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Guru Purnima 2024: आज मनाई जाएगी गुरु पूर्णिमा, इस दिन जरूर करें इन मंत्रों का जाप, जीवन हो जाएगा सफल

 Written By: Acharya Indu Prakash Edited By: Vineeta Mandal
 Published : Jul 21, 2024 09:00 am IST,  Updated : Jul 21, 2024 10:06 am IST

Guru Purnima 2024: गुरु पूर्णिमा के दिन स्नान-दान का खास महत्व है। इस दिन इन मंत्रों का जाप करने से हर क्षेत्र में कामयाबी मिलती है। तो आइए जानते हैं कि गुरु पूर्णिमा का महत्व क्या है और इस दिन कौनसे मंत्रों का जाप करना चाहिए।

Guru Purnima 2024- India TV Hindi
Guru Purnima 2024 Image Source : FREEPIK

Guru Purnima 2024: आज यानी 21 जुलाई को गुरु पूर्णिमा मनाई जा रही है। इसे आषाढ़ी और आषाढ़ पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। गुरु पूर्णिमा के दिन अपने सभी गुरुजनों का नमन कर उनका आशीर्वाद जरूर प्राप्त करें। शास्त्रों में गुरु को भगवान से भी ऊंचा दर्जा दिया गया है। गुरुओं के बारे में स्वयं भगवान शिवजी कहते हैं- गुरुर्देवो गुरुर्धर्मो, गुरौ निष्ठा परं तपः। गुरोः परतरं नास्ति, त्रिवारं कथयामि ते।। अर्थात् गुरु ही देव हैं, गुरु ही धर्म हैं, गुरु में निष्ठा ही परम धर्म है। गुरु से अधिक और कुछ नहीं है। तो आइए जानते हैं कि गुरु पूर्णिमा के दिन कौनसे मंत्रों का जाप करने से जीवन में सफलता मिलेगी। साथ ही जानेंगे कि गुरु पूर्णिमा का क्या महत्व है।

गुरु पूर्णिमा के दिन करें इन मंत्रों का जाप

  1. गुरुर्देवो गुरुर्धर्मो, गुरौ निष्ठा परं तपः। गुरोः परतरं नास्ति, त्रिवारं कथयामि ते ।।

  2. गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः। गुरुः साक्षात् परं ब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः॥

  3. ॐ शिवरूपाय महत् गुरुदेवाय नमः

  4. ॐ परमतत्वाय नारायणाय गुरुभ्यो नम:

  5. ॐ वेदाहि गुरु देवाय विद्महे परम गुरुवे धीमहि तन्नौ: गुरु: प्रचोदयात्।

  6. ॐ गुरुभ्यों नम:

गुरु पूर्णिमा का धार्मिक महत्व

होगा भगवान शिव भी किसी न किसी के ध्यान में लगे रहते हैं यानि उनसे भी बड़ा कोई है जो उन्हें मार्गदर्शन देता है और जिनकी शरण में वे अपना मस्तक झुकाते हैं। गुरु की आवश्यकता सिर्फ मनुष्यों को ही नहीं बल्कि स्वयं भगवान को भी होती है। यह बात गुरु सांदीपनि और कृष्ण जी पर अच्छे से लागू होती है। गुरु सांदीपनि भगवान कृष्ण और बलराम दोनों के गुरु थे। उनके गुरुकुल में कई महान राजाओं के पुत्र पढ़ते थे, लेकिन गुरु सांदीपनि ने कृष्ण जी को पूरी 64 कलाओं की शिक्षा दी थी। भगवान विष्णु के अवतार होने के बाद भी कृष्ण जी ने गुरु सांदीपनि से शिक्षा ग्रहण की। गुरु-शिष्य के इस अनोखे रिश्ते से यह साबित होता है कि कोई भी चाहे कितना ही ज्ञानी हो, फिर भी उसे एक गुरु की आवश्यकता तो होती ही है। यहां पर एक बात यह भी सामने आती है कि जब कृष्ण जी की शिक्षा पूरी हो गई तो गुरु सांदीपनि ने उनसे गुरु दीक्षा के रूप में यमलोक से अपने पुत्र को वापस लाने को कहा और कृष्ण जी ने भी उनके पुत्र को वापस धरती पर लाकर अपनी गुरु दीक्षा दी। यानि गुरुत्व प्राणियों का आधार है।

कहते हैं- 'हरि रूठे गुरु ठौर है, गुरु रूठे नहिं ठौर'... अर्थात् भगवान के रूठने पर तो गुरु की शरण मिल जाती है लेकिन गुरु के रूठने पर कहीं भी शरण नहीं मिल पाती। एक गुरु आत्मज्ञानी, आत्मनियंत्रित, संयमी और अंतरदृष्टि से युक्त होता है, जो अपने शिष्य की कमजोरी, ताकत, उसकी बुद्धि को भली-भांति पहचानकर ही उसे शिक्षा प्रदान करता है ताकि अपने ज्ञान के क्षेत्र में उसे कोई पराजित न कर सके। कहते हैं कि गुरु पूर्णिमा से लेकर अगले चार महीने अध्ययन के लिये बड़े ही उपयुक्त माने जाते हैं। साधु-संत भी इस दौरान एक स्थान पर रहकर ध्यान लगाते हैं। लिहाजा आज के दिन अपने गुरुओं को प्रणाम कर उनका आशीर्वाद लेना चाहिए और हो सके तो उन्हें कुछ भेंट भी अवश्य करें। ऐसा करने से आपके ऊपर गुरु कृपा हमेशा बनी रहेगी।

(आचार्य इंदु प्रकाश देश के जाने-माने ज्योतिषी हैं, जिन्हें वास्तु, सामुद्रिक शास्त्र और ज्योतिष शास्त्र का लंबा अनुभव है। इंडिया टीवी पर आप इन्हें हर सुबह 7.30 बजे भविष्यवाणी में देखते हैं।)

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