पश्चिम बंगाल में नदिया जिले के नवद्वीप में मंगलवार को एक नाले से करीब 50 वोटर आईडी कार्ड बरामद किए गए। इस घटना ने पूरे राज्य में राजनीतिक भूचाल ला दिया है। राज्य में चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) किए जाने के बीच नाले से इतनी बड़ी संख्या में वोटर आईडी कार्ड मिलने से सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और विपक्षी दल भाजपा के नेताओं के बीच राजनीतिक विवाद उत्पन्न हो गया तथा दोनों ने एक-दूसरे पर षड्यंत्र का आरोप लगाया।
नाले में कैसे पहुंचे वोटर आईडी कार्ड?
एक अधिकारी ने जानकारी देते हुए बताया कि नवद्वीप में प्रतापनगर अस्पताल रोड के पास एक नाले से लगभग 50 मतदाता पहचान पत्र बरामद किए गए। उन्होंने बताया कि सत्यापन के बाद, इन पहचान पत्रों में दर्ज नाम नवद्वीप नगरपालिका के वार्ड संख्या चार के कुछ निवासियों के नामों से मेल खाते पाए गए। लेकिन इन लोगों ने बताया कि उनके पास अपने-अपने मतदाता पहचान पत्र हैं। इन पहचान पत्रों की सत्यता और ये नाले में कैसे पहुंचे, इसकी जांच शुरू कर दी गई है।
तृणमूल और BJP में आरोप-प्रत्यारोप शुरू
मतदाता पहचान पत्रों की बरामदगी के बाद भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि इससे चल रही SIR प्रक्रिया के दौरान संभावित अनियमितताओं के उनके पहले के दावों की पुष्टि होती है। हालांकि, तृणमूल नेताओं ने आरोपों को खारिज करते हुए इस घटना को “भाजपा की साजिश” करार दिया और निर्वाचन आयोग से जांच की मांग की।
वहीं, इस घटना को लेकर स्थानीय लोग गुस्से में हैं। ये यह जानना चाहते हैं कि आखिर इतने अहम दस्तावेज नाले में कैसे फेंक दिए गए? यह सिर्फ एक घटना नहीं बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों पर चोट मानी जा रही है। (भाषा इनपुट्स के साथ)
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