Amazing Facts : मुगल सम्राट शाहजहां द्वारा अपनी प्रिय पत्नी मुमताज महल की याद में बनवाया गया ताज महल विश्व के सात अजूबों में शामिल है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसके निर्माण पर उस समय कितना खर्च आया था? agra.nic.in की रिपोर्ट के मुताबिक, ताज महल परिसर का निर्माण 1653 में पूरा होने पर कुल लगभग 3.2 करोड़ रुपये (32 मिलियन रुपये) खर्च हुए थे। यह राशि सुनकर आज के समय में यकीन करना मुश्किल लगता है, लेकिन मुगल काल में यह बहुत बड़ी राशि थी।
निर्माण का इतिहास
ताज महल का निर्माण 1632 में शुरू हुआ और मुख्य संरचना 1648 तक बनी, जबकि पूरा परिसर 1653 में पूरा हुआ। यह मकबरा 17 हेक्टेयर (42 एकड़) के विशाल परिसर का केंद्रबिंदु है, जिसमें एक मस्जिद और एक अतिथि गृह भी शामिल हैं। यह परिसर तीन तरफ से कंगूरेदार दीवार से घिरे औपचारिक उद्यानों में स्थित है। इस राशि में सफेद संगमरमर, कीमती पत्थर (जैसे लाजवर्द, जैस्पर), सोना, चांदी और जड़ाऊ काम की सामग्री शामिल थी। 20,000 से अधिक कारीगर, मिस्त्री और मजदूर 22 वर्षों तक लगातार काम करते रहे। सामग्री राजस्थान के मकराना से संगमरमर, श्रीलंका से नीलम, अरब से लाजवर्द और अन्य दूर-दूर से लाई गई। यमुना नदी के किनारे नींव मजबूत करने के लिए विशेष इंजीनियरिंग की गई। शाहजहां के दरबार के प्रमुख वास्तुकार उस्ताद अहमद लाहौरी के नेतृत्व में फारसी, इस्लामी और भारतीय शैली का अनोखा मिश्रण तैयार हुआ।
आज के मूल्य में तुलना
2015 के अनुमान के अनुसार, 3.2 करोड़ रुपये की उस समय की राशि आज के लगभग सात से 8 हजार करोड़ के बराबर है क्योंकि हाथ की नक्काशी, दुर्लभ सामग्री और विशाल पैमाने पर श्रम की लागत बहुत ज्यादा होगी। आज अगर ताज महल जैसी इमारत बनानी हो तो विशेषज्ञों का अनुमान 7,000 से 8,000 करोड़ रुपये या उससे अधिक का है। गौरतलब है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) और आगरा के इतिहासकारों के अनुसार, मुगल काल में ताज महल मुगल साम्राज्य की सबसे महंगी परियोजनाओं में से एक थी। शाहजहां ने अपनी पूरी संपत्ति और राज्य संसाधनों का उपयोग किया। यह खर्च केवल इमारत तक सीमित नहीं था बाग, मस्जिद, मेहमानखाना और अन्य संरचनाएं भी शामिल थीं।
ताज महल का महत्व
ताज महल यूनेस्को विश्व धरोहर है। आज यह सालाना करोड़ों पर्यटकों को आकर्षित करता है और भारत की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक बना हुआ है। ASI की रिपोर्ट के अनुसार, यह देश के सबसे अधिक कमाई वाले स्मारकों में शामिल है। यह राशि मुगल वास्तुकला की भव्यता, शाहजहां के प्रेम और उस युग की कारीगरी को दर्शाती है। 3.2 करोड़ रुपये आज के हिसाब से मामूली लग सकते हैं, लेकिन 17वीं शताब्दी में यह साम्राज्य की कई साल की आय के बराबर था। ताज महल सिर्फ पत्थरों का ढांचा नहीं, बल्कि अमर प्रेम और शाही वैभव की मिसाल है।
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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