मुगल बादशाह हुमायूं की जिंदगी संघर्ष से भरी थी। बाबर की मौत के बाद वह बादशाह बना, लेकिन शेरशाह सूरी से हारकर 15 साल निर्वासन झेला। फारस की मदद से 1555 में उसने दिल्ली फिर जीती, लेकिन 1556 में लाइब्रेरी की सीढ़ियों से गिरकर उसकी दुखद मौत हो गई।
Blind Mughal Emperor | दिल्ली के खजाने को लूटने निकले एक रोहिल्ला सरदार ने मुगलों के एक बादशाह को न सिर्फ कैद किया था, बल्कि अंधा भी कर दिया था। मराठा सरदार महादजी सिंधिया की मदद से शाह आलम द्वितीय नाम के इस बादशाह को दोबारा गद्दी मिली, लेकिन वह मराठों और फिर अंग्रेजों पर निर्भर नाममात्र का शासक बनकर रह गया।
मुगल इतिहास के सबसे कम समय तक शासन करने वाला बादशाह जहां शाह केवल 72 दिनों तक गद्दी पर रहा। गुलाम कादिर की कठपुतली बने जहां शाह का शासन पतन का प्रतीक था। मराठों के हमले के बाद वह गद्दी से हटा दिया गया और उसे दर्दनाक मौत दी गई।
जहांदार शाह के दौर में मुगल दरबार सत्ता का केंद्र कम और तमाशे का मंच ज्यादा था। वह कभी बिना कपड़ों के, तो कभी महिलाओं के कपड़े में दरबार लगाने पहुंच जाता था।
5 नवंबर 1556 को लड़ी गई पानीपत की दूसरी लड़ाई में मुगल बादशाह अकबर और बैरम खान ने हिंदू सम्राट हेमू विक्रमादित्य को पराजित किया। एक तीर से घायल हेमू को पकड़कर अकबर के सामने लाया गया, जहां उनका सिर काटकर काबुल भेजा गया। इस युद्ध ने भारतीय इतिहास की दिशा बदल दी।
मुहम्मद शाह रंगीला जब गद्दी पर बैठा तो उसकी उम्र महज 16 साल थी। उसके बारे में कहा जाता है कि उसे औरतों के कपड़े पहनने का शौक था। जानिए उस मुगल शासक के बारे में दिलचस्प बातें...
मुगलकाल का इतिहास काफी दिलचस्प रहा है। एक मुगल शहजादा तो ऐसा था जिसका जन्म लाल किले में हुआ, लेकिन उसे दिल्ली की गलियों में रात को भीख मांगने को मजबूर होना पड़ा था। जानिए कौन था वो...
बाबर की बेटी, हुमायूं की बहन और अकबर की बुआ, यानी मुगल सल्तनत की तीन पीढ़ियों की गवाह रहीं गुलबदन बेगम को लोग घुमक्कड़ बेगम कहते हैं। जानिए क्या है इसके पीछे की वजह...
इतिहासकार फ्रैंकोइस बर्नियर के अनुसार, शाहजहां अपनी बेटी जहांआरा से असामान्य रूप से जुड़ा था। एक बार जब जहांआरा का आशिक उससे मिलने आया, तो शाहजहां ने उसे खौलते पानी में मरवा दिया।
आम धारणा के विपरीत आगरा की स्थापना 1504 में सुल्तान सिकंदर लोदी ने की थी, न कि मुगलों ने। उसने आगरा को सैन्य और व्यापारिक केंद्र बनाया, पर साथ ही हिंदुओं पर जजिया कर और धार्मिक पाबंदियां लगाकर कट्टर इस्लामी शासन लागू किया।
उत्तर प्रदेश में 11वीं और12वीं क्लास के सिलेबस से मुगलों का चैप्टर हटाए जाने पर एनसीईआरटी के अध्यक्ष ने सफाई दी है और कहा है कि ऐसा कुछ नहीं है, हमने तो बस बच्चों का बोझ कम किया है।
मध्य पूर्व और भारत के लिए सोथबीज के अध्यक्ष एडवर्ड गिब्स ने कहा कि निस्संदेह रत्नों के विशेषज्ञों और इतिहासकारों के लिए ये चमत्कार हैं।
ये एक ऐसा भोजन है, जिसमें पेट से लेकर आत्मा तक तृप्त हो जाती है। गरीब और अमीर सब खाते हैं लेकिन किसी ने सोचा नहीं होगा कि नफरत फैलाने वालों की नजर बिरयानी की कढ़ाई पर भी है।
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