नयी दिल्ली: शुरुआती उतार चढ़ाव के बाद अब इंडियन प्रीमियर लीग की अन्य टीमों की तुलना में बेहद संतुलित दिख रही दिल्ली डेयरडेविल्स अपनी युवा शक्ति के उत्साही प्रदर्शन के दम पर गुरुवार को यहां अपने घरेलू मैदान फिरोजशाह कोटला में चोटिल खिलाडि़यों की समस्या से जूझा रहे राइजिंग पुणे सुपरजाइंट्स के खिलाफ अपना विजय अभियान जारी रखने के लिये उतरेगी। डेयरडेविल्स ने जहीर खान की अगुवाई में अब तक लगातार अपने प्रदर्शन में सुधार किया है। पिछले कुछ वर्षों में इस टीम के साथ सबसे बड़ी दिक्कत एकजुटता की दिख रही थी लेकिन जहीर ने बड़ी कुशलता से अपनी युवा टीम को एकसूत्र में पिरोया है जिसका असर टीम के प्रदर्शन पर साफ दिख रहा है। जहीर ने स्वयं अपनी कप्तानी से प्रभावित किया है। एक बार महेंद्र सिंह धोनी ने उन्हें गेंदबाजी विभाग का सचिन तेंदुलकर कहा था और अब उन्होंने साबित कर दिया कि मौका मिलने पर वह टीम की अच्छी तरह से अगुवाई कर सकते हैं। अपने अपार अनुभव के दम पर वह बड़ी कुशलता से गेंदबाजी और क्षेत्ररक्षण में बदलाव करते है। यह साफ नजर आता है कि वह विरोधी खेमे के प्रत्येक बल्लेबाज के लिये रणनीति तैयार करके मैदान पर उतरते हैं। यही नहीं उन्होंने अपने युवा खिलाडि़यों को उन्होंने अच्छे प्रदर्शन के लिये प्रेरित किया और अब आलम यह है कि क्विंटन डिकाक, रिषभ पंत, संजू सैमसन, कार्लोस ब्रेथवेट, शाहबाज नदीम, क्रिस मौरिस जैसे कम अनुभवी खिलाड़ी दूसरी टीमों के मंझो हुए खिलाडि़यों पर भारी पड़ रहे हैं।
गुजरात लायन्स के खिलाफ कल के मैच में इसकी बानगी देखने को मिली जब कई सितारा खिलाडि़यों से सजी टीम को डेयरडेविल्स के नौजवानों के सामने घुटने टेकने पड़े। इससे टीम ने इसी टीम के खिलाफ कोटला में मिली एक रन की मामूली हार का बदला भी चुकता कर दिया। यही नहीं डेयरडेविल्स की अब तक सलामी जोड़ी को लेकर थोड़ा असमंजस की स्थिति में था लेकिन युवा पंत ने जिस तरह डिकाक के साथ यह जिम्मेदारी संभाली उससे अब टीम अधिक संतुलित दिखने लगी है। डेयरडेविल्स ने लायन्स के खिलाफ एक रन से हार के बाद लगातार दो जीत दर्ज की हैं। इससे पहले उसने सैम बिलिंग और करूण नायर जैसे युवा खिलाडि़यों के अच्े प्रदर्शन से कोलकाता नाइटराइडर्स को हराया था। डेयरडेविल्स ने अब तक सात मैचों में से पांच में जीत दर्ज कर ली है और वह दस अंक लेकर दूसरे स्थान पर पहुंच गया है। अब डेयरडेविल्स का मुकाबला ऐसी टीम है जो कई नामी खिलाडि़यों के चोटिल होने से महेंद्र सिंह धोनी जैसा कप्तान होने के बावजूद एक संतुलित टीम तैयार करने के लिये जूझा रही है। पुणे सुपरजाइंट्स को केविन पीटरसन, फाफ डु प्लेसिस, मिशेल मार्श और बेहतरीन फार्म में चल