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यह समस्या अब सिर्फ व्यक्तिगत स्तर की नहीं रही। यह राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा और वित्तीय स्थिरता से जुड़ी हुई है। समय आ गया है कि सरकार और इंडस्ट्री मिलकर इसे प्राथमिकता दें। बजट में सरकार इसके लिए कुछ खास प्रावधान की घोषणा करें।
विशेषज्ञों का मानना है कि 2026-27 का बजट स्वास्थ्य क्षेत्र की मौजूद चुनौतियों और भविष्य के अवसरों को ध्यान में रखते हुए भारत को वैश्विक स्तर पर एक मजबूत स्वास्थ्य हब बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की एक मांग यह भी है कि एक कुशलता से काम करने वाला इंटीग्रेटेड हेल्थकेयर सिस्टम बनाने के लिए, जिला अस्पतालों को मजबूत किया जाना चाहिए।
जानकारों के मुताबिक, बजट 2026 सिर्फ वित्तीय आंकड़ों पर नहीं, बल्कि दीर्घकालिक नीति, टिकाऊ कृषि, जलवायु अनुकूलन और प्रभावी बाजार सुविधाओं पर भी केंद्रित होने की उम्मीद जगाता है।
बजट 2026 में न सिर्फ किसानों की आमदनी बढ़ाने पर जोर दिया जा सकता है, बल्कि खेती को अधिक टिकाऊ और लाभकारी बनाने में भी सरकार नई पहल कर सकती है।
विश्लेषकों का मानना है कि आगामी बजट यह संकेत देगा कि भारत का धीरे-धीरे बढ़ता रक्षा व्यय आत्मनिर्भरता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में कितना योगदान दे सकता है।
कई महीनों की सबसे बड़ी एकदिनी गिरावट के साथ सोने और चांदी का जोश ठंडा पड़ गया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोना सहित अन्य कीमती धातुओं में भारी बिकवाली देखी गई।
विशेषज्ञों का मानना है कि ठोस और त्वरित परिणाम हासिल करने के लिए सरकार को रक्षा बजट का कम से कम 10% हिस्सा R&D के लिए निर्धारित करना चाहिए
वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरता के बीच भारतीय मुद्रा पर दबाव है। आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबवे अपनी वास्तविक क्षमता से कम परफॉर्म कर रहा है।
आज के कारोबार में मेटल इंडेक्स में सबसे ज्यादा 5% की गिरावट आई। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स भी 0.3% लुढ़क गया। बजट से पहले निवेशकों ने सतर्कता का रुख अपनाया।
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