कांग्रेस महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला ने रविवार को चंडीगढ़ प्रशासन पर केंद्र सरकार के प्रस्ताव का विरोध करते हुए संविधान के अनुच्छेद 240 में संशोधन के कदम को ‘‘संघवाद पर हमला’’ करार दिया। सुरजेवाला ने कहा कि यह प्रस्ताव ‘‘चंडीगढ़ पर पूर्ण नियंत्रण करने की निरंकुश इच्छा’’ और हरियाणा तथा पंजाब के लोगों की भावनाओं की अनदेखी को दर्शाता है। इस कदम पर पंजाब के राजनीतिक नेताओं की तीखी प्रतिक्रिया आई है, जिसमें कांग्रेस, आम आदमी पार्टी (आप)और शिरोमणि अकाली दल (शिअद) ने प्रस्तावित संविधान संशोधन विधेयक पर कड़ी आपत्ति जताई है।
केंद्र ने संविधान के अनुच्छेद 240 के दायरे में चंडीगढ़ को शामिल करने के लिए एक विधेयक संसद के आगामी शीतकालीन सत्र में लाने की योजना बनाई है, जिसके तहत राष्ट्रपति को संघ शासित क्षेत्र के लिए सीधे विनियम और कानून बनाने का अधिकार प्राप्त होता है।
शीतकालीन सत्र में आ सकता है विधेयक
चंडीगढ़, पंजाब और हरियाणा की संयुक्त राजधानी है। केंद्र की ओर से इस संबंध में पेश विधेयक अगर पारित होता है तो चंडीगढ़ में एक स्वतंत्र प्रशासक की नियुक्ति का मार्ग प्रशस्त हो जाएगा, जैसा कि पहले यहां स्वतंत्र मुख्य सचिव होता था। लोकसभा और राज्यसभा के बुलेटिन के अनुसार, सरकार एक दिसंबर से शुरू होने वाले संसद सत्र में इस संबंध में 131वां संविधान संशोधन विधेयक, 2025 पेश करेगी। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने रविवार को कहा कि संसद के आगामी शीतकालीन सत्र में केंद्र के लिए ‘कानून निर्माण की प्रक्रिया को सरल’ बनाने वाले चंडीगढ़ संबंधी प्रस्तावित विधेयक को लाने का सरकार का कोई इरादा नहीं है। मंत्रालय ने साथ ही कहा कि इस प्रस्ताव का उद्देश्य चंडीगढ़ और पंजाब एवं हरियाणा के बीच पारंपरिक व्यवस्थाओं को बदलना नहीं है।
सूरजेवाला ने क्या लिखा?
सुरजेवाला ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘संविधान के अनुच्छेद 240 में बदलाव करने का भारत सरकार का कदम संघीय ढांचे को कमजोर करने की एक इरादतन साजिश है। यह पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 के अंतर्गत चंडीगढ़ को दोनों राज्यों की संयुक्त राजधानी रखने के हरियाणा और पंजाब के अधिकारों पर भी सीधे-सीधे हमला है।’’ कांग्रेस नेता ने एक स्पष्ट ‘पैटर्न’ का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘सवाल यह है कि नरेन्द्र मोदी सरकार व भाजपा हरियाणा और पंजाब राज्यों के साथ दुश्मन जैसा बर्ताव क्यों कर रहे हैं?’’ उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘भारत सरकार ने बदनीयत से भाखड़ा बांध पर पंजाब पुलिस को कब्जा करने देने और उसके द्वार बंद करने की इजाजत देकर और बांध पर हरियाणा के पानी के अधिकारों से छेड़छाड़ करके दोनों भाइयों, यानी हरियाणा और पंजाब के बीच फूट के बीज बोने का काम किया।’’ (इनपुट- पीटीआई भाषा)
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