रहे स्टीवन स्मिथ को गंवाना पड़ा है। ये सभी खिलाड़ी चोटिल होने के कारण स्वदेश लौट गये हैं। चार प्रमुख खिलाडि़यों के चोटिल होने से टीम का संतुलन बुरी तरह चरमरा गया है और धोनी जैसे धाकड़ कप्तान को भी नहीं सूझा रहा है कि वह किस संयोजन के साथ मैदान पर उतरें। आलम यह है कि टीम को लगातार हार का सामना भी करना पड़ा है और उसके लिये आगे की राह कांटों भरी बन गयी है। पुणे ने अब तक आठ मैच खेल लिये हैं जिसमें से ह में उसे हार मिली है। उसके दो जीत से केवल चार अंक हैं और यदि उसे चोटी की चार टीमों में जगह बनानी है तो आगे सभी मैच जीतने होंगे जो कि वर्तमान परिस्थितियों में आसान नहीं दिख रहा है।
धोनी अपनी किसी एक एकादश को लंबे समय तक मैदान में उतारने के लिये मषहूर रहे हैं लेकिन यहां तस्वीर बदल गयी है। खिलाडि़यों के चोटिल होने से उन्हें लगातार संयोजन में बदलाव करने पड़े हैं। अंजिक्य रहाणे शुरू से पारी का आगाज कर रहे हैं लेकिन अब उनके साथ दूसरे ोर पर जिम्मेदारी कौन संभालेगा यह तय नहीं है। आस्ट्रेलिया से बुलाये गये नये बल्लेबाज उस्मान ख्वाजा को यह जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है जिन्होंने विश्व टी20 में भी अपनी टीम के लिये भूमिका निभायी थी। जार्ज बेली के रूप में टीम में एक और नया चेहरा जुड़ा है जिन पर मध्यक्रम को स्थायित्व प्रदान करने का एक और बड़ा जिम्मा होगा। सुपरजाइंट्स के बल्लेबाजों को हालांकि बेहतरीन फार्म में चल रहे लेग स्पिनर अमित मिश्रा, अपने पुराने रंग दिखा रहे जहीर खान, चोट से उबरकर वापसी करने वाले मोहम्मद शमी, नदीम, मौरिस और ब्रेथवेट जैसे गेंदबाजों के सामने संभलकर बल्लेबाजी करनी होगी। धोनी के तुरूप के इक्के रहे रविचंद्रन अश्विन का गेंदबाजी में नहीं चल पाना सुपरजाइंट्स के लिये सबसे बड़ी चिंता है। अश्विन ने अब तक आठ मैचों में केवल तीन विकेट लिये हैं और उन्होंने सात रन प्रति ओवर की दर से रन दिये हैं। धोनी ने ऐसे हालात में एक अन्य स्पिनर मुरूगन अश्विन पर भरोसा जताया लेकिन वह निरंतर अच प्रदर्शन करने में नाकाम रहे हैं। इशांम शर्मा और तिसारा परेरा से टीम को काफी उम्मीद थी लेकिन ये दोनों काफी महंगे साबित हुए हैं। ऐसे स्थिति में पुणे के आक्रमण के लिये दिल्ली के युवा बल्लेबाजों पर अंकुश लगाना सबसे बड़ी चुनौती होगी क्योंकि डिकाक, पंत, नायर, सैमसन, जेपी डुमिनी, बिलिंग्स, बे्रथवेट, मौरिस कोई भी मौका मिलने पर बड़ी पारी खेलने के लिये तैयार दिखता है। मौरिस ने कोटला में लायन्स के खिलाफ पिले मैच में नाबाद 82 रन की धमाकेदार पारी खेली थी। उन्होंने दिल्ली के अपने प्रषसंकों की उम्मीदें बढ़ा दी हैं जिस पर वह खरा उतरना चाहेंगे।