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हंसखालि में नाबालिग से गैंगरेप और मर्डर मामले में आया कोर्ट का फैसला, तीन दोषियों को आजीवन कारावास की सजा

 Edited By: Amar Deep @amardeepmau
 Published : Dec 23, 2025 07:10 pm IST,  Updated : Dec 23, 2025 07:10 pm IST

साल 2022 में एक नाबालिग के साथ हुए रेप और मर्डर मामले में कोर्ट ने तीन दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इस मामले की जांच सीबीआई कर रही थी।

तीन दोषियों को कोर्ट ने सुनाई आजीवन कारावास की सजा। - India TV Hindi
तीन दोषियों को कोर्ट ने सुनाई आजीवन कारावास की सजा। Image Source : PTI/REPRESENTATIVE IMAGE

नादिया: पश्चिम बंगाल के नादिया जिले के हंसखालि में साल 2022 में नाबालिग से रेप और मर्डर का मामला सामने आया है। इस मामले में कोर्ट ने आखिरकार तीन लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। रानाघाट कोर्ट के जज ने मंगलवार को यह फैसला सुनाया। जिन दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है, उनमें सोहेल गयाली, प्रभाकर पोद्दार और रंजीत मलिक शामिल हैं। कोर्ट ने घटना के समय तृणमूल पंचायत सदस्य समरेंद्र गयाली को भी पांच साल सश्रम कारावास का आदेश दिया है। बता दें कि कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश पर मामले की जांच CBI को सौंप दी गई थी। CBI ने लगभग तीन साल तक लगातार जांच जारी रखी।

नाबालिग को सशर्त मुचलके पर किया रिहा

बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने बताया कि इनमें से एक दोषी घटना के समय नाबालिग था और उसे एक वर्ष तक अच्छा आचरण बनाए रखने की शर्त के साथ 50,000 रुपये के मुचलके पर रिहा कर दिया गया। उन्होंने कहा कि इस आदेश को होई कोर्ट में चुनौती दी जाएगी। अधिवक्ता ने बताया कि शेष दोषियों को आपराधिक साजिश, सबूतों को नष्ट करने और आपराधिक धमकी सहित अन्य अपराधों के लिए कम कारावास की सजा दी गई। रानाघाट की एडीजे अदालत ने हंसखालि में 2022 में चोटों के कारण दम तोड़ देने वाली किशोरी से हुए सामूहिक दुष्कर्म के मामले में 9 लोगों को सोमवार को दोषी ठहराया। 

क्या है पूरा मामला?

बता दें कि सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस के एक पंचायत नेता के बेटे की जन्मदिन की पार्टी के दौरान चार अप्रैल 2022 को 14 वर्षीय लड़की से सामूहिक दुष्कर्म किया गया था। लड़की बीमार पड़ गई और अगले दिन उसकी मौत हो गई। आरोपियों के कथित दबाव में जल्दबाजी में उसके शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया। इस घटना से लोगों में आक्रोश फैल गया और विपक्ष तथा सत्ताधारी दलों के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया। कोलकाता होई कोर्ट ने इस मामले की जांच का जिम्मा सीबीआई को सौंपा था। अधिवक्ता अनिंद्या दास ने कोलकाता हाई कोर्ट में याचिका दायर कर राज्य पुलिस से सीबीआई को जांच स्थानांतरित करने की मांग की थी, जिसमें उन्होंने इस बात पर चिंता जताई थी कि सत्ताधारी पार्टी के नेता के बेटे की संलिप्तता निष्पक्ष जांच को प्रभावित कर सकती है। 

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