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हाईकोर्ट ने लिया कुख्यात हनी ट्रैप गिरोह का संज्ञान, महिलाओं के जरिए फंसाकर लोगों को कर रहा था ब्लैकमेल

 Reported By: Imran Laeek Edited By: Vinay Trivedi
 Published : Apr 02, 2026 11:30 pm IST,  Updated : Apr 02, 2026 11:30 pm IST

Bijnor Honey Trap Case: हनीट्रैप गिरोह की जांच का निर्देश इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मेरठ जोन के आईजी को दे दिया है। इसमें महिलाओं को जरिए लोगों को फंसाकर ब्लैकमेल किया जा रहा था।

Bijnor Honey Trap Case- India TV Hindi
हनी ट्रैप गिरोह मामले का इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया है। Image Source : PTI (फाइल फोटो)

प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मेरठ जोन में संचालित कथित हनी-ट्रैप और ब्लैकमेल गिरोह का स्वत: संज्ञान लिया। हाईकोर्ट ने मेरठ जोन के आईजी को मामले की जांच करने का निर्देश दिया है। जस्टिस जे जे मुनीर और जस्टिस तरून सक्सेना की डिवीजन बेंच में इसकी सुनवाई हुई। हाईकोर्ट ने कहा कि इस तरह के गिरोह का अस्तित्व, जो महिलाओं के जरिए लोगों को फंसाकर ब्लैकमेल करता है, यह समाज की 'गंभीर रूप से चिंताजनक स्थिति' को दर्शाता है।

आरोपियों ने की केस रद्द करने की मांग

अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर इस तरह के अपराधों को जारी रहने दिया गया, तो एक सभ्य समाज में जीवन यापन करना मुश्किल हो जाएगा। दरअसल, हाईकोर्ट एक याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें एक महिला और चार अन्य आरोपियों ने अपने खिलाफ दर्ज मामले को रद्द करने की मांग की थी।

क्या है हनी ट्रैप का पूरा मामला?

पहली याचिकाकर्ता ने शिकायतकर्ता से संपर्क कर बिजनौर के एक होटल में बुलाया था, जहां उनके बीच शारीरिक संबंध बनाए गए। इस दौरान छिपकर वीडियो बना लिया गया, जिसके बाद आरोपियों ने कथित तौर पर शिकायतकर्ता से 10 लाख रुपये की मांग करते हुए ब्लैकमेल करना शुरू किया। इसके बाद शिकायतकर्ता को एक स्थान पर बुलाया गया, जहां 2 पुलिसकर्मी जो इस मामले में आरोपी भी हैं, वह भी मुख्य आरोपी के साथ मिले हुए थे, उन्होंने कथित तौर पर वीडियो दिखाकर पैसे की मांग की।

हाईकोर्ट ने मामले को बताया 'अत्यंत गंभीर'

हालांकि, शिकायतकर्ता ने पैसे देने से इनकार कर दिया और मामले की सूचना पुलिस को दे दी। हाईकोर्ट के निर्देश मामले को 'अत्यंत गंभीर' बताते हुए मेरठ जोन के सभी जिला पुलिस प्रमुखों को सतर्क रहने और कड़ी निगरानी रखने के निर्देश दिए। हाईकोर्ट ने साथ ही रजिस्ट्रार (कम्प्लायंस) को आदेश की प्रति डीजीपी, मेरठ जोन के IG और उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) को भेजने का निर्देश दिया है। हालांकि अंत में, याचिका को वापस लेने के आधार पर हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया।

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