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बिजनेस लोन पहले चुकाने पर नहीं लगेगा पूर्व-भुगतान शुल्क! RBI ने रखा ये अहम प्रपोजल, जानें डिटेल

 Published : Feb 21, 2025 11:29 pm IST,  Updated : Feb 21, 2025 11:30 pm IST

रिजर्व बैंक की पर्यवेक्षी समीक्षाओं ने एमएसई को स्वीकृत ऋणों के मामले में फोरक्लोजर शुल्क/पूर्व-भुगतान दंड लगाने के संबंध में विनियमित संस्थाओं के बीच भिन्न प्रथाओं का संकेत दिया है, जिससे ग्राहकों की शिकायतें और विवाद होते हैं।

केंद्रीय बैंक ने 21 मार्च, 2025 तक हितधारकों से टिप्पणियां आमंत्रित की हैं।- India TV Hindi
केंद्रीय बैंक ने 21 मार्च, 2025 तक हितधारकों से टिप्पणियां आमंत्रित की हैं। Image Source : FREEPIK

अगर आपने बिजनेस लोन लिया है या लेने वाले हैं तो आने वाले दिनों में आपको एक राहत मिल सकती है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार को व्यक्तियों और सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों (एमएसई) द्वारा लिए गए सभी फ्लोटिंग रेट लोन (व्यावसायिक मकसद सहित) पर बैंकों और दूसरे लोन देने वाले संस्थान द्वारा लगाए जाने वाले फोरक्लोजर शुल्क या प्री-पेमेंट पेनाल्टी को खत्म करने का प्रस्ताव रखा। पीटीआई की खबर के मुताबिक, केंद्रीय बैंक ने 21 मार्च, 2025 तक हितधारकों से टिप्पणियां आमंत्रित की हैं।

मौजूदा समय में नहीं है अनुमति

खबर के मुताबिक, अभी के मानदंडों के हिसाब से विनियमित संस्थाओं (आरई) की कुछ कैटेगरियों को सह-बाध्यकारी के साथ या उसके बिना व्यक्तिगत उधारकर्ताओं को व्यवसाय के अलावा दूसरे मकसदों के लिए स्वीकृत फ्लोटिंग रेट टर्म लोन पर फोरक्लोजर शुल्क/प्री-पेमेंट पेनाल्टी लगाने की अनुमति नहीं है। आरबीआई के ड्राफ्ट सर्कुलर में कहा गया है कि टियर 1 और टियर 2 प्राथमिक (शहरी) सहकारी बैंकों और बेस लेयर एनबीएफसी के अलावा अन्य आरई, व्यक्तियों और एमएसई उधारकर्ताओं को सह-बाध्यकारी के साथ या उसके बिना, व्यावसायिक उद्देश्य के लिए दिए गए फ्लोटिंग रेट लोन के फोरक्लोजर/प्रीपेमेंट के मामले में कोई शुल्क/पेनाल्टी नहीं लगाएंगे।

तब ये लागू नहीं होगा

हालांकि, एमएसई उधारकर्ताओं के मामले में, ये निर्देश प्रति उधारकर्ता 7.50 करोड़ रुपये की कुल स्वीकृत सीमा तक लागू होंगे, 'जिम्मेदार उधार आचरण - ऋणों पर फोरक्लोजर शुल्क/पूर्व-भुगतान दंड लगाना' पर मसौदा में कहा गया है। रिजर्व बैंक की पर्यवेक्षी समीक्षाओं ने एमएसई को स्वीकृत ऋणों के मामले में फोरक्लोजर शुल्क/पूर्व-भुगतान दंड लगाने के संबंध में विनियमित संस्थाओं के बीच भिन्न प्रथाओं का संकेत दिया है, जिससे ग्राहकों की शिकायतें और विवाद होते हैं।

साथ ही, कुछ विनियमित संस्थाओं ने ऋण अनुबंधों/समझौतों में प्रतिबंधात्मक खंड शामिल किए हैं, ताकि उधारकर्ताओं को कम ब्याज दरों या बेहतर सेवा शर्तों का लाभ उठाने के लिए किसी दूसरे ऋणदाता के पास जाने से रोका जा सके। ड्राफ्ट सर्कुलर में आगे कहा गया है कि विनियमित संस्थाओं को न्यूनतम लॉक-इन अवधि निर्धारित किए बिना ऋणों के फोरक्लोजर/पूर्व-भुगतान की अनुमति देनी चाहिए। उन्हें ऐसे मामलों में कोई शुल्क/दंड नहीं लगाना चाहिए, जहां फोरक्लोजर/पूर्व-भुगतान विनियमित संस्थाओं के कहने पर किया जाता है।

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