Interesting Facts : जब भी आप कभी कार या बस से लंबे सफर निकलते होंगे तो हाईवे या एक्सप्रेस-वे से आपको गुजरना ही पड़ता होगा। रास्ते में आने वाले गांव या शहरों को बताने के लिए कुछ संकेतक लगे होते हैं उन पर भी नजर पड़ती होगी। मगर क्या आपने कभी सोचा है कि, सड़कों के किनारे कुछ पुराने समय के पत्थर लगे होते हैं। इन पत्थर में जगह का नाम और उक्त स्थान से उस जगह की दूरी लिखी होती है। बता दें कि, ये पत्थर 'मील के पत्थर' कहलाते हैं। प्राय: ये पत्थर आपको अलग-अलग रंगों में दिखाई देते होंगे। जैसे पीले और सफेद, हरे और सफेद, नीले या काले और सफेद, और नारंगी और सफेद। क्या आप जानते हैं कि, ये पत्थर अलग-अलग रंग के क्यों होते हैं ? यदि नहीं तो आज हम आपको इसी के बारे में बताने वाले हैं।
हाईवे पर लगे ऊपर से हरे और नीचे से सफेद रंग वाले पत्थर राज्य राजमार्ग को दर्शाते हैं। ये सड़कें किसी विशेष राज्य के शहरों और कस्बों को जोड़ती हैं और संबंधित राज्य सरकार की जिम्मेदारी के अंतर्गत आती हैं। मसलन, तेलंगाना में SH-1 और आंध्र प्रदेश में SH-48। चूंकि राज्य राजमार्ग क्षेत्रीय संपर्क स्थापित करने में सहायक होते हैं, इसलिए हरे रंग का उपयोग उस स्थानीय उद्देश्य को दर्शाने के लिए किया जाता है।
हाईवे पर सफर करते समय यदि आपको कोई पत्थर ऊपर से नीले या काले रंग से और नीचे से सफेद रंग से रंगा हुआ दिखता है तो बता दें कि यह शहर की सड़क या जिले की सड़क को दर्शाता है। ये सड़कें आम तौर पर शहरी केंद्रों, कस्बों या नगरपालिकाओं को जोड़ती हैं और शहरी यातायात को सुगम बनाने के लिए बनाई जाती हैं।
हाईवे पर पीले और नीचे सफेद रंग से रंगे हुए मील के पत्थर राष्ट्रीय राजमार्ग को दर्शाते हैं। ये सड़कें देश भर के प्रमुख शहरों और राज्यों को जोड़ती हैं और लंबी दूरी की यात्रा और तेज गति वाले वाहनों के लिए बनाई गई हैं। इनका रखरखाव भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा किया जाता है। उदाहरण के लिए, श्रीनगर से कन्याकुमारी तक जाने वाला NH-44 और दिल्ली से कोलकाता तक फैला NH-19। पीले रंग का उपयोग इसलिए किया जाता है क्योंकि यह विभिन्न भूभागों और मौसम की स्थितियों में आसानी से दिखाई देता है।

अगर आपको कोई पत्थर नारंगी और सफेद रंग का दिखे तो समझ जाएं कि, ये गांव की सड़क को दर्शा रहा है। इसका निर्माण आमतौर पर प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना जैसी ग्रामीण विकास योजनाओं के तहत किया जाता है। यहां नारंगी रंग ग्रामीण संपर्क और विकास का प्रतीक है, जो गांवों को जोड़ने के लिए बनाई गई सड़कों को इंगित करता है।
मील के पत्थरों के रंगों की जानकारी आपको हाईवे पर काफी मदद करेगी। इससे आपको उस सड़क के अधिकार क्षेत्र और कार्य को आसानी से पहचानने में मदद मिलती है जिस पर आप यात्रा कर रहे हैं। यह जानकारी यात्रा की योजना बनाते समय या अपरिचित क्षेत्रों में नेविगेट करते समय विशेष रूप से उपयोगी होती है।
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
ये भी पढ़ें -
कभी सोचा है टूथब्रश के ब्रिसल्स में 2 रंग क्यों होते हैं, जवाब सुनकर हक्के-बक्के रह जाएंगे;; चाहे तो शर्त लगा लें
तौलिया के किनारे पट्टियां क्यों बनी होती हैं, इनका क्या काम होता है; 100 में से 99 लोग नहीं जानते
संपादक की पसंद