Thursday, February 12, 2026
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निपाह वायरस के संक्रमण से हुई नर्स की दर्दनाक मौत, जानें कितना खतरनाक है यह विषाणु

Reported By : Onkar Sarkar Edited By : Vineet Kumar Singh Published : Feb 12, 2026 06:51 pm IST, Updated : Feb 12, 2026 06:51 pm IST

निपाह वायरस से 25 साल की एक नर्स की दर्दनाक मौत हो गई है। पश्चिम बंगाल में इस संक्रमण से यह पहली दर्ज मौत है। निपाह जानवरों से इंसानों में फैलने वाला घातक वायरस है, जो दिमाग पर हमला करता है।

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Image Source : PTI REPRESENTATIONAL पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस से एक नर्स की मौत हो गई है।

कोलकाता: पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के बारासात में स्थित एक प्राइवेट अस्पताल में 25 साल की एक महिला नर्स की निपाह वायरस से मौत हो गई है। राज्य के हाल के इतिहास में यह निपाह वायरस से होने वाली पहली मौत है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, महिला नर्स की हालत काफी गंभीर थी और हाल ही में उनका निपाह वायरस टेस्ट नेगेटिव आया था, लेकिन उनकी हालत लगातार बिगड़ रही थी। उन्हें लंबे समय तक CCU में रखा गया था। बुधवार को उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया और आज शाम 4 बजे अस्पताल में उनकी मौत हो गई।

2 लोग हुए थे निपाह वायरस से संक्रमित

बता दें कि इस मामले में नर्सिंट स्टाफ से 2 लोग निपाह वायरस से संक्रमित पाए गए थे। दोनों को बारासात के इसी प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जनवरी में पुरुष नर्स पूरी तरह ठीक होकर अस्पताल से छुट्टी पा गए थे, लेकिन महिला नर्स की हालत सुधर नहीं पाई और उन्हें अस्पताल में ही रखना पड़ा। बता दें कि निपाह वायरस एक इंसान से दूसरे इंसान में भी फैल सकता है और काफी खतरनाक होता है। संक्रमित व्यक्ति के तरल पदार्थों के निकट संपर्क से यह वायरस फैल सकता है। निपाह वायरस से संक्रमण की घटनाओं के बाद थाईलैंड, मलेशिया और सिंगापुर जैसे एशियाई देशों ने हवाई अड्डों पर स्क्रीनिंग बढ़ा दी थी।

जानवरों से इंसानों में फैलता है ये वायरस

निपाह वायरस एक जानवरों से इंसानों में फैलने वाला वायरस है। यह हेंद्रा वायरस से संबंधित है। यह मुख्य रूप से फल खाने वाले चमगादड़ों के लार, पेशाब या मल से इंसानों तक पहुंचता है। यह दूषित खजूर का रस पीने या सूअरों के जरिए भी यह फैल जाता है। यह संक्रमित जानवरों या इंसान से इंसान में निकट संपर्क से भी फैल सकता है। हालांकि यह कोविड जैसी सांस की बीमारियों की तरह बहुत तेजी से नहीं फैलता। इस वायरस के लक्षण संक्रमण के 4 से 21 दिन बाद दिखते हैं। शुरुआत में बुखार, सिरदर्द और खांसी होती है, जो बाद में गंभीर निमोनिया या दिमाग की सूजन (एन्सेफलाइटिस) में बदल जाती है।

आखिर निपाह वायरस इतना घातक क्यों है?

निपाह वायरस की सबसे बड़ी समस्या यह है कि यह दिमाग पर हमला करता है। इससे दौरे पड़ते हैं, मरीज कोमा में चला जाता है, व्यक्तित्व में बदलाव आता है और सांस लेने में दिक्कत होती है। गंभीर मामलों में करीब आधे मरीजों की मौत हो जाती है। जो लोग बच जाते हैं, उनमें कई साल बाद भी बीमारी वापस लौट सकती है। इस वायरस से निजात के लिए अभी तक कोई लाइसेंस प्राप्त वैक्सीन या दवा नहीं है। इसके इलाज के लिए ऑस्ट्रेलिया की एक प्रयोगात्मक दवा (m102.4 मोनोक्लोनल एंटीबॉडी) ट्रायल में है, जो भविष्य में मददगार साबित हो सकती है। निपाह वायरस की मृत्यु दर 75 प्रतिशत तक बताई जाती है।

निपाह वायरस की रोकथाम के लिए क्या करें?

निपाह का इलाज मुख्य रूप से सिर्फ और सिर्फ ठीक से देखभाल से हो सकता है। इसमें पानी चढ़ाना, ऑक्सीजन देना, वेंटिलेटर का इस्तेमाल और दौरे रोकने वाली दवाओं का इस्तेमाल शामिल हैं। रिबाविरिन या रेमडेसिविर जैसी दवाओं के ट्रायल हुए हैं, लेकिन नतीजे मिले-जुले रहे हैं। कुल मिलाकर परहेज ही इससे बचने का सबसे अच्छा उपाय है। चमगादड़ों के संपर्क में आने वाले तरल पदार्थों से बचें, खाना सुरक्षित तरीके से खाएं और संक्रमण के दौरान अच्छी साफ-सफाई रखें। अस्पतालों में भी निपाह वायरस से जुड़े मरीजों को आइसोलेट करना ही इससे बचने का सबसे अच्छा विकल्प है।

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