सोशल मीडिया पर एक हैरान करने वाला वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें एक शख्स ने अपनी एक आंख को हटवाकर उसकी जगह एक फ्लैश लाइट लगवा लिया है। यह फ्लैश लाइट 20 घंटे तक लगातार जल सकती है। यह वीडियो सबसे पहले इंस्टाग्राम पर सामने आया था, जिसमें ब्रायन स्टेनली नाम के एक शख्स ने अपनी आंख में लगाए गए टाइटेनियम स्कल लाइट को कैमरे के सामने दिखाया था। वीडियो में ब्रायन ने एक अंधेरे कमरे में अपनी आंख से निकलने वाली रोशनी का डेमो दिया, जिसमें वह इस रोशनी की मदद से किताब पढ़ते नजर आ रहे थे। उनका यह वीडियो अब सोशल मीडिया के हर एक प्लेटफॉर्म पर देखा जा सकता है। एक बार फिर से उनका ये पुराना वीडियो सोशल साइट एक्स पर वायरल हो रहा है। जिसे @PicturesFoIder नाम के अकाउंट से शेयर किया गया है। इस वीडियो को अब तक डेढ़ मिलियन से भी ज्यादा लोगों ने देखा और 18 हजार लोगों ने लाइक किया है।
शख्स पहले भी कर चुका है ऐसा काम
वीडियो में दिख रहे शख्स की आंख में लगी फ्लैश लाइट इतनी तेज है कि यह मोबाइल टॉर्च की तरह काम करती है। यह टॉर्च अंधेरे में किसी भी चीज को आसानी से देखने में मदद करती है। ब्रायन का दावा है कि इस लैंप की बैटरी लाइफ 20 घंटे तक है और यह गर्म भी नहीं होती। बता दें कि, ब्रायन स्टेनली ने इससे पहले भी एक कृत्रिम आंख लगवाई थी। जो हॉलीवुड फिल्म 'टर्मिनेटर' में अर्नोल्ड श्वार्जनेगर के किरदार की तरह चमकती थी। उसके बाद उन्होंने उस आंख को निकलवाकर अब ये फ्लैशलाइट वाली आंख लगवा ली है। इस लाइट को आंख के सॉकेट में फिट किया गया है, और यह पूरी तरह से सुरक्षित है। ब्रायन का कहना है कि इस लाइट को विशेष रूप से डिजाइन किया गया है ताकि यह लंबे समय तक बिना किसी असुविधा के काम कर सके।
वीडियो पर ऐसी रही लोगों की प्रतिक्रिया
सोशल मीडिया पर इस नए इनोवेशन को देखकर लोग अपनी तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। जहां कुछ लोग इसे तकनीक का चमत्कार मान रहे हैं, तो कुछ इसे खतरनाक और फालतू की चीज बता रहे हैं। वीडियो पर एक यूजर ने कमेंट करते हुए लिखा- "यह गजब है। यह 'गॉड ऑफ वॉर' के मिमिर जैसी वाइब्स देता है।" दूसरे ने लिखा, "यह शख्स या तो जीनियस है या फिर पागल।" वहीं, कई यूजर्स ने इसे साइंस फिक्शन फिल्मों से प्रेरित बताया।
तकनीक के पीछे का साइंस
आइए अब समझ लेते हैं कि इस तकनीक के पीछे आखिर कौन सी साइंस लगी है। दरअसल, इस टाइटेनियम स्कल लाइट एक बायो-इंजीनियरिंग और प्रोस्थेटिक तकनीक का नमूना है। यह लाइट एक हाई-इंटेंसिटी एलईडी बल्ब से बना है, जो कम ऊर्जा में अधिक रोशनी देता है। इसकी बैटरी को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह 20 घंटे तक लगातार काम कर सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के उपकरण को मानव शरीर में फिट करने के लिए सर्जरी और बायो-कम्पैटिबल सामग्री का उपयोग किया जाता है। हालांकि, इस तरह की सर्जरी में कई जोखिम भी शामिल हैं।, जैसे कि इंफेक्शन या फिर टिश्यू डैमेज।
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया पोस्ट पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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