इसके बावजूद पिंक बाल को लेकर खालाड़ी आशंकित हैं बल्कि इसकी आलोचना भी कर रहे हैं हालंकि यह पिंकबॉल रेड बॉल की तुलना में रात की लाइट में कहीं बेहतर नज़र आएगी।
ऑस्ट्रेलिया के बल्लेबाज़ एडम वोग्स ने कहा कि कैनबरा में न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ मैचों में पिंक बॉल जल्दी ख़राब हो गई थी और इसका रंग भी निकल गया था।

न्यूज़ीलैंड के ओपनर टॉम लाथम ने शिकायत की कि पिंक बॉल रेड बॉल की तुलना में जल्दी ख़राब हो जाती है। लेकिन क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया का तर्क है कि कैनबरा की पिच अधिक खुरदरी थी जिसकी वजह से बॉल जल्दी ख़राब हो गई।

क्या पिक बॉल को पकड पाएगी बॉल ट्रैकिंग टैक्नॉलॉजी?
ऐसी भी आशंका ज़ाहिर की जा रही है कि टेस्ट के दौरान शायद बॉल ट्रैकिंग टैक्नॉलॉजी पिंक बॉल को पकड़ न पाए। लेकिन कुकाबुरा कंपनी ने अधिकारी ब्रेट एलियट का कहना है कि पिंक बॉल पर जितने टेस्ट किए गए हैं उतने टेस्ट किसी क्रिकेट बॉल के साथ नहीं किए गए। ये लगभग रेड बॉल की ही तरह है।
उन्होंने कहा, 'खिलाड़ी खेल के हालात के अनुसार खुद को ढालने में बहुत दक्ष हो गए हैं। इंग्लैंड में उन्हें अलग तरह की पिचों, मैसम और ड्यूक बॉल के अनुरुप खुद को ढालना होता है। भारत में अलग मौसम में SG बात से खेलना पड़ता है।'