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रुपये में कमजोरी आम लोगों पर टूटेगा महंगाई का पहाड़, कच्चे तेल और वस्तुओं का महंगा आयात खाली करेगा जेब

 Published : Sep 25, 2022 06:59 pm IST,  Updated : Sep 25, 2022 06:59 pm IST

रिजर्व बैंक ने 6 फीसदी महंगाई को सहनीय स्तर माना है। लेकिन महंगाई इस सहनीय स्तर को बीते कई महीनों से पार कर रही है।

Dollar Rupee- India TV Hindi
Dollar Rupee Image Source : FILE

महंगाई की आग में तप रही भारतीय जनता को रुपये में गिरावट अब झुलसाने वाली है। अमेरिकी फेड द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने के बाद रुपये लगातार एतिहासिक गिरावट दर कर रहा है। जानकारों के अनुसार अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये के 81.09 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक गिर जाने से कच्चे तेल और अन्य जिंसों का आयात महंगा हो जाएगा जिससे मुद्रास्फीति और बढ़ जाएगी। ऐसे में यदि आप भी कीमतें घटने की झूठी उम्मीदें पाले थे, तो नींद से जाग जाइए। 

महंगाई का ’अ’सहनीय स्तर 

रिजर्व बैंक ने 6 फीसदी महंगाई को सहनीय स्तर माना है। लेकिन महंगाई इस सहनीय स्तर को बीते कई महीनों से पार कर रही है। उस पर अमेरिका के केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों को बार-बार बढ़ाने से भारतीय रुपये पर बना दबाव व्यापार घाटा बढ़ने और विदेशी पूंजी की निकासी की वजह से और बढ़ने की आशंका है। आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) इस सप्ताह के अंत में द्विमासिक मौद्रिक नीति की घोषणा करने वाली है। इसमें मुद्रास्फीति के दबाव को कम करने के लिए वह रेपो दर में 0.50 प्रतिशत की वृद्धि का फैसला कर सकती है। 

भड़केगी तेल की महंगाई 

भारत अपनी 85 फीसदी तेल जरूरतों और 50 फीसदी गैस जरूरतों को पूरा करने के लिए आयात पर निर्भर है। ऐसी स्थिति में रुपये में कमजोरी का असर ईंधन की घरेलू कीमतों पर पड़ सकता है। मिल मालिकों के संगठन सॉलवेंट एक्सट्रेक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के कार्यकारी निदेशक बी वी मेहता ने कहा कि इससे आयातित खाद्य तेलों की लागत बढ़ जाएगी। इसका भार अंततः उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। 

रुला देंगे ये आंकड़े 

अगस्त 2022 में वनस्पति तेल का आयात पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 41.55 फीसदी बढ़कर 1.89 अरब डॉलर रहा है। कच्चे तेल का आयात बढ़ने से अगस्त में भारत का व्यापार घाटा अगस्त में दोगुना से अधिक होकर 27.98 अरब डॉलर हो गया। इस वर्ष अगस्त में पेट्रोलियम, कच्चे तेल एवं उत्पादों का आयात सालाना आधार पर 87.44 फीसदी बढ़कर 17.7 अरब डॉलर हो गया। 

गिरावट के आगे कीमतों की नरमी बेअसर

इक्रा रेटिंग्स की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा, ‘‘जिंसों के दामों में कमी का मुद्रास्फीति पर जो अनुकूल असर पड़ना था वह रुपये में गिरावट की वजह से कुछ प्रभावित होगा।’’ एसबीआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक, कोई भी केंद्रीय बैंक अपनी मुद्रा के अवमूल्यन को फिलहाल रोक नहीं सकता है और आरबीआई भी सीमित अवधि के लिए रूपये में गिरावट होने देगा। इमसें कहा गया, ‘‘यह भी सच है कि जब मुद्रा एक निचले स्तर पर स्थिर हो जाती है तो फिर उसमें नाटकीय ढंग से तेजी आती है और भारत की मजबूत बुनियाद को देखते हुए यह भी एक संभावना है।’’ रिपोर्ट में कहा गया है कि रुपये की कीमत में यह गिरावट डॉलर की मजबूती की वजह से आई है, घरेलू आर्थिक मूलभूत कारणों से नहीं।

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