नान्दीमुख श्राद्ध को सामान्य श्राद्ध से अलग माना जाता है। शुभ कार्यों में किसी तरह की विघ्न-बाधा न आए इसलिए नान्दीमुख श्राद्ध किया जाता है। इस श्राद्ध को करने से पितरों की कृपा भी प्राप्त होती है। नांदीमुख में नांदी का अर्थ है आनंद और मुख का अर्थ है आरंभ। यानि आपके जीवन में आनंद की शुरुआत हो इसलिए यह श्राद्ध किया जाता है। विवाह, गृह प्रवेश या किसी भी शुभ कार्य से पहले आप नांदीमुख श्राद्ध करते हैं तो पितृ आपके हर कार्य को सफल बना देते हैं। सावन में हरियाली अमावस्या के दिन भी आप नान्दीमुख श्राद्ध कर सकते हैं। 24 जुलाई को हरियाली अमावस्या का त्योहार मनाया जाएगा।
नान्दीमुख श्राद्ध
नान्दीमुख श्राद्ध को आभ्युदयिक श्राद्ध भी कहा जाता है। इस श्राद्ध को किसी भी अमावस्या तिथि को या फिर शुभ तिथियों पर किया जा सकता है। इसका संबंध प्रेत श्राद्ध से नहीं है, बल्कि ये शुभता देना वाला श्राद्ध माना जाता है।
हरियाली अमावस्या पर नान्दीमुख श्राद्ध करना क्यों है शुभ?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन माह में आने वाली हरियाली अमावस्या को पितृ मुक्ति के लिए बेहद शुभ माना जाता है। इस अमावस्या तिथि पर अगर आप नान्दीमुख श्राद्ध कर लेते हैं तो इसके बाद किए जाने वाले आपके सभी शुभ कार्य सफल होते हैं। इसके साथ ही पितरों की आत्मा को भी शांति की प्राप्ति होती है। नान्दीमुख श्राद्ध करने से आपको पितृदोष से भी मुक्ति पाते हैं और जीवन के हर क्षेत्र में आप उन्नति करने लगते हैं।
कैसे करें नान्दीमुख श्राद्ध?
शास्त्रों के अनुसार, नान्दीमुख श्राद्ध में सबसे पहले मातृका पूजन और वसोर्धारा कर्मकांड किया जाना चाहिए। इसके बाद सपिण्ड, पिंड रहित, आमान्न और हेम श्राद्धि किए जाते हैं। शिव पुराण के अनुसार नान्दीमुख श्राद्ध के दौरान पवित्रिकरण, आचमन, शिखा बंधन, आसन शुद्धि, प्राणायाम, पंचगव्य निर्माण, संकल्प, पिंडदान, ब्राह्मण भोजन, आशीर्वाद आदि कर्म भी किए जाने चाहिए।
लाभ
नान्दीमुख श्राद्ध करने से आपके मांगलिक कार्य बिना विघ्न के संपन्न होते हैं। इस श्राद्ध को करने से न केवल पितृ बल्कि देवतागण भी प्रसन्न होते हैं। सर्प दोष से भी यह श्राद्ध आपको मुक्ति दिलाता है। घर-परिवार की सुख समृद्धि के साथ ही परिवार के लोगों को आरोग्य की प्राप्ति भी नान्दीमुख श्राद्ध करने से प्राप्त होती है।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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