मजदूर दिवस 1 मई को श्रमिकों के अधिकारों और योगदान को सम्मानित करने के लिए मनाया जाता है। इसकी शुरुआत 1886 के शिकागो हैमार्केट आंदोलन के बाद हुई थी। भारत में यह पहली बार 1923 में चेन्नई में मनाया गया था।
नीति आयोग का अनुमान है कि भारत में गिग अर्थव्यवस्था 2024-25 में एक करोड़ से अधिक श्रमिकों को रोजगार देगी। इसके बाद 2029-30 तक यह आंकड़ा 2.35 करोड़ तक पहुंच जाएगा।
देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने 10 वर्षों के कार्यकाल में कई बार देश के श्रमिकों को सम्मान देते हुए देखे गए हैं। आज 1 मई को मजदूर दिवस के मौके पर हम जानेंगे पीएम के कुछ ऐसे ही कदमों के बारे में।
आज यानी 1 मई को पूरी दुनिया मजदूर दिवस मना रही है। पर क्या आप जानते हैं इसकी शुरुआत कैसे हुई और इसके पीछे क्या कारण था?
Labour Day PM Modi: भारत में वामपंथी लोग शुरुआत में लेबर डे का नेतृत्व कर रहे थे। 1 मई 1923 को लेबर किसान पार्टी ऑफ हिंदुस्तान की अध्यक्षता में पहली बार मजदूर दिवस चेन्नई में मनाने का फैसला लिया गया था।
आज से 137 साल पहले मजदूरों से 15-15 घंटे काम कराए जाते थे, मना करने पर उन्हें कोड़ों से मारा जाता था। उनपर इतने अत्याचार किए जाते थे कि इंसानियत भी शर्मशार हो जाए। इसके बाद मजदूरों के यूनियन ने तय किया कि वे इसके खिलाफ आवाज उठाएंगे और फिर...
एक मई का दिन इतिहास में मजदूर दिवस के तौर पर दर्ज है। दुनिया में मजदूर दिवस मनाने का चलन करीब 132 साल पुराना है। मजदूरों ने काम के घंटे तय करने की मांग को लेकर 1877 में आंदोलन शुरू किया गया था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अन्य राज्यों में 14 दिन का क्वॉरन्टीन पूरा कर चुके अपने प्रदेश के श्रमिकों, कामगारों तथा मजदूरों को चरणबद्ध तरीके से वापस लाया जाएगा।
पूरी दुनिया में पहली मई को इंटरनेशनल लेबर डे (अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस) मनाया जा रहा है
महीने की शुरुआत ही मजदूर दिवस के साथ हुई है, और आज महाराष्ट्र दिवस भी है, ऐसे में महाराष्ट्र सहित देश के अधिकतर राज्यों में आज बैंक बंद हैं।
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