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वोटिंग की पॉजिटिव खबर: पहली बार मिला मतदान का मौका तो कनाडा से पीलीभीत पहुंच गया लड़का, पढ़ें पूरी कहानी

 Edited By: Shakti Singh
 Published : Apr 19, 2024 02:52 pm IST,  Updated : Apr 19, 2024 02:52 pm IST

आजम जिलानी ने छुट्टियों का बेहतरीन फायदा उठाते हुए पीलीभीत आने का प्लान बनाया। यहां पहुंचकर उन्होंने मतदान किया और अन्य लोगों को भी मतदान के लिए प्रेरित किया।

Voting- India TV Hindi
मतदान- सांकेतिक फोटो Image Source : PTI

Lok Sabha Election 2024: लोकसभा चुनाव 2024 में पहले चरण का मतदान जारी है। मतदान के पहले चरण में कई लोग दूसरों के लिए प्रेरणा बने हैं। कोई शादी के तुरंत बाद वोट डालने पहुंच गया तो कोई हाथ में मेंहदी लगाए हुए ही मतदान करने पहुंचा। कुछ दूल्हे तो अपनी दुल्हन के साथ ही अपना प्रतिनिधि चुनने भी चले गए। कई बुजुर्गों ने कठिनाई के बावजूद बूथ तक जाकर मतदान किया। दिव्यांग भी मतदान केंद्र पहुंचकर आम लोगों के लिए प्रेरणा बने।

दुनिया की सबसे छोटी महिला ज्योति आमगे ने भी पूरे परिवार के साथ नागपुर में मतदान किया। इस बीच एक लड़का ऐसा भी रहा, जो पहले से ही इस मतदान को खास बनाने का प्लान बना रहा था। आजम जिलानी ने कनाडा से पीलीभीत आकर मतदान किया और अपने लिए इसे यादगार बना लिया। इसके साथ ही वह कई लोगों के लिए प्रेरणा भी बन गए, जो धूप का बहाना बनाकर मतदान करने नहीं जाते हैं।

छुट्टियों में बनाया प्लान

आजम ने बताया कि उनकी छुट्टियां चल रही हैं। उन्हें पहली बार मतदान करने का मौका मिला है। ऐसे में उन्होंने छुट्टियों का फायदा उठाते हुए यहां आने और मतदान करने का प्लान बना लिया। आजम ने पीलीभीत सदर के राम लुभाई कॉलेज में मतदान किया। 

जितिन और भगवत के बीच मुकाबला

पीलीभीत में एनडीए गठबंध की तरफ से भारतीय जनता पार्टी ने जितिन प्रसाद को टिकट दिया है। दो बार के सांसद वरुण गांधी का पत्ता काट दिया गया है। 2021 में कांग्रेस से बीजेपी में शामिल हुए जितिन के सामने विपक्षी दलों के गठबंधन ने भगवत शरण गंगवार को टिकट दिया है। भगवत समाजवादी पार्टी के दिग्गज नेता हैं। उन्हें चुनाव लड़ने का अनुभव काफी ज्यादा है। हालांकि, वह काफी चुनाव हारे भी हैं। पीलीभीत को गांधी परिवार का गढ़ माना जाता है। यहां 1989 से गांधी परिवार का कब्जा रहा है। हालांकि, इस बार कोई भी गांधी उम्मीदवार यहां से चुनाव नहीं लड़ रहा। मेनका इस सीट से 1989 में जीती थीं, इसके बाद से यहां उनका दबदबा रहा है।

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