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डेविस कप: सोमदेव ने भारत की उम्मीदों को जिंदा रखा

 Written By: IANS
 Published : Sep 18, 2015 06:14 pm IST,  Updated : Sep 18, 2015 06:14 pm IST

नई दिल्ली: सोमदेव देववर्मन ने शानदार इस सत्र का अपना सबसे अच्छा प्रदर्शन शुक्रवार के लिए ही बचाकर रखा था, जब उन्होनें दूसरे एकल मुकाबले में वरीयता क्रम में अपने से 124 स्थान ऊंचे खिलाड़ी

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डेविस कप: सोमदेव ने भारत की उम्मीदों को जिंदा रखा

नई दिल्ली: सोमदेव देववर्मन ने शानदार इस सत्र का अपना सबसे अच्छा प्रदर्शन शुक्रवार के लिए ही बचाकर रखा था, जब उन्होनें दूसरे एकल मुकाबले में वरीयता क्रम में अपने से 124 स्थान ऊंचे खिलाड़ी को हराकर भारत के डेविस कप वर्ल्ड ग्रुप में पहुंचने की उम्मीदों को जिंदा रखा। भारत ने चेक गणराज्य के खिलाफ दिल्ली लॉन टेनिस संघ (डीएलटीए) परिसर में जारी वर्ल्ड ग्रुप प्लेऑफ में पहले दिन के दोनों रबर की समाप्ति के बाद 1-1 की बराबरी कर ली है। भारत के युकी भाम्बरी पहला एकल मुकाबला हार गए थे लेकिन 164वीं वरीयता प्राप्त सोमदेव ने अपेक्षाओं के भारी दबाव के बीच खेलते हुए बड़ा उलटफेर किया और विश्व के 40वीं वरीयता प्राप्त जिरी वेसेले को 7-6, 6-4, 6-3 से मात दी।

सोमदेव को हालांकि जीत हासिल करने के लिए दो घंटे 44 मिनट तक संघर्ष करना पड़ा। विश्व के 125वीं वरीयता प्राप्त खिलाड़ी युकी को विश्व के 85वीं वरीयता प्राप्त खिलाड़ी रोसोल ने 6-2, 6-1, 7-5 से हराया। युकी के हारने से भारत 0-1 से पिछड़ गया था।


विश्व के 85वीं वरीयता प्राप्त खिलाड़ी रोसोल के खिलाफ विश्व के 125वीं वरीयता प्राप्त युकी की एक न चली। हालांकि, तीसरे सेट में वह थोड़ा संघर्ष करते नजर आए, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी।

भारत को पहले एकल में मौसम ने भी दगा दिया। जिस रणनीति के तहत भारत ने चेक गणराज्य के खिलाफ भरी दोपहरी में मैच कराने का फैसला किया था, वह भी इस दौरान असफल साबित हुआ, क्योंकि मैच के दौरान आसमान में बादल छाए रहे।

चेक गणराज्य के खिलाफ पहले मुकाबले में युकी की हार के बाद भारत की आंखें सोमदेव देवबर्मन पर टिकी थीं और सोमदेव बेहतरीन खेल का प्रदर्शन करते हुए भारत की उम्मीद पर खरे उतरे।

युकी की हार के बाद लगा था कि 40वें वरीय वेसेले को सोमदेव शायद ही हरा सकेंगे क्योंकि दोनों के वरीयता क्रम का अंतर दोनों के खेल के स्तर को साफ दर्शा रहा था। और तो और इस साल सोमदेव अपने करियर का सबसे खराब दौर से गुजर रहे हैं। इस साल वह 11 आयोजनों में पहले दौर से भी आगे नहीं बढ़ सके हैं।

सोमदेव के खराब रिकार्ड और वेलेले के कद को देखते हुए लगा कि एक और हार भारत को मुकाबले से बाहर कर देगी लेकिन 2010 के बाद से दिल्ली में अविजित सोमदेव ने अपने जीवन की सबसे बड़ी जीत में से एक को अंजाम देते हुए हजारों भारतीयों को अपार खुशी और अपने साथियों को वर्ल्ड ग्रुप में जाने की सम्भावना प्रदान की।

अब भारत को मुकाबले में आगे ले जाने की जिम्मेदारी रोहन बोपन्ना और लिएंडर पेस पर होगी, जो शनिवार को युगल मुकाबले में उतरेंगे। भारतीय जोड़ी का सामना एडम पाव्लासेक और दिग्गज राडेक स्टेपानेक से होगा। शनिवार को एक ही मुकाबला होगा।

पेस बुधवार को न्यूयार्क से लौटे हैं। पेस ने स्विस स्टार मार्टिना हिंगिस के साथ मिश्रित युगल खिताब जीता है। पेस की मौजूदगी से भारतीय खिलाड़ियों में ऊर्जा के संचार का प्रवाह साफ दिख रहा है।

दूसरी ओर, स्टेपानेक एक शानदार खिलाड़ी हैं और अपनी टीम में वही दर्जा रखते हैं, जो भारतीय टीम में पेस का है। वह युगल मुकाबला जीतकर निश्चित तौर पर अपने साथियों का मनोबल बनाए रखना चाहेंगे।

इस तीन दिवसीय मुकाबले को जीतने वाली टीम को 2016 में वर्ल्ड ग्रुप में खेलने का मौका मिलेगा जबकि हारने वाली टीम को अपने क्षेत्र के ग्रुप-1 में लौटना होगा।

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