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'बंगाल में कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है, चुनाव आयोग अपनी मर्जी से फोर्स बुलाए', न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाए जाने पर भड़का सुप्रीम कोर्ट

 Reported By: Atul Bhatia Edited By: Shakti Singh
 Published : Apr 02, 2026 11:12 am IST,  Updated : Apr 02, 2026 11:46 am IST

जिन लोगों ने न्यायिक अधिकारियों को 9 घंटे से ज्यादा समय तक बंधक बनाकर रखा, उनके नाम स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन में वोटर लिस्ट से बाहर कर दिए गए थे। इन लोगों ने सात अधिकारियों को काफी देर तक बंधक बनाए रखा।

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अधिकरियों की गाड़ी में तोड़फोड़ Image Source : X/@DRSUKANTABJP

पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट से नाम कटने से नाराज लोगों ने 7 न्यायिक अधिकारियों को 9 घंटे से ज्यादा देर तक बंधक बनाकर रखा। स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के दौरान इन लोगों का नाम वोटर लिस्ट से काट दिया गया था। घटना मालदा जिले में हुई, जहां बुधवार को गुस्साए लोगों ने तीन महिलाओं समेत सात अधिकारियों को घेर लिया। काफी देर बाद अर्धसैनिक बलों की एक टुकड़ी ने लोगों को हटाया और अधिकारियों को मुक्त कराकर सुरक्षित जगह पर पहुंचाया। इस घटना को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य के सीनियर पुलिस अधिकारियों से जवाब मांगा है।

सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के डीजीपी और दूसरे सीनियर अधिकारियों से जवाब मांगा कि उनके 'निष्क्रियता' के लिए उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए। कोर्ट का कहना है कि यह पश्चिम बंगाल सरकार और अधिकारियों द्वारा भी ड्यूटी से मुंह मोड़ना है। उन्हें अपने निष्क्रियता के कारण बताने होंगे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह न्यायिक अधिकारियों पर साइकोलॉजिकल अटैक के लिए किसी को भी दखल देने, कानून हाथ में लेने की इजाजत नहीं देगा। कोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है।

चुनाव आयोग कहीं से भी बुला सकता है फोर्स- सुप्रीम कोर्ट

चीफ जस्टिस ने कहा कि उन्हें कल रात कड़े ऑर्डर जारी करने पड़े, तब जाकर एडमिनिस्ट्रेशन एक्शन में आया। बंधक बनाई गई अधिकारी का 5 साल का बच्चा है, लेकिन रात 11 बजे तक आपके कलेक्टर वहां नहीं थे। मुझे रात में बोलकर बहुत कड़े ऑर्डर देने पड़े। ऐसे में हम ज्यूडिशियल ऑफिसर्स की सुरक्षा के लिए कहीं से भी फोर्स बुलाने का काम चुनाव आयोग पर छोड़ते हैं। वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट के सामने यह मामला रखा। उन्होंने कहा, 'मुझे अभी टेलीग्राफ से एक रिपोर्ट मिली है।' इस पर जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि मैं इसे राजनीतिक रंग नहीं देना चाहता, लेकिन हमें सुबह 2 बजे से ही रिपोर्ट मिल रही थी। शाम 5 बजे उन्होंने अधिकारियों का घेराव किया और रात 11 बजे तक वहां कोई नहीं था। इस पर सिब्बल ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है। वहीं, वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी ने कहा कि अधिकांश अधिकारियों का तबादला राज्य से बाहर कर दिया गया है।

चीफ सेक्रेटरी, डीजीपी, होम सेक्रेटरी का व्यवहार बहुत बुरा- सीजेआई

चीफ जस्टिस ने बताया, "घेराव दोपहर 3:30 बजे शुरू हुआ। रजिस्ट्रार जनरल ने एडमिनिस्ट्रेटिव अथॉरिटी को इन्फॉर्म किया और तुरंत एक्शन लेने को कहा। रात 8:30 बजे तक कुछ नहीं हुआ। फिर होम सेक्रेटरी से कॉन्टैक्ट किया गया, और डीजीपी ने हाईकोर्ट चीफ जस्टिस के साथ ग्रुप कॉल की। ​​जल्द एक्शन लेने का भरोसा दिया गया, लेकिन कोई ठोस एक्शन नहीं लिया गया। सीजे ने अपने लेटर में बताया कि न तो डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट और न ही सुपरिटेंडेंट ऑफ़ पुलिस पहुंचे। सीजे को डीजीपी और होम सेक्रेटरी को बुलाना पड़ा। कल जो घटना हुई, वह इस कोर्ट के अधिकारियों को चुनौती देने की एक बेशर्म कोशिश थी। यह ज्यूडिशियल अधिकारियों का हौसला तोड़ने और प्रोसेस को रोकने की एक सोची-समझी चाल थी। चीफ सेक्रेटरी, डीजीपी, होम सेक्रेटरी का व्यवहार बहुत बुरा है।"

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