बिश्केक: भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और किर्गिस्तान के राष्ट्रपति अल्माज़बेक अतांबायेव इस बात पर राज़ी हो गए हैं कि भारत औऱ किर्गिस्तान हर साल संयुक्त सैनिक अभ्यास करें। दोनों नेताओं की बातचीत में हस्ताक्षरित द्विपक्षीय फौजी-तकनीकी सहयोग संबंधी समझौते में यह बात कही गई है।
नरेंद्र मोदी ने कहा, ‘हम दोनों देश शांति औऱ सुरक्षा को सुनिश्चित करना चाहते हैं। इसके अलावा हम उग्रवाद औऱ आतंकवाद, जो कि हम सभी के लिए खतरा है, के खिलाफ संघर्ष करना चाहते हैं।’
इसके साथ ही भारत और किर्गिस्तान ने रविवार को चार महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए। इनमें रक्षा सहयोग बढ़ाना तथा चुनाव के क्षेत्र में एकसाथ काम करने से संबंधित समझौता भी शामिल है। रक्षा समझौते के तहत रक्षा, सुरक्षा, सैन्य शिक्षण तथा प्रशिक्षण में सहयोग को बढ़ावा दिया जाएगा। संयुक्त सैन्य अभ्यास, अनुभवों तथा सूचनाओं का आदान-प्रदान, सैन्य निर्देश तथा पर्यवेक्षण का आदान-प्रदान किया जाएगा।
चुनाव के क्षेत्र में समझौता ज्ञापन पर भारत की तरफ से उप चुनाव आयुक्त वी.जुत्सी और किर्गिस्तान के एक अधिकारी ने हस्ताक्षर किया। इसके तहत चुनाव के प्रबंधन और प्रशासन को लेकर चुनाव आयोगों को तकनीकी तथा क्षमता संबंधी सहायता दी जाएगी।
तीसरा एमओयू किर्गिस्तान के आर्थिक मंत्रालय और ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड ऑन कोऑपरेशन के बीच हुआ, जिसके तहत मानकीकरण के क्षेत्र में तकनीकी सहयोग को बढ़ावा दिया जाएगा, दोनों पक्षों के बीच आवश्यक सूचना तथा विशेषज्ञता के आदान-प्रदान के उद्देश्य से पारस्परिक व्यापार के लिए सहमति का मूल्यांकन तथा विशेषज्ञता को साझा किया जाएगा।
चौथा समझौता संस्कृति को लेकर किया गया है, जिसके अंतर्गत सांस्कृतिक धरोहरों का संरक्षण किया जाएगा। लोक कला, नाटक तथा युवा महोत्सव के लिए एक संस्था स्थापित की जाएगी।