यह अतिरिक्त टैरिफ 27 अगस्त 2025 को पूर्वी समयानुसार सुबह 12:01 बजे के बाद अमेरिका में खपत या गोदाम से निकाले जाने वाले सभी भारतीय प्रोडक्ट्स पर लागू होगा।
अमेरिकी टैरिफ लागू होने के बाद प्रतिस्पर्धी देशों जैसे चीन, वियतनाम, मेक्सिको, तुर्की, पाकिस्तान, नेपाल, ग्वाटेमाला और केन्या इस अवसर का फायदा उठा सकते हैं, जिससे भारत लंबे समय तक अमेरिकी बाजार से दूर रह सकता है।
टीमलीज सर्विसेज के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट बालासुब्रमण्यम आनंद नारायणन का मानना है कि नौकरियों के जाने की संभावना फिलहाल नहीं है।
जेफरी सैक्स ने कहा कि वे लंबे समय से कह रहे थे कि अमेरिका पर भरोसा मत करो। ये मत सोचो कि भारत ग्लोबल वैल्यू चेन में चीन की जगह ले लेगा। ट्रंप ऐसा कभी नहीं होने देंगे।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका में बड़े स्तर पर मैन्यूफैक्चरिंग शुरू कराना चाहते हैं। लेकिन, अमेरिका में मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर के सामने कई तरह की चुनौतियां हैं।
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि भारत के साथ टैरिफ को लेकर चल रही मौजूदा परिस्थितियों को लेकर व्यापार वार्ता को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा।
डोनाल्ड ट्रम्प की तरफ से भारत पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने को लेकर देश में जबरदस्त प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। पीएम मोदी सहित कई बड़े नेताओं ने इस पर विरोध भी जताया है। भारत सरकार स्थिति पर नजर रखे हुए हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 30 जुलाई को भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा की थी, जो आज यानी 7 अगस्त से लागू हो गया है।
विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि अमेरिका ने भारत पर अतिरिक्त शुल्क लगाने का फैसला किया है। साथ ही, भारत अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगा।
डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। इसके अलावा, उन्होंने रूस के साथ व्यापार करने की वजह से भारत पर अलग से जुर्माना लगाने की भी बात कही है।
भारत ने बताया कि 2024 में रूस के साथ यूरोपीय संघ का द्विपक्षीय व्यापार 67.5 बिलियन यूरो तक पहुंच गया, जिसमें 16.5 मिलियन टन एलएनजी भी शामिल है, जो रूस के साथ उसके अपने व्यापार की मात्रा से भी ज्यादा है।
डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत को फिर दिया अल्टीमेटम, कहा- 'अगले 24 घंटों में टैरिफ़ 'काफी हद तक बढ़ा देंगे'
इस मिशन के 5 अलग-अलग घटक होंगे- जिनमें ट्रेड फाइनेंस, स्टैंडर्ड और मार्केट एक्सेस से संबंधित नॉन-फाइनेंस ट्रेड, ब्रांड इंडिया के लिए बेहतर ब्रांड रिकॉल, ई-कॉमर्स हब एवं वेयरहाउसिंग और व्यापार सुविधा होंगे।
सोमवार को फिच ने कहा कि कुल मिलाकर, अमेरिका का प्रभावी टैरिफ रेट अब 17% है, जो 3 अप्रैल के अनुमान से लगभग 8 प्रतिशत अंक कम है, जब उच्च पारस्परिक टैरिफ की मूल रूप से घोषणा की गई थी।
भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि यूक्रेन संघर्ष के आरंभ में जब पारंपरिक तेल आपूर्तियां यूरोप की ओर मोड़ी गईं, तब भारत ने रूस से तेल आयात शुरू किया। उस समय अमेरिका ने भी भारत को इस दिशा में प्रोत्साहित किया ताकि वैश्विक ऊर्जा बाजार स्थिर रह सके।
बड़ी खबर! डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत को दी धमकी, कहा- "मैं भारत द्वारा अमेरिका को दिए जाने वाले टैरिफ़ में काफ़ी वृद्धि करूंगा"
मामले से जुड़े लोगों ने बताया कि सरकारी और प्राइवेट, दोनों तरह की रिफाइनरियों को पसंदीदा स्रोतों से तेल खरीदने की अनुमति है और कच्चे तेल की खरीद एक व्यावसायिक फैसला है।
अधिकारी ने बताया कि मछली पालन, इंजीनियरिंग, आईटी और फार्मा जैसे क्षेत्रों के एक्सपोर्टर भी इस विचार-विमर्श में हिस्सा लेंगे।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार भारत ने वित्त वर्ष 2024-25 में अमेरिका को 48.6 लाख टन पेट्रोलियम प्रॉडक्ट्स एक्सपोर्ट किए थे, जिसकी कीमत 4 अरब डॉलर से ज्यादा थी।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, कि प्रधानमंत्री मोदी मेरे मित्र हैं, लेकिन व्यापार के लिहाज से वे हमारे साथ बहुत ज्यादा व्यापार नहीं करते, क्योंकि टैरिफ बहुत ज़्यादा है।
लेटेस्ट न्यूज़