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Dev Diwali Ki Katha: काशी में क्यों होती है देव दीपावली की अद्भुत रौनक? भगवान शिव की विजय से जुड़ी है कथा

 Written By: Laveena Sharma @laveena1693
 Published : Nov 05, 2025 07:45 am IST,  Updated : Nov 05, 2025 07:45 am IST

Dev Diwali Ki Katha: माना जाता है कि आज ही के दिन भगवान शिव ने देवताओं की प्रार्थना सुनकर त्रिपुरासुर नमक दैत्य के अत्याचार को समाप्त किया था, जिसकी खुशी में देवताओं ने दीप जलाकर उत्सव मनाया था। इसलिए इस उत्सव को देव दीपावली के नाम से भी जाना जाता है।

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देव दिवाली की कथा Image Source : CANVA

Dev Diwali Ki Katha (देव दिवाली की कथा): देव दीपावली का ये त्योहार अधिकतर उत्तर प्रदेश में बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। गंगा नदी और काशी के विभिन्न तटों पर आज के दिन मिट्टी के अनगिनत दीपों को जला कर पानी में प्रवाहित किया जाता है। कई नदियों के घाटों पर आज नौकाओं को सजाकर नदी में भी तैराते हैं। कहते हैं आज देवताओं का पृथ्वी पर आगमन होता है और उनके स्वागत में धरती पर दीप जलाये जाते हैं। शास्त्रों के अनुसार आज संध्या के समय शिव-मन्दिर में भी दीप जलाये जाते हैं। शिव मन्दिर के अलावा अन्य मंदिरों में, चौराहे पर और पीपल के पेड़ व तुलसी के पौधे के नीचे भी दीये जलाए जाते हैं। दीपक जलाने के साथ ही आज भगवान शिव के दर्शन करने और उनका अभिषेक करने की भी परंपरा है। ऐसा करने से व्यक्ति को ज्ञान और धन की प्राप्ति होती है। साथ ही स्वास्थ्य अच्छा रहता है और आयु में बढ़ोतरी होती है। चलिए अब जानते हैं देव दिवाली की पौराणिक कथा।

देव दिवाली की कथा (Dev Diwali Ki Katha)

देव दिवाली की पौराणिक कथा त्रिपुरासुर नामक दैत्य के वध से जुड़ी है। त्रिपुरासुर तीन नगरों स्वर्ग, पृथ्वी और पाताल का अधिपति बन गया था और अपनी देवताओं को सताने लगा था। उसके अत्याचारों से हर जगह हाहाकार मच गया था। तब सभी देवता भगवान शिव के पास पहुंचे और उनसे त्रिपुरासुर से मुक्ति दिलाने की प्रार्थना करने लगे। भगवान शिव ने देवताओं की प्रार्थना स्वीकार की और उन्होंने अपने दिव्य पिनाक धनुष से त्रिपुरासुर के तीनों नगरों त्रिपुरा को भस्म कर दिया। कहते हैं जिस दिन यह घटना घटित हुई उस दिन कार्तिक मास की पूर्णिमा थी। इस विजय के कारण ही देवताओं ने स्वर्ग से उतरकर काशी नगरी में गंगा दीप जलाकर भगवान शिव का स्वागत किया। कहते हैं तभी से इस दिन को देव दीपावली यानी देवताओं की दीपावली के रूप में मनाया जाने लगा। इसलिए इस दिन गंगा के घाटों पर हजारों दीप जलाए जाते हैं।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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