गॉल: ये अक़्सर कम ही देखने को मिलता है कि ऐसी टीम जो पहली पारी में विरोधी टीम को सस्ते में निबटा दे और फिर जिसके दो बल्लेबाज़ शतक लगा दें, वो बजाए पांच दिन के भीतर मैच जीतने के हार जाए वो भी एक तरफ़ा मुक़ाबले में।
मैच शुक्रवार को ही ख़त्म हो जाता लेकिन चांदीमल (अविजित 162), थिरिमाने (44) और जेहन मुबारक (49) ने अपनी टीम को पारी की हार से बचा लिया। बावजूद इसके जीत टीम इंडिया की ही नज़र आ रही थी क्योंकि उसे बनाने थे मात्र 176 जो ‘धुरंदर’ बल्लेबाज़ों के लिए बायें हाथ का खेल होना चाहिए था लेकिन हेरथ ने बाज़ी ही पलट दी।
सवाल ये उठता है कि क्या 176 रन के लिए छह बल्लेबाज़ नाकाफी थे...? जिस तरह से टीम इंडिया ने दूसरी पारी में बल्लेबाज़ी की उससे तो यही लगता है कि आठ बल्लेबाज़ भी कम पड़ जाते।