वेदांता ग्रुप ने जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (JAL) के अधिग्रहण मामले में NCLAT का रुख किया है। कंपनी ने जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड को 14,535 करोड़ रुपये में अधिग्रहित करने के लिए अडाणी ग्रुप की बोली को मिली राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) की मंजूरी को चुनौती दी है। अनिल अग्रवाल के नेतृत्व वाला वेदांता ग्रुप दिवाला प्रक्रिया के जरिए जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड को हासिल करने की दौड़ में शामिल था, लेकिन कर्जदाताओं ने पिछले साल नवंबर में अडाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड की समाधान योजना या बोली को मंजूरी दे दी थी।
एनसीएलटी ने अडाणी एंटरप्राइजेज की बोली को दी थी मंजूरी
एनसीएलटी की इलाहाबाद पीठ ने 17 मार्च को दिवाला प्रक्रिया के जरिए जेपी एसोसिएट्स के अधिग्रहण के लिए अडाणी एंटरप्राइजेज की 14,535 करोड़ रुपये की बोली को मंजूरी दी थी। जेपी एसोसिएट्स ने शेयर बाजार को बताया था कि एनसीएलटी ने ''17 मार्च, 2026 को मौखिक रूप से आदेश सुनाते हुए'' अडाणी की योजना को मंजूरी दी है। माइनिंग सेक्टर की दिग्गज कंपनी वेदांता ने अब एनसीएलटी के उस आदेश के खिलाफ राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) में अपील दायर की है। ये मामला सोमवार को चेयरपर्सन जस्टिस अशोक भूषण और सदस्य (तकनीकी) बरुण मित्रा की दो सदस्यीय बेंच के समक्ष सुनवाई के लिए लिस्ट है।
अडाणी को मिले थे कर्जदाताओं के 89 प्रतिशत वोट
पिछले साल नवंबर में कर्जदाताओं की समिति (सीओसी) ने जेपी एसोसिएट्स के अधिग्रहण के लिए गौतम अडाणी की समाधान योजना को मंजूरी दी थी। अडाणी एंटरप्राइजेज ने इस बोली को जीतने के लिए वेदांता और डालमिया भारत को पीछे छोड़ दिया था। अडाणी को कर्जदाताओं से सर्वाधिक 89 प्रतिशत वोट मिले थे, जिसके बाद डालमिया सीमेंट (भारत) और वेदांता ग्रुप का स्थान था। जेपी एसोसिएट्स के पास रियल एस्टेट, सीमेंट विनिर्माण, आतिथ्य, बिजली और इंजीनियरिंग तथा निर्माण क्षेत्र में उच्च गुणवत्ता वाली संपत्तियां हैं। कंपनी कुल 57,185 करोड़ रुपये के कर्ज भुगतान में चूक कर गई थी।