Viral Video : पेरिस में रहने वाले एक भारतीय व्यक्ति ने यूरोप में नौकरी ढूंढ़ने के अपने अनुभव को शेयर किया है। उन्होंने भारत की प्लेसमेंट-आधारित प्रणाली से इसके प्रमुख अंतरों की ओर इशारा किया है। शख्स ने एक वीडियो पोस्ट किया है जिसमें उन्होंने बताया है कि विदेश में नौकरी पाना अंतरराष्ट्रीय छात्रों और पेशेवरों के लिए अक्सर अधिक चुनौतीपूर्ण क्यों हो सकता है। वीडियो में पारस ने कहा, 'मैं आपको एक मुख्य कारण बताता हूं कि यहां नौकरी ढूंढ़ना इतना मुश्किल क्यों है। भारत में छात्रों के लिए जो चीजें आमतौर पर होती हैं, वे यहां नहीं होतीं। भारत में कॉलेज प्लेसमेंट होते हैं। अगर आप योग्य हैं, आपके पास कौशल है, और आपका नेटवर्क अच्छा है, तो आपकी नौकरी पक्की है।'
इंस्टाग्राम पर शेयर किया गया वीडियो
इस वीडियो को इंस्टाग्राम पर @paras_balani नामक हैंडल से शेयर किया गया है। उन्होंने आगे कहा कि, 'भारत में कई लोगों को जिस सुव्यवस्थित कैंपस प्लेसमेंट सिस्टम की आदत है, वह यूरोप में लगभग न के बराबर है। लेकिन जब आप यूरोप आएं, तो यह बात ध्यान में रखें कि यहां ऐसा कुछ नहीं होता। यहां प्लेसमेंट इवेंट नहीं होते। हां, जॉब फेयर जरूर होते हैं जहां आप अपनी किस्मत आजमा सकते हैं, लेकिन यहां आपको नेटवर्किंग करनी होगी।' पेशेवर संपर्कों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए, पारस ने इस बात पर जोर दिया कि नौकरी पाने में नेटवर्किंग अक्सर निर्णायक कारक होती है। उन्होंने कहा, 'यहीं पर लिंक्डइन बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आप लोगों से जुड़ सकते हैं और मेरे व्यक्तिगत अनुभव के अनुसार, लगभग 90% काम नेटवर्किंग के माध्यम से ही होता है।'
कम्युनिकेशन की दी सलाह
शख्स ने नौकरी चाहने वालों को सक्रिय रूप से संवाद करने और संबंध बनाने की सलाह दी। कहा कि, 'इसलिए सुनिश्चित करें कि आप लोगों से बात करें, संवाद करें, अपनी बात रखें और चतुराई से उन्हें मना लें, ताकि आपको नौकरी मिल सके।' पारस ने भर्ती प्रक्रियाओं में अंतरों पर भी ध्यान दिलाया और कहा, 'दूसरा, यहां पांच दौर के साक्षात्कार होना बहुत दुर्लभ है। किसी भी कंपनी के लिए पांच दौर के साक्षात्कार देना अनिवार्य नहीं है। यहां अधिकतम दो या तीन दौर के साक्षात्कार होते हैं।' उनके अनुसार, यूरोप में नियोक्ता उम्मीदवारों का आकलन करने के लिए अनौपचारिक तरीकों का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। वे कहते हैं कि, 'दो दौर के बाद भी अगर उन्हें कोई संदेह रहता है, तो वे निश्चित रूप से आपको बाहर मिलने के लिए कहेंगे, जैसे कि किसी कैफे में, ताकि आप एक-दूसरे को बेहतर तरीके से जान सकें और कभी-कभी अनौपचारिक तरीके से ही आप असल उम्मीदवार को जान पाते हैं।' पारस ने अपने वीडियो का समापन करते हुए कहा, 'तो यही यहां की संस्कृति है। यहाँ औपचारिक और व्यावहारिक दोनों तरह का माहौल है, लेकिन साथ ही, लोग बेहतर उम्मीदवार ढूंढने में काफी मेहनत करते हैं ताकि संतुलन बना रहे। लेकिन यहाँ नेटवर्किंग करना अनिवार्य है।'
यूजर्स ने दी प्रतिक्रिया
। “यूरोप में नौकरी कैसे पाएं” कैप्शन के साथ शेयर किए गए इस वीडियो के कमेंट में कई यूजर्स ने प्रतिक्रियाएं दी हैं। एक यूजर ने लिखा, 'यह बिल्कुल सच है, विदेश में नेटवर्किंग ही सब कुछ है।' दूसरे ने कहा, 'भारत में प्लेसमेंट हमें बिगाड़ देते हैं, असल दुनिया बहुत अलग है।'
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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