₹50 लाख से अधिक आय वाले करदाताओं के लिए यह संकेत है कि विभाग की निगरानी अब पूरी तरह डेटा-आधारित और तकनीकी हो चुकी है। छोटी सी गलती भी आगे चलकर बड़ी जांच या दंड का कारण बन सकती है।
मौजूदा कानून के तहत अगर किसी मामले में जांच अधिकारियों के पास चाबियां नहीं हैं और उन्हें संदेह है कि वहां कोई अघोषित संपत्ति या बुक ऑफ अकाउंट्स रखा जा रहा है, तो वे किसी भी दरवाजे, बक्से या लॉकर का ताला तोड़ सकते हैं।
इस अवधि में 132 गिरफ्तारियां की गईं और 20,128 करोड़ रुपये की वसूली की गई। जीएसटी के तहत चार मुख्य स्लैब के तहत टैक्स लगाए जाते हैं - 5 प्रतिशत, 12 प्रतिशत, 18 प्रतिशत और 28 प्रतिशत।
अगर आप पर टैक्स देनदारी बनती है और आप इसे नहीं चुका रहे हैं तो यह एक अपराधा है। आपको इसके लिए सजा हो सकती है।
टैक्स अधिकारियों ने इस पूरे मामले पर बताया, “जीएसटी के तहत फर्जी पंजीकरण के खिलाफ दूसरे राष्ट्रव्यापी अभियान में हमने वैरिफिकेशन के लिए लगभग 73,000 जीएसटीआईएन की पहचान की थी।''
डीजीजीआई का कहना है कि विदेश से आने वाली सेवाएं रिवर्स चार्ज सिस्टम के तहत जीएसटी के लिए उत्तरदायी थीं, जिसका भुगतान इन एयरलाइंस ने नहीं किया है।
आधिकारिक बयान में कहा गया है कि परिसर पर मारे गए छापे के दौरान पाया गया कि वहां गुटखा/पान मसाला/तंबाकू उत्पादों का अवैध रूप से निर्माण किया जा रहा था।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि टैक्स चोरी रोकने के लिए मोदी सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है।
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने आयकरदाताओं को जुर्माना देकर अपने कर अपराध का निपटान कराने के अवसर की समयसीमा यानी लास्ट डेट 31 जनवरी 2020 तक बढ़ा दी है।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शनिवार को कहा कि जेट एयरवेज के संस्थापक नरेश गोयल ने कर से बचने की कई योजनाएं तैयार की तथा भारी मात्रा में धन का गबन कर उसे विदेश भेजा। ईडी ने शुक्रवार को गोयल, उनकी कंपनियों तथा साझेदार एजेंसियों के दिल्ली और मुंबई स्थित दर्जनों परिसरों की तलाशी ली।
मुंबई की एक रीयल एस्टेट कंपनी के 40 परिसरों पर शुक्रवार को छापा मारने की कार्रवाई के बाद आयकर विभाग ने दावा किया है कि उसने 700 करोड़ रुपये की कर चोरी का पता लगाया है।
टैक्स चोरों, बेनामी संपत्ति और कालाधन रखने वालों पर शिकंजा कसने की पूरी तैयारी हो चुकी है। आयकर विभाग द्वारा संशोधित दिशा-निर्देश आज (17 जून, सोमवार) से लागू होना है, उसके तहत कालाधन और बेनामी संपत्ति के गंभीर अपराध को 'नॉन-कंपाउंडेबल' की श्रेणी में रख दिया गया है।
लोगों के सोशल नेटवर्किंग प्रोफाइल पर नजर रखी जाएगी और सोशल मीडिया पर अपलोड किए जाने वाली तस्वीरों और वीडियो के जरिये खर्च के तरीकों का पता लगाया जाएगा।
सरकार ने चालू वित्त वर्ष में अप्रैल से नवंबर के आठ माह के दौरान 12,000 करोड़ रुपए की माल एवं सेवा कर (जीएसटी) की चोरी का पता लगाया है।
वित्त मंत्रालय की जांच इकाई ने चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-अक्टूबर अवधि के दौरान कुल 29,088 करोड़ रुपए की इनडायरेक्ट टैक्स की चोरी के 1,835 मामलों की पहचान की है।
राजस्व विभाग जीएसटी की चोरी को रोकने के लिए ई-वे बिल को फास्टैग प्रणाली और लॉजिस्टिक्स डाटा बैंक के साथ जोड़ने की योजना बना रहा है।
जीएसटी जांच शाखा ने दो महीने में 2,000 करोड़ रुपए से अधिक की कर चोरी पकड़ी है। आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि कर भुगतान में बड़ा योगदान इकाईयों के एक छोटे से वर्ग का ही है।
वित्त मंत्रालय के अधिकारियों का मानना है कि कर चोरी रोकने के विभिन्न उपायों के लागू होने के बाद जीएसटी से होने वाला राजस्व संग्रहण अगले वित्त वर्ष के आखिर तक एक लाख करोड़ रुपए मासिक हो सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने 30 साल पुराने उत्पाद शुल्क चोरी मामले में रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) के खिलाफ मुकदमा चलाने का रास्ता साफ कर दिया है।
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट सोशल मीडिया साइट्स से उपलब्ध जानकारी और इनकम डिक्लेयरेशन तथा खर्च के पैटर्न के डाटा की बड़े पैमाने पर एनालिसिस करेगा।
लेटेस्ट न्यूज़