जरूरी होगा।






